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विविध

अगस्त 2020

  • 13 Oct 2020
  • 45 min read

PRS के प्रमुख हाइलाइट्स

  • कोविड-19
    • तरलता समर्थन के लिये अतिरिक्त उपाय
    • डिस्कॉम्स के लिये वर्किंग कैपिटल लोन 
  • समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) विकास
    • वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में GDP में 23.9% की गिरावट 
    • वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में औद्योगिक उत्पादन में 36% की गिरावट
    • रेपो दर और रिवर्स रेपो दर अपरिवर्तनीय रही
  • वित्त
    • GST मुआवज़े की कमी को पूरा करने हेतु दो विकल्प 
    • राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षा रणनीति 
    • प्रॉक्सी सलाहकारों के लिये प्रक्रियागत दिशा-निर्देश 
    • खुदरा भुगतान पर केंद्रित छत्र इकाई की स्थापना के लिये फ्रेमवर्क 
  • स्वास्थ्य
    • स्वास्थ्य डेटा प्रबंधन नीति का मसौदा 
  • विधि और न्याय
    • आधार प्रमाणीकरण के उपयोग के लिये नियम
  • सामाजिक न्याय और अधिकारिता
    • राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद 
  • सूचना एवं प्रसार
    • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इम्पैनलमेंट के लिये दिशा-निर्देश जारी
  • कृषि
    • चीनी विकास फंड (संशोधन) नियम, 2020 
  • रक्षा
    • रक्षा उत्पादन और निर्यात संवर्द्धन नीति 2020 
    • आयात एंबार्गो के लिये 101 वस्तुओं की सूची 
    • घरेलू उद्योग द्वारा डिज़ाइन और विकास के लिये प्रणालियाँ 
  • सड़क परिवहन
    • मोटर वाहनों से संबंधित नियमों में मसौदा संशोधन 
    • प्री फिटेड बैटरी के बिना इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री और पंजीकरण की अनुमति
    • राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क प्लाज़ा पर फास्टैग अनिवार्य
  • रेलवे 
    • सुरक्षा के लिये ड्रोन आधारित सर्विंलांस प्रणाली शुरू 
  • खनन
    • खनन क्षेत्र में प्रस्तावित सुधार
  • बिजली
    • सौर व पवन ऊर्जा संयंत्रों के लिये अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन शुल्क और ट्रांसमिशन 
  • शिक्षा
    • इंटर्नशिप एंबेडेड कार्यक्रमों के लिये दिशा-निर्देश 
  • संचार
    • स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क के आकलन के उपाय
  • अल्पसंख्यक मामले
    • नई रोशनी योजना 

कोविड-19

  • तरलता समर्थन के लिये अतिरिक्त उपाय

भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India- RBI) ने कोविड-19 के कारण उत्पन्न वित्तीय तनाव को कम करने के लिये वित्तीय बाज़ारों और व्यक्तियों को तरलता समर्थन देने की घोषणा की है। इसके लिये RBI ने जिन उपायों की घोषणा की है उनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (National Bank for Agriculture and Rural Development- NABARD), भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (Small Industries Development Bank of India- SIDBI), राष्ट्रीय आवासीय बैंक (National Housing Bank- NHB) और एक्जिम बैंक (EXIM Bank) जैसे वित्तीय संस्थानों के लिये 65,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त तरलता सुविधा। 
  • लघु वित्त संस्थानों और दूसरे छोटे NBFC को पुनर्वित्त प्रदान करने के लिये नाबार्ड को 5,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त विशेष लिक्विडिटी सुविधा दी जाएगी। यह सुविधा RBI के रेपो दर पर एक वर्ष की अवधि के लिये उपलब्ध होगी। 
  • सोने की ज्वैलरी पर लोन की राशि की सीमा 75% से बढ़ाकर 90% की गई है। यह राहत 31 मार्च, 2021 तक उपलब्ध होगी। 
  • डिस्कॉम्स के लिये वर्किंग कैपिटल लोन

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने विदयुत वित्त निगम और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम द्वारा राज्यों के स्वामित्व वाली वितरण कंपनियों को दिये गए वर्किंग कैपिटल लोन की सीमा में राहत को मंज़ूरी दी है। यह एकमुश्त राहत है यानी उदय योजना द्वारा दी गई सीमा, यानी पिछले वर्ष के राजस्व के 25% पर राहत दी गई है। उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (Ujwal Discom Assurance Yojana- UDAY) वर्किंग पूंजी लोन को डिस्कॉम के पिछले वर्ष के राजस्व के 25% पर सीमित करती है। इससे विदयुत क्षेत्र में तरलता की सुविधा मिलेगी जो कि कोविड-19 के कारण वित्तीय संकट से जूझ रहा है। 


समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) विकास

  • वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में GDP में 23.9% की गिरावट

वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) की तुलना में 2020-21 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product- GDP) (2011-12 की स्थिर कीमत पर) में 23.9% की गिरावट आई है। इसकी तुलना में वर्ष 2019-20 के चौथी तिमाही में GDP की वृद्धि दर 3.1% थी।

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  • वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में औद्योगिक उत्पादन में 36% की गिरावट

वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) की तुलना में वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (Index of Industrial Production- IIP) 36% कम हो गया है। वर्ष 2020-21 के अप्रैल, मई और जून में खनन, विनिर्माण तथा विदयुत उत्पादन में वृद्धि नकारात्मक थी। वर्ष 2019-20 की चौथी तिमाही में IIP में 3.8% की वृद्धि के साथ गिरावट आई है। रेखाचित्र 1 में वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में औद्योगिक उत्पादन में परिवर्तन प्रदर्शित है। 

रेखाचित्र 1: 2020-21 की पहली तिमाही में IIP में नकारात्मक वृद्धि

Chart

  • रेपो दर और रिवर्स रेपो दर अपरिवर्तनीय रही 

मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee- MPC) ने वर्ष 2020-21 का दूसरा द्विमासिक मौद्रिक नीतिगत वक्तव्य जारी किया। 

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वित्त

  • GST मुआवज़े की कमी को पूरा करने हेतु दो विकल्प 

केंद्र सरकार ने GST परिषद को वर्ष 2020-21 के लिये GST मुआवज़े हेतु अपने अनुमान पेश किये और राज्यों के सामने मुआवज़ा उपकर संग्रह में कमी को पूरा करने के लिये दो विकल्प रखे। GST (राज्यों को मुआवज़ा) अधिनियम, 2017 के अंतर्गत केंद्र सरकार से उस स्थिति में राज्यों को मुआवज़ा चुकाने की अपेक्षा की जाती है, अगर जुलाई 2017 से जून 2022 के दौरान किसी वर्ष उनका GST राजस्व 14% से कम बढ़ता है। 

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  • राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षा रणनीति

राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षा केंद्र (National Centre for Financial Education) ने भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India- RBI), भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (Securities Exchange Board of India- SEBI), भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (Insurance Regulatory and Development Authority of India- IRDAI) तथा पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण (Pension Fund Regulatory and Development Authority- PFRDA) के परामर्श से वर्ष 2020-25 की अवधि हेतु दूसरी वित्तीय शिक्षा के लिये राष्ट्रीय रणनीति (National Strategy for Financial Education- NSFE) जारी की।

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  • प्रॉक्सी सलाहकारों के लिये प्रक्रियागत दिशा-निर्देश 

वर्ष 2014 में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India- SEBI) ने प्रॉक्सी सलाहकारों के आचरण को अभिशासित करने के लिये विनियमों को अधिसूचित किया था। एक प्रॉक्सी सलाहकार कोई भी ऐसा व्यक्ति है जो किसी कंपनी के संस्थागत निवेशकों या शेयरधारकों को कंपनी में अपने मतदान अधिकारों के प्रयोग की सलाह देता है। सेबी ने इन प्रॉक्सी सलाहकारों के लिये प्रक्रियागत दिशा-निर्देशों को अधिसूचित किया है। इन उपायों से प्रॉक्सी सलाहकारों की स्वतंत्रता सुनिश्चित होने की उम्मीद है। वर्ष 2018 में सेबी ने प्रॉक्सी सलाहकारों की समस्याओं पर एक वर्किंग ग्रुप का गठन किया था। इस ग्रुप के सुझावों में ये उपाय शामिल थे। 

प्रक्रियागत दिशा-निर्देशों में शामिल हैं: 

  • मतदान के सुझाव पर नीतियाँ: प्रॉक्सी सलाहकार मतदान के सुझाव पर नीतियाँ बनाएंगे और अपने ग्राहकों को उनके बारे में बताएंगे। इन नीतियों की वार्षिक समीक्षा की जानी चाहिये। 
  • खुलासे का तरीका: सलाहकार अपने ग्राहकों को अनुसंधान और सुझावों के लिये विकास की पद्धति एवं प्रक्रियाओं के बारे में बताएंगे। 
  • रिपोर्टों को साझा करना: सलाहकार एक ही समय में अपने ग्राहकों और कंपनी के संबंध में अपने सुझावों को साझा करेंगे। कंपनी की टिप्पणी, यदि कोई हो, को सलाहकारों की अनुशंसा रिपोर्ट के परिशिष्ट के रूप में शामिल किया जाना चाहिये। यदि किसी सुझाव पर कंपनी का दृष्टिकोण अलग है, तो सलाहकार उनकी अनुशंसा को संशोधित भी कर सकते हैं। 
  • हितों का टकराव: सलाहकार हर उस दस्तावेज़ को लेकर हितों के टकराव का खुलासा करेंगे जिस पर वे सलाह देते हैं। खुलासे में हितों के टकराव के संभावित क्षेत्र और संघर्षों को कम करने हेतु समाधान शामिल होने चाहिये। प्रॉक्सी सलाहकार परामर्श सेवाओं सहित अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से उत्पन्न हितों के टकराव का खुलासा करने, उनका प्रबंधन और उन्हें कम करने के लिये स्पष्ट प्रक्रियाएँ बताएंगे।
  • खुदरा भुगतान पर केंद्रित छत्र इकाई की स्थापना के लिये फ्रेमवर्क

RBI ने खुदरा भुगतान प्रणालियों पर केंद्रित अखिल भारतीय छत्र इकाई की स्थापना के लिये फ्रेमवर्क जारी किया। वर्तमान में RBI खुदरा भुगतान और निपटान प्रणाली के लिये एक छत्र संगठन का संचालन करता है, जिसे भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम नामक एक गैर-लाभकारी संगठन के रूप में बनाया गया है। 

फ्रेमवर्क की मुख्य विशेषताओं में शामिल हैं:

  • स्थापना: इस कंपनी को कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत बनाया जाना चाहिये और यह एक लाभकारी कंपनी हो सकती है। इसका विनियमन और पर्यवेक्षण भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के अंतर्गत RBI द्वारा किया जाएगा।
  • गतिविधियाँ: इकाई की गतिविधियों के दायरे में निम्नलिखित शामिल हैं: 
    (i) ATM, आधार-आधारित भुगतान और प्रेषण सेवाओं तथा नई भुगतान विधियों सहित खुदरा स्थान में नई भुगतान प्रणालियों को स्थापित, प्रबंधित और संचालित करना। 
    (ii) इनमें भाग लेने वाले बैंकों और गैर-बैंकों के लिये समाशोधन और निपटान का कार्य करना। 
  • प्रवर्तकों के लिये पात्रता: छत्र इकाई द्वारा भुगतान की गई पूंजी का 25% से अधिक हिस्सा रखने वाली किसी भी इकाई प्रवर्तक मानी जाएगी। प्रवर्तक को भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में कम-से-कम तीन वर्ष के अनुभव के साथ एक निवासी भारतीय नागरिक [विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (फेमा) के अनुसार] होना चाहिये। प्रवर्तक RBI द्वारा निर्दिष्ट 'फिट और प्रॉपर' मानदंडों के भी अनुरूप होना चाहिये। 
  • विदेशी निवेश: फेमा के नियमों के अनुसार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश की अनुमति होगी। 
  • पूंजी: इकाई के पास न्यूनतम 500 करोड़ रुपए की भुगतान पूंजी होनी चाहिये। कोई भी प्रवर्तक इकाई की पूंजी में 40% से अधिक निवेश नहीं कर सकता है। प्रवर्तक की शेयरधारिता इकाई के व्यवसाय शुरू होने के पाँच वर्ष बाद न्यूनतम 25% तक कम हो सकती है।
  • आवेदन की प्रोसेसिंग: एक बाहरी सलाहकार समिति छत्र इकाई के लिये आवेदनों की जाँच करेगी और भुगतान एवं निपटान प्रणाली (BPSS) के विनियमन और पर्यवेक्षण के लिये RBI के बोर्ड को सुझाव प्रस्तुत करेगी। BPSS आवेदन पर फैसला लेने वाली अंतिम प्राधिकारी होगी।

स्वास्थ्य

  • स्वास्थ्य डेटा प्रबंधन नीति का मसौदा

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Health and Family Welfare) ने स्वास्थ्य डेटा प्रबंधन नीति का मसौदा सार्वजनिक टिप्पणियों के लिये जारी कर दिया है। 

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विधि और न्याय

  • आधार प्रमाणीकरण के उपयोग के लिये नियम

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology) ने सुशासन (समाज कल्याण, नवाचार, ज्ञान) नियम, 2020 [Good Governance (Social Welfare, Innovation, Knowledge) Rules, 2020] के लिये आधार सत्यापन को अधिसूचित किया। इन नियमों को आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ तथा सेवाओं की लक्षित डिलीवरी) अधिनियम, 2016 के अंतर्गत अधिसूचित किया गया है। आधार अधिनियम केंद्र सरकार को इस बात की अनुमति देता है कि वह उन उद्देश्यों के लिये नियम बनाए जिनके लिये आधार के प्रमाणीकरण की मांग की जा सकती है। 

नियम यह प्रावधान करते हैं कि केंद्र सरकार कुछ उद्देश्यों के लिये संस्थाओं को आधार-आधारित प्रमाणीकरण की अनुमति दे सकती है, जैसे- सुशासन कायम करना, धन के रिसाव को रोकना, निवासियों को बेहतर जीवन देना और सेवाओं तक बेहतर पहुँच। निम्नलिखित उद्देश्यों के लिये सत्यापन की मांग की जा सकती है: 

(i) सुशासन सुनिश्चित करने के लिये डिजिटल प्लेटफॉर्मों का उपयोग।

(ii) सामाजिक कल्याण लाभों के रिसाव की रोकथाम। 

(iii) नवाचार को सक्षम करना और ज्ञान का प्रसार।

इन उद्देश्यों के लिये सत्यापन स्वैच्छिक आधार पर होगा। उपरोक्त उद्देश्यों के लिये आधार प्रमाणीकरण का उपयोग करने हेतु इच्छुक कोई भी केंद्रीय मंत्रालय या राज्य सरकार एक प्रस्ताव तैयार करेगी और इसे मंज़ूरी के लिये भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण को सौंपेगी।  


सामाजिक न्याय और अधिकारिता

  • राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद 

ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 [Transgender Persons (Protection of Rights) Act, 2019] में केंद्र सरकार से यह अपेक्षा की गई है कि वह ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिये राष्ट्रीय परिषद का गठन करेगी। इस संबंध में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) ने राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर व्यक्ति परिषद का गठन किया है।

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सूचना एवं प्रसार

  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इम्पैनेलमेंट के लिये दिशा-निर्देश 

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting) ने आउटरीच और संचार ब्यूरो के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के मनोनयन (Empanelment) के लिये नीतिगत दिशा-निर्देश जारी किये हैं। ब्यूरो प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, आउटडोर मीडिया या भारत सरकार के मंत्रालयों या विभागों की ओर से वेबसाइट्स के ज़रिये भुगतान किये गए आउटरीच अभियानों के लिये ज़िम्मेदार एक नोडल एजेंसी है। दिशा-निर्देशों के मुख्य पहलुओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • इम्पैनेलमेंट के लिये पात्रता: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के भारत में हर महीने न्यूनतम 25 मिलियन यूनीक यूज़र्स होने चाहिये (जो कि पिछले तीन महीने के डेटा पर निर्भर करेगा)। इसके अतिरिक्त प्लेटफॉर्म को उसी डोमेन नेम से कम-से-कम छह महीने के लिये ऑपरेशन में होना चाहिये।
  • संलग्नता: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ब्यूरो के साथ एक अनुबंध करना होगा। अनुबंध की शर्तों में प्लेटफॉर्म को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसकी सामग्री राष्ट्र विरोधी, अश्लील, सांप्रदायिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता को खतरे में डालने वाली नहीं है या साइबर कानून का उल्लंघन करने वाली नहीं है।
  • ब्यूरो सामग्री, लक्षित दर्शकों, अभियान के बजट और अवधि के आधार पर निर्धारित करेगा कि ग्राहक मंत्रालय/विभाग की योजनाबद्ध आउटरीच गतिविधि के लिये कौन से प्लेटफॉर्म प्रासंगिक हैं। भारत स्थित प्लेटफॉर्म को वरीयता दी जाएगी।
  • मूल्य निर्धारण: ब्यूरो सरकारी संदेशों के लिये इनवेंटरी/स्पेस खरीदने हेतु नीलामी प्रक्रिया में भाग लेगा। ये संदेश टेक्स्ट, वीडियो विज्ञापन, कैरोयूजल विज्ञापन, संग्रह विज्ञापन इत्यादि के रूप में हो सकते हैं। इनवेंटरी/स्पेस खरीदने के मॉडल निम्नलिखित हो सकते हैं: 
    (i) डायनैमिक प्राइज़िंग मॉडल (जहाँ ब्यूरो से क्लिक या व्यूज़ के आधार पर शुल्क लिया जाएगा), (ii) नीलामी मॉडल (जहाँ इनवेंटरी खरीदने के लिये कुछ बोली राशि का संकेत देकर ब्यूरो को ऑनलाइन नीलामी में भाग लेना होगा), या 
    (ii) पहुँच और फ्रीक्वेंसी मॉडल (जहाँ ब्यूरो एक निश्चित मूल्य के लिये एडवांस में अभियान बुक कर सकता है)। 
  • संबंधित ग्राहक मंत्रालय और विभाग (Client Ministry And Department) को एडवांस में ब्यूरो को 100% धनराशि देनि होगी।
  • प्लेटफॉर्म के कर्तव्य: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक वास्तविक समय डैशबोर्ड के माध्यम से डिजिटल रिपोर्ट सुनिश्चित करने के लिये ज़िम्मेदार होगा जो कि अभियान से संबंधित मात्रात्मक परिणाम दिखाता हो (जैसे कि व्यूज़, क्लिक, इंप्रेशन, फॉलोअर्स की संख्या)। इसके अतिरिक्त प्लेटफॉर्म्स को भारत सरकार के किसी मंत्रालय या एजेंसी द्वारा सस्पेंड या ब्लैकलिस्टेड नहीं होना चाहिये।  

कृषि

  • चीनी विकास फंड (संशोधन) नियम, 2020 

खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने चीनी विकास कोष (संशोधन) नियम, 2020 [Sugar Development Fund (Amendment) Rules, 2020] को अधिसूचित किया। चीनी विकास कोष अधिनियम, 1982 (Sugar Development Fund Act, 1982) के अंतर्गत स्थापित इस कोष को चीनी उद्योग की विकास संबंधी गतिविधियों को वित्तपोषित करने के लिये उपयोग किया जाता है। 2020 नियमों की प्रमुख विशेषताएँ हैं:

  • चीनी कारखानों को ऋण: मौजूदा नियमों के अंतर्गत 2,500 टन प्रतिदिन या उससे अधिक गन्ने की पेराई क्षमता वाले कारखाने कोष से ऋण के लिये पात्र हैं। इस ऋण को निम्नलिखित से संबंधित परियोजनाओं को लागू करने के लिये इस्तेमाल किया जा सकता है: 
    (i) एल्कोहल या गुड़ से एनहाइड्रस एल्कोहल या इथेनॉल का उत्पादन। 
    (ii) मौजूदा इथेनॉल संयंत्र को शून्य तरल डिस्चार्ज संयंत्र में बदलना।
    (iii) सामान आधारित सह-बिजली उत्पादन।
  • 2020 के नियमों के अंतर्गत संशोधन यह प्रावधान करते हैं कि 1,250 टन और 2,500 टन प्रतिदिन के बीच पेराई क्षमता वाले चीनी कारखाने भी इन क्षेत्रों में ऋण के लिये पात्र होंगे। हालाँकि ऐसे कारखानों को आधुनिकीकरण और विस्तार परियोजनाओं के लिये ऋण प्रदान किया जाएगा जो कि को-जेनरेशन या इथेनॉल संयंत्र के साथ एकीकृत हैं। यह कुछ शर्तों के अधीन होगा, जैसे: 
    (i) बैंक या वित्तीय संस्थान द्वारा परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता का प्रमाणन। 
    (ii) राष्ट्रीय चीनी संस्थान कानपुर या केंद्र सरकार द्वारा नामित किसी अन्य संस्थान द्वारा तकनीकी व्यवहार्यता का प्रमाणीकरण।
    (iii) ऋण के लिये राज्य सरकार की गारंटी प्रस्तुत करना।
  • ऋण पर डिफॉल्ट के लिये जुर्माना: अगर कोई कोष के ऋण को चुकाने में डिफॉल्ट करता है तो उसे डिफॉल्ट की राशि पर 6% प्रतिवर्ष की ब्याज दर चुकानी होती है या वह दर चुकानी होती है, जिसे केंद्र सरकार तय करती है। संशोधन में इस ब्याज दर को कम करके 4% प्रतिवर्ष कर दिया गया है। 

रक्षा

  • रक्षा उत्पादन और निर्यात संवर्द्धन नीति 2020 

रक्षा मंत्रालय ने रक्षा उत्पादन और निर्यात संवर्द्धन नीति (Defence Production & Export Promotion Policy- DPEPP) 2020 का मसौदा जारी किया है। इस नीति का उद्देश्य देश की रक्षा उत्पादन क्षमताओं को बढ़ावा देना, आयात पर निर्भरता कम करना और रक्षा उद्योग में आत्मनिर्भरता के लिये निर्यात को बढ़ावा देना है।

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  • आयात एंबार्गो के लिये 101 वस्तुओं की सूची

रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) ने 101 वस्तुओं की एक सूची प्रकाशित की है जिनके आयात पर प्रतिबंध होगा। सूची में हथियार प्रणाली, जैसे- आर्टिलरी गन, एंटी सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, उच्च शक्ति वाले रडार और अपग्रेड सिस्टम आदि उपकरण शामिल हैं। 

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  • घरेलू उद्योग द्वारा डिज़ाइन और विकास के लिये प्रणालियाँ 

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation- DRDO) ने 108 प्रणालियों और उप-प्रणालियों की सूची को चिह्णित किया है जिन्हें भारतीय उद्योग द्वारा डिज़ाइन और विकसित किया जाएगा। इनमें मिनी और माइक्रो अनमैन्ड एरियल वेहिकल, मरीन रॉकेट लॉन्चर, फायर डिटेक्शन प्रणाली और ट्रांसपॉन्डर प्रणाली आदि शामिल हैं। DRDO आवश्यकता के आधार पर उद्योग को इन प्रणालियों के डिज़ाइन, विकास और परीक्षण के लिये सहयोग प्रदान करेगा। उसने प्रणालियों के विकास हेतु वर्ष 2021 की समयावधि तय की है।  


सड़क परिवहन

  • मोटर वाहनों से संबंधित नियमों में मसौदा संशोधन 

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways) ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 (Central Motor Vehicles Rules, 1989) में विभिन्न मसौदा संशोधन जारी किये। इन संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • वाहन के पंजीकरण दस्तावेज़ों में स्वामित्व का उल्लेख: मंत्रालय ने मोटर वाहन पंजीकरण के दस्तावेज़ों में स्वामित्व को शामिल करने के लिये सुझाव आमंत्रित किये हैं। मंत्रालय ने कहा कि केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के अंतर्गत वाहन के पंजीकरण फॉर्म में फिलहाल स्वामित्व से संबंधित विवरण उचित तरीके से प्रदर्शित नहीं होते। प्रस्तावित मसौदा नियम एक नए खंड को शामिल करते हैं जिसमें स्वामित्व के प्रकार का प्रावधान है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित श्रेणियांँ शामिल हैं: 
    (i) स्वायत्त निकाय 
    (ii) केंद्र सरकार
    (iii) ड्राइविंग स्कूल 
    (iv) दिव्यांगजन 
    (v) फर्म 
    (vi) व्यक्तिगत 
    (vii) पुलिस विभाग 
     (viii) बहु स्वामित्व इत्यादि 
  • प्री फिटेड बैटरी के बिना इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री और पंजीकरण की अनुमति

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने प्री फिटेड बैटरी के बिना इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री और पंजीकरण की अनुमति दे दी है। मंत्रालय ने निर्दिष्ट किया है कि ऐसे वाहनों को टेस्ट एजेंसी द्वारा जारी अनुमोदन प्रमाणपत्र के आधार पर बेचा और पंजीकृत कराया जा सकता है। इसके अतिरिक्त बैटरी के मेक/टाइप या किसी और विवरण को निर्दिष्ट करना रजिस्ट्रेशन के लिये ज़रूरी नहीं होगा। हालाँकि इलेक्ट्रिक वाहन के प्रोटोटाइप और बैटरी (नियमित बैटरी या स्वैपेबल बैटरी) को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के अंतर्गत निर्दिष्ट परीक्षण एजेंसियों द्वारा अनुमोदित होना चाहिये। 

  • राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क प्लाज़ा पर फास्टैग अनिवार्य 

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने टोल शुल्क प्लाज़ा पर वापसी यात्रा छूट लेने या किसी और किस्म की छूट लेने के लिये फास्टैग को अनिवार्य कर दिया है। 

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रेलवे 

  • सुरक्षा के लिये ड्रोन आधारित सर्विंलांस प्रणाली
  • रेलवे ने ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली स्थापित करने के लिये नौ ड्रोन्स और दो निन्जा अनमैन्ड एरियल वेहिकल (Ninja Unmanned Aerial Vehicles) खरीदे हैं। रेलवे की सुरक्षा के लिये रेलवे संरक्षण बल इनका उपयोग करेगा। ड्रोन्स को निम्नलिखित के लिये तैनात किया जाएगा: 
    (i) रेलवे की संपत्तियों का निरीक्षण। 
    (ii) आपराधिक और असामाजिक गतिविधियों, जैसे- जुए, कचरा फेंकने आदि पर नज़र रखना।
    (iii) आपदा की स्थिति में बचाव, रिकवरी और बहाली।
    (iv) डेटा संग्रह करने के कुछ कार्यों, जैसे भीड़ की स्थिति को मापना। 

रेलवे की योजना भविष्य में 17 अतिरिक्त ड्रोन्स खरीदने की है। 


खनन

  • खनन क्षेत्र में प्रस्तावित सुधार

खान मंत्रालय ने खनन क्षेत्र में प्रस्तावित सुधारों पर टिप्पणियाँ आमंत्रित की हैं। इन सुधारों में खनन क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ाने के लिये आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत घोषणाओं को लागू करने का प्रयास किया गया है। खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 [Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957] तथा अधिनियम के अंतर्गत अधिसूचित नियमों में कुछ संशोधन प्रस्तावित हैं ताकि इन सुधारों को लागू किया जा सके। प्रस्तावित सुधारों में निम्नलिखित शामिल हैं: 

  • एंड यूज़ के प्रतिबंध को हटाना: भविष्य में सभी खानों को एंड यूज़ के प्रतिबंधों के बिना नीलाम किया जाएगा। इसके अतिरिक्त मौजूदा कैप्टिव खदानों संबंधी उपलब्ध पहले इनकार (First Refusal) के अधिकार को भी समाप्त किया जाएगा। वर्तमान में बंदी खानें पिछले वर्ष उत्खनित कुल खनिजों में से 25% तक को बेच सकती हैं। इस सीमा को बढ़ाकर 50% कर दिया गया है।
  • निजी संस्थाओं द्वारा अन्वेषण: पूर्वेक्षण कम खनन पट्टे नीलामी के ज़रिये खनिज ब्लॉक्स की आंशिक खोज के लिये दिये जाते हैं। यह पट्टा पूर्वेक्षण और खनन गतिविधियों दोनों के लिये संयोजन लाइसेंस होता है। निजी संस्थाएँ अन्वेषण के काम में संलग्न होंगी। उनके खोज के कार्य का वित्तपोषण राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण न्यास निधि (National Mineral Exploration Trust Fund) द्वारा किया जाएगा।

मंत्रालय ने कहा था कि संभाव्य से अधिक बड़ी संख्या में लीज़ अवरुद्ध हो गई हैं क्योंकि या तो उनके लीज़ देने की अवधि खत्म हो गई है या कानूनी गतिरोध के कारण वे नीलामी में शामिल नहीं हो पाई हैं। मंत्रालय ने 1957 के अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव रखा ताकि ऐसे ब्लॉक्स को नीलामी के ज़रिये दोबारा आवंटित किया जा सके। उसने एक ऐसे प्राधिकरण की नियुक्ति का प्रस्ताव भी रखा जो उन लोगों जिनके अधिकार रद्द हो जाएंगे, द्वारा की गई खोज में खर्च हुए व्यय की अदायगी कर सकें ।

  • गैर- कार्यशील खानों का पुनः आवंटन: निजी कंपनियों के स्वामित्व वाली खदानें जो तीन वर्ष से चालू नहीं हैं, उन्हें नीलामी के माध्यम से पुनः आवंटित करने के लिये संबंधित राज्य को दे दिया जाएगा। सार्वजनिक क्षेत्र की उन यूटिलिटीज़ के लिये आवंटित खदानों के साथ भी ऐसा ही किया जाएगा, जो उत्पादन नहीं कर रही हैं। 
  • अवैध खनन की परिभाषा: मंत्रालय ने कहा कि वर्तमान में लीज़होल्ड क्षेत्र के बाहर होने वाले अवैध खनन और खनन लीज़ क्षेत्र के भीतर मंज़ूरियों का उल्लंघन करते हुए खनन के बीच कोई अंतर नहीं है। 1957 के संशोधन अधिनियम में यही प्रस्तावित है कि लीज़होल्ड क्षेत्र के बाहर अवैध खनन को लीज़ क्षेत्र के भीतर के खनन से अलग करके देखा जाएगा। 

बिजली

  • सौर व पवन ऊर्जा संयंत्रों के लिये अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन शुल्क और ट्रांसमिशन

बिजली मंत्रालय (Ministry of Power) ने कुछ सौर और पवन संयंत्रों के लिये अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन शुल्क और ट्रांसमिशन के नुकसान पर छूट से संबंधित एक आदेश जारी किया। यह राष्ट्रीय विद्युत टैरिफ नीति, 2016 (National Electricity Tariff Policy, 2016) के अनुरूप है जो विदयुत संयंत्र निम्नलिखित मानदंडों को पूरा करेंगे, उन्हें कमीशनिंग की तारीख से 25 वर्ष तक की अवधि के लिये यह छूट मिलेगी:

  • ऊर्जा के सौर या पवन स्रोतों का उपयोग करने वाले वे ऊर्जा संयंत्र जिन्हें 30 जून, 2023 तक अधिकृत किया गया है, इसके पात्र होंगे। इनमें हाइब्रिड सोलर विंड पावर प्लांट्स भी शामिल हैं। 
  • केवल वही संयंत्र पात्र होंगे जो नवीकरणीय खरीद दायित्व (Renewable Purchase Obligation- RPO) वाली संस्थानों को विदयुत बेचते हैं, भले ही विदयुत की आपूर्ति RPO के भीतर हो या न हो। वितरण लाइसेंसधारियों के लिये उत्पादित बिजली हेतु केंद्र सरकार से संबंधित दिशा-निर्देशों के अंतर्गत एक प्रतिस्पर्द्धी प्रक्रिया के ज़रिये बिजली की खरीद होनी चाहिये। 
  • सौर ऊर्जा संयंत्रों को नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New and Renewable Energy) के केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (Central Public Sector Undertaking- CPSU) के योजना चरण 2 या भारतीय सौर ऊर्जा निगम (Solar Energy Corporation of India) की विनिर्माण क्षमता से जुड़ी योजना के टेंडर के अंतर्गत कमीशन होना चाहिये। मंत्रालय के CPSU योजना चरण 2 का लक्ष्य सरकारी उद्देश्य के लिये राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता को सहज बनाना है।

शिक्षा

  • इंटर्नशिप एंबेडेड कार्यक्रमों के लिये दिशा-निर्देश 

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grants Commission-UGC) ने प्रशिक्षुता या प्रशिक्षण सन्निहित डिग्री कार्यक्रमों (Apprenticeship or Internship Embedded Degree Programmes) को प्रस्तुत करने वाले उच्च शिक्षा संस्थानों के लिये दिशा-निर्देश प्रकाशित किये हैं। इन दिशा-निर्देशों के निम्नलिखित लक्ष्य है: 

(i) स्नातक कार्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की रोज़गार क्षमता में सुधार। 

(ii) उच्च शिक्षा प्रणाली और उद्योग के बीच संबंधों को सुधारना। 

उल्लेखनीय है कि उच्च शिक्षा संस्थान (Higher Education Institution- HEI) का कोई भी कार्यक्रम प्रशिक्षण के साथ सन्निहित होगा। HEI डिग्रियाँ देने के लिये अधिकृत है। दिशा-निर्देशों की मुख्य विशेषताओं में शामिल हैं:

  • प्रशिक्षण में कार्य-आधारित शिक्षा प्राप्त करने के लिये कार्यस्थल परिसर में (संस्थान परिसर में नहीं) प्रशिक्षणवृत्‍ति (Traineeship) की पेशकश करेगा। 
  • HEI के पास प्रशिक्षण सन्निहित कार्यक्रम शुरू करने से पहले प्रशिक्षण प्रदान करने के लिये संगठनों, उद्यमों और औद्योगिक निकायों के साथ एक पूर्व समझौता ज्ञापन होना चाहिये। 
  • डिग्री के कुल क्रेडिट का कम-से-कम 20% क्रेडिट प्रशिक्षण के हिस्से में होना चाहिये। 
  • प्रशिक्षण सन्निहित कार्यक्रम से स्नातक करने वाले विद्यार्थी उसी विषय में मास्टर प्रोग्राम में प्रवेश लेने के लिये पात्र होंगे। यह उस विषय के लिये भी किया जा सकता है जिसके लिये उन्होंने न्यूनतम 24 क्रेडिट अर्जित किये हैं (इंटर्नशिप के दौरान अर्जित क्रेडिट सहित)। 
  • HEI के पास यह विकल्प होगा कि वह प्रोग्राम की अवधि में बदलाव किये बिना डिग्री प्रोग्राम के हिस्से के रूप में प्रशिक्षण के लिये कम-से-कम एक सेमिस्टर को सन्निहित कर सके। 
  • संस्थान (जहाँ प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है) उद्योग/संगठन के परामर्श से प्रशिक्षण के आकलन का विकल्प चुन सकते हैं।

संचार

  • स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क के आकलन के उपाय

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (Telecom Regulatory Authority of India- TRAI) ने स्पेक्ट्रम शेयरिंग के मामलों में स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क के आकलन के तरीकों से संबंधित सुझाव जारी किये हैं।

मोबाइल एक्सेस सर्विस देने वाले लाइसेंसधारियों को स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क (Spectrum Usage Charges- SUC) देना होता है जिसकी गणना वार्षिक सकल राजस्व (Annual Gross Revenue- AGR) के प्रतिशत के रूप में की जाती है। ये शुल्क 3% से 8% के बीच होते हैं जो कि वायरलेस लाइसेंसधारी के स्पेक्ट्रम के परिमाण और प्रकार पर निर्भर करता है। AGR सकल राजस्व से स्वीकार्य कटौतियों के बाद शुद्ध राजस्व होता है। सकल राजस्व से कुछ शुल्कों और करों, जैसे- अन्य सेवा प्रदाताओं को दिये जाने वाले रोमिंग शुल्क और सेवा कर एवं बिक्री कर को घटाने के बाद AGR प्राप्त होता है।  

लाइसेंसधारी जिसे किसी निर्दिष्ट प्रक्रिया (नीलामी या प्रशासनिक आवंटन) के माध्यम से स्पेक्ट्रम आवंटित किया जाता है, अपने स्पेक्ट्रम को किसी अन्य लाइसेंसधारी के साथ साझा कर सकता है। वर्तमान में स्पेक्ट्रम शेयरिंग को सिर्फ एक ही बैंड में शेयर किया जा सकता है। शेयरिंग के बाद प्रत्येक लाइसेंसधारी का SUC दर 0.5% बढ़ जाता है। दूरसंचार विभाग से यह अनुरोध किया गया है कि SUC के बढ़ी हुई दर (इंक्रेमेंटल रेट) को सिर्फ शेयर किये गए स्पेक्ट्रम पर लागू किया जाए, न कि लाइसेंसधारी के पूरे बैंड पर। विभाग ने TRAI से कहा कि वह इस संबंध में अपने सुझाव पेश करे। मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • वृद्धिशील SUC दर की प्रयोज्यता: TRAI ने सुझाव दिया था कि SUC दर पर 0.5% की वृद्धि को उस विशेष बैंड के स्पेक्ट्रम पर लागू होना चाहिये जिसमें शेयरिंग की जा रही है, न कि लाइसेंसधारक के संपूर्ण स्पेक्ट्रम पर। उसने कहा कि लाइसेंसधारी के पूरे स्पेक्ट्रम पर वृद्धिशील SUC दर लागू होने की स्थिति में स्पेक्ट्रम शेयरिंग की लागत उस शेयरिंग से प्राप्त होने वाले लाभ से अधिक हो सकती है। 
  • स्पेक्ट्रम शेयरिंग को समाप्त करने की सूचना: TRAI ने कहा कि स्पेक्ट्रम शेयरिंग के मौजूदा दिशा-निर्देशों में लाइसेंसधारियों द्वारा स्पेक्ट्रम शेयरिंग एग्रीमेंट को परस्पर समाप्त करने का विशिष्ट उल्लेख नहीं होता। उसने सुझाव दिया कि इसका उल्लेख दिशा-निर्देशों में होना चाहिये। इससे ज़रूरत और वाणिज्यिक आधार पर स्पेक्ट्रम के प्रबंधन को लचीलापन प्रदान किये जाने की उम्मीद है।

अल्पसंख्यक मामले

  • नई रोशनी योजना 

अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय (Ministry of Minority Affairs) अल्पसंख्यक महिलाओं के नेतृत्व विकास के लिये नई रोशनी नामक योजना (Nai Roshni Scheme) का संचालन करता है। इस योजना का उद्देश्य अल्पसंख्यक महिलाओं को सरकारी प्रणालियों, बैंकों और मध्यस्थों से बातचीत करने के लिये उपकरण प्रदान करना है। मंत्रालय ने अधिसूचित किया है कि लाभार्थियों को इस योजना के अंतर्गत लाभ हासिल करने के लिये आधार नंबर का प्रमाण देना होगा। जिन महिलाओं का अब तक आधार के अंतर्गत नामांकन नहीं हुआ है, उन्हें योजना के अंतर्गत उपलब्ध प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने से पहले नामांकन करना होगा। 

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