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छत्तीसगढ़

‘हथकरघा एवं हस्तशिल्प’ प्रदर्शनी

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  • 08 Sep 2021
  • 2 min read

चर्चा में क्यों?

7 सितंबर, 2021 को छत्तीसगढ़ के ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रुद्रकुमार ने दुर्ग ज़िले के भिलाई में स्थित सतनाम भवन में सातदिवसीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। यह प्रदर्शनी 13 सितंबर तक चलेगी।

प्रमुख बिंदु

  • इस प्रदर्शनी का आयोजन ज़िला हथकरघा कार्यालय, दुर्ग द्वारा किया जा रहा है।
  • इस प्रदर्शनी में बुनकरों और शिल्पकारों द्वारा तैयार किये गए राज्यों के पारंपरिक वस्त्रों सहित छत्तीसगढ़ राज्य की ढोकरा हस्तशिल्प, लौह शिल्प, काष्ठ शिल्प, बाँस शिल्प, गोदना शिल्प, शीसल शिल्प, टेराकोटा शिल्प, भित्ति चित्र, पत्थर शिल्प, कौड़ी शिल्प, तूंबा शिल्प और हथकरघा वस्त्रों में कोसा सिल्क, टसर सिल्क, कॉटन के ड्रेस मटेरियल, साड़ियाँ, दुपट्टे, चादर, बेडशीट तथा खादी वस्त्रों और ग्रामोद्योग द्वारा निर्मित सामग्रियों के स्टॉल लगाए गए हैं।
  • प्रदर्शनी में विभिन्न ज़िलों के लगे स्टॉलों की विभिन्न कलाकृतियों में धान के पैरा से बनी जांजगीर की कलाकृति, धान के पैरे से पिरोई गईं डॉ. भीमराव अंबेडकर, महावीर स्वामी और गणेशजी की आकर्षक कलाकृतियाँ प्रमुख हैं।
  • इस अवसर पर गुरु रुद्रकुमार ने सभी हथकरघा वस्त्र एवं हस्तशिल्प कला के स्टॉलों की सराहना की और इसे अपनी संस्कृति एवं सभ्यता को जीवित रखने का माध्यम बताया।
  • उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से ग्रामोद्योग से जुड़े लोगों को सीधा लाभ मिलता है और उनकी कला तथा उनके द्वारा तैयार किये गए उत्पाद को बेहतर बाज़ार भी उपलब्ध होता है। इससे कारीगरों और शिल्पियों को अपनी अभिव्यक्ति को कला के माध्यम से व्यक्त करने में सहायता मिलती है तथा उनका हौसला बढ़ता है और वे दोगुने उत्साह से काम करते हैं।
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