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बिहार

असर (ASER) रिपोर्ट

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  • 18 Nov 2021
  • 4 min read

चर्चा में क्यों?

17 नवंबर, 2021 को 16वीं ऐन्यूअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (ग्रामीण) 2021 जारी की गई। इसके अनुसार बिहार के सरकारी विद्यालयों में नामांकन में वृद्धि हुई है।

प्रमुख बिंदु 

  • रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले 6-14 वर्ष आयु समूह के बच्चों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में 3.6% की वद्धि हुई है।
  • 2020 में बिहार के सरकारी विद्यालयों में नामित बच्चों (6-14 वर्ष) की संख्या 76.9 प्रतिशत थी।
  • बिहार के सरकारी विद्यालय में 78.2 प्रतिशत लड़के (6-14 वर्ष आयु समूह) एवं 82.9 प्रतिशत लड़कियाँ (6-14 वर्ष आयु समूह) नामांकित हैं, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर 67.9 प्रतिशत लड़के एवं 73 प्रतिशत लड़कियाँ ही सरकारी विद्यालयों में नामांकित हैं, शेष का निजी विद्यालयों में नामांकन है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के 73.5 प्रतिशत नामांकित विद्यार्थी ट्यूशन लेते हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत 39.2 प्रतिशत है।
  • वर्ष 2021 में बिहार के वैसे नामांकित विद्यार्थी, जिनके घरों में स्मार्टफोन है, की संख्या 54.5 प्रतिशत हो गई है, जो वर्ष 2018 में मात्र 27.2 प्रतिशत थी। यह कोविड दौर में ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा मिलने के कारण संभव हुआ है।
  • स्मार्टफोन की उपलब्धता के मामले में यद्यपि बिहार अभी भी सबसे निचले पायदान पर है। 97.5 प्रतिशत स्मार्टफोन उपलब्धता के साथ केरल जहाँ प्रथम स्थान पर है, वहीं राष्ट्रीय औसत भी 67.6 प्रतिशत है, जो बिहार की अपेक्षा काफी अधिक है।
  • घरों पर स्मार्टफोन उपलब्ध होने के बावजूद भी बिहार के 53.8 प्रतिशत नामांकित विद्यार्थियों को पढ़ाई करने के लिये स्मार्टफोन नहीं मिल पा रहा है जो देश में सर्वाधिक है तथा यह एक बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है।
  • बिहार के 89.4 प्रतिशत नामांकित बच्चों के पास उनके ग्रेड की पुस्तकें उपलब्ध हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत 91.9 प्रतिशत है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, 6-14 वर्ष की आयु समूह में बिहार के 6.7 प्रतिशत बच्चे अभी भी अनामांकित हैं, जिनमें 7.1 प्रतिशत लड़के एवं 4.7 प्रतिशत लड़कियाँ शामिल हैं। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर 4.6 प्रतिशत बच्चे अनामांकित हैं।
  • रिपोर्ट से स्पष्ट है कि बिहार के मात्र 10 प्रतिशत नामांकित विद्यार्थी ही घरों से ऑनलाइन पढ़ाई कर पा रहे हैं, जबकि केरल में यह 91 प्रतिशत है, वहीं राष्ट्रीय औसत भी बिहार से काफी अधिक 24.2 प्रतिशत है।
  • विदित हो कि शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट (ASER) एन.जी.ओ ‘प्रथम’ द्वारा जारी की जाती है, जो ग्रामीण भारत के बच्चों की स्कूली शिक्षा की स्थिति एवं बुनियादी पढ़ने और गणित की क्षमता पर आँकड़े प्रस्तुत करती है।
  • कोविड-19 महामारी के कारण असर (ASER) 2021 एक फोन आधारित सर्वेक्षण के आधार पर तैयार किया गया है।
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