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राष्ट्रीय सुरक्षा: पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो

  • 20 Jul 2023
  • 15 min read

प्रिलिम्स के लिये:

पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D), कवच 2023, महिलाओं एवं बच्चों के प्रति साइबर अपराध निवारण (CCPWC) योजना, एशिया में संवाद और विश्वास निर्माण उपायों का सम्मेलन (CICA), एंटी टेररिज़्म असिस्टेंस (Anti-Terrorism Assistance- ATA)

मेन्स के लिये:

पुलिस बल का वर्तमान परिदृश्य, BPR&D से संबंधित चुनौतियाँ, BPR&D की स्थिति में सुधार हेतु समाधान

संदर्भ 

राष्ट्रीय सुरक्षा के समग्र दृष्टिकोण के अनुसार, आंतरिक सुरक्षा देश के संपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा आयामों का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। भारत में आंतरिक सुरक्षा वातावरण अत्यधिक जटिल एवं चुनौतीपूर्ण है। इन चुनौतियों के बावजूद भारत मज़बूत हुआ है तथा वर्तमान में  एक वैश्विक मार्गदर्शक के रूप में उभर रहा है। पिछले 50 वर्षों में पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) ने भारतीय पुलिस को पेशेवर बनाने तथा नागरिकों की उत्साहपूर्वक सेवा करने के अपने लक्ष्य को प्राप्त संगठन की प्रभावशीलता का प्रमाण प्रस्तुत किया है।

BPR&D

विकास

  • BPR&D का गठन वर्ष 1970 में किया गया था तथा इसने वर्ष 1966 में गठित पुलिस अनुसंधान सलाहकार परिषद का स्थान लिया।
  • इसकी स्थापना देश में पुलिस की आवश्यकताओं और मांगों  की पहचान करने, अनुसंधान परियोजनाओं को शुरू करने तथा पुलिस के सामने आने वाली चुनौतियों को दूर करने के लिये सुझाव देने के उद्देश्य से की गई थी।
  • यह गृह मंत्रालय के प्रशासन के अंतर्गत आता है। सरकार एक आधुनिक, प्रभावी और सचेतक सुरक्षा ढाँचे पर ज़ोर देती है जो समाज के सभी वर्गों के बीच सुरक्षा की भावना को प्रेरित कर सके।
  • आरंभ में ब्यूरो को 2 प्रभागों अर्थात् अनुसंधान, प्रकाशन एवं सांख्यिकी प्रभाग तथा विकास प्रभाग के साथ शुरू किया गया था।
    • वर्ष 1973 में पुलिस प्रशिक्षण पर गोर समिति (1971) की सिफारिश पर प्रशिक्षण प्रभाग जोड़ा गया था।
    • वर्ष 1995 में बंदी एवं बंदी सुधारों के मुद्दों का अध्ययन करने के लिये सुधारक प्रभाग जोड़ा गया था।
    • वर्ष 2008 में राष्ट्रीय पुलिस मिशन जोड़ा गया तथा विकास प्रभाग का पुनर्गठन आधुनिकीकरण प्रभाग के रूप में किया गया।
  • ब्यूरो मुख्यालय के पाँच प्रभाग हैं तथा कोलकाता, हैदराबाद, चंडीगढ़, गाजियाबाद, जयपुर में पाँच केंद्रीय गुप्तचर प्रशिक्षण संस्थान (CDTI) और भोपाल में केंद्रीय पुलिस प्रशिक्षण अकादमी है।
  • दिसंबर 2022 में केंद्रीय गृह मंत्री ने बंगलूरू में नवीनतम केंद्रीय गुप्तचर प्रशिक्षण संस्थान (CDTI) की आधारशिला रखी।
    • श्रीनगर तथा अगरतला में दो अतिरिक्त CDTI की स्थापना पर विचार किया जा रहा है।

उद्देश्य

  • BPR&D अपराध के सामान्य कारणों, निवारक उपायों तथा जाँच में सुधार के तरीकों, प्रशासनिक संरचना और किशोर अपराध का विश्लेषण करता है।
  • BPR&D के अधिदेश ने पुलिस विभाग और सुधारात्मक प्रशासन में सभी हितधारकों को सार्थक स्थान प्रदान किया है। अभ्यासकर्त्ताओं, शिक्षा जगत और नागरिक समाज का सामूहिक ज्ञान पुलिस विभाग और बंदी की नीतिगत अनिवार्यताओं के लिये इनपुट के रूप में परिणत हुआ है।
  • यह राज्यों में आयोजित पुलिस अनुसंधान कार्यक्रमों में सहायता प्रदान करता है। यह भारत में पुलिस बलों द्वारा उपयोग किये जाने वाले उपकरणों का नियमित मूल्यांकन भी करता है तथा यह सुनिश्चित करता है कि हथियारों एवं गोला-बारूद के क्षेत्र में नए और संशोधित उपकरण उपलब्ध कराए जाएँ।

BPR&D की आवश्यकता 

  • राष्ट्रीय सुरक्षा का विकसित परिदृश्य: पहले चुनौतियाँ मुख्य रूप से जम्मू और कश्मीर (J&K) जैसे विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों तथा वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों से संबंधित थीं।
    • हालाँकि ये समस्याएँ साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा जैसे विषयगत चिंताओं के रूप में बदल गई हैं। इसके अतिरिक्त नार्को टेरर तथा चौथी पीढ़ी के युद्ध जैसे खतरों के बढ़ने से समस्याओं ने बहुआयामी स्थिति प्राप्त कर ली है।
  • इंपीरियल स्टेबलाइज़र्स से नागरिक-केंद्रित अधिकारों के संरक्षक तक: पहले पुलिस का प्राथमिक कार्य ब्रिटिश साम्राज्य की स्थिरता बनाए रखना था। हालाँकि सरदार वल्लभभाई पटेल ने स्वतंत्रता के बाद भारतीय पुलिस प्रणाली के लिये एक नया प्रतिमान पेश किया।
    • आज पुलिस का प्राथमिक उद्देश्य लोगों की सेवा करना तथा उनके अधिकारों की रक्षा करना है। सुधारों एवं नियंत्रण के लिये मानसिकता में पूर्ण परिवर्तन आवश्यक है तथा एक नागरिक-अनुकूल, उत्तरदायी दूरदर्शी और जवाबदेह पुलिस बल ही भारत को शीर्ष तीन वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में स्थान दिलाने में मार्ग प्रशस्त करेगा।
  • कुशल इंटेलिजेंस नेटवर्क और स्मार्ट पुलिसिंग: पुलिस के विभिन्न विभागों तथा अन्य सुरक्षा बलों के बीच बेहतर समन्वय भारत की सुरक्षा शीट को अभेद्य बना रहा है। जिस देश के पास कुशल खुफिया नेटवर्क है उसे हथियार और गोला-बारूद की ज़रूरत नहीं है। इसके लिये केवल स्मार्ट पुलिस की ज़रूरत है।
  • नीति विकास के लिये सहयोग: BPR&D के अधिदेश ने पुलिस विभाग और सुधारात्मक प्रशासन में हितधारकों के लिये सार्थक योगदान देने हेतु एक समावेशी मंच तैयार किया है।
    • चिकित्सकों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज की संयुक्त विशेषज्ञता के परिणामस्वरूप पुलिस विभाग एवं बंदी के क्षेत्रों में नीति विकास के लिये मूल्यवान अंतर्दृष्टि तथा सिफारिशें सामने आई हैं।

पुलिस बल का वर्तमान परिदृश्य

  • वर्ष 2021 में एकत्र किये गए तथा वर्ष 2022 में प्रकाशित आँकड़ों से पता चलता है  कि देश में कुल स्वीकृत पुलिस बल 26,88,938 है, जबकि कुल वास्तविक पुलिस बल 20,93,833 था।
  • पुलिस बल में महिलाओं की संख्या 11.75% है। पिछले वर्ष की तुलना में पुलिस बल में महिलाओं की प्रतिशत वृद्धि 13.40% थी।
  • केंद्रीय सशस्त्र संसदीय बलों की कुल स्वीकृत संख्या 11,10,804 थी, जबकि वास्तविक कुल संख्या 10,21,501 थी।
  • केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) में महिला पुलिस 3.98% थी।

कुछ संबंधित पहल

  • राष्ट्रीय:
    • कवच 2023 का आयोजन अगस्त में किया जाना है तथा इसे इस वर्ष की शुरुआत में फरवरी में लॉन्च किया गया था।
      • यह देश में साइबर सुरक्षा चुनौतियों और साइबर अपराधों से निपटने के लिये राष्ट्रीय स्तर का हैकथॉन है।
    • गृह मंत्रालय ने महिलाओं एवं बच्चों के प्रति साइबर अपराध निवारण (CCPWC) योजना को मंज़ूरी दे दी है जिसमें बाल अश्लीलता/बाल यौन शोषण सामग्री, बलात्कार/सामूहिक बलात्कार छवियों या स्पष्ट यौन सामग्री के मामलों के लिये एक ऑनलाइन साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल शामिल है।
  • वैश्विक:
    • वर्ष 2023 में एशिया में संवाद और विश्वास निर्माण उपायों का सम्मेलन (CICA) के सदस्य देशों के लिये विदेश मंत्रालय के सहयोग से दो सम्मेलन आयोजित किये गए थे।
      • CICA एक अंतर-सरकारी मंच है जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग को मज़बूत करना तथा एशिया में शांति, सुरक्षा एवं स्थिरता सुनिश्चित करना है।
    • यह ब्यूरो ऑफ काउंटर टेररिज़्म (CT) और ब्यूरो ऑफ डिप्लोमैटिक सिक्योरिटी (DS) के बीच एक रणनीतिक साझेदारी, आतंकवाद विरोधी सहायता (ATA) कार्यक्रम, साझेदार देशों को अमेरिकी सरकार के एंटी टेररिज़्म असिस्टेंस (Anti-Terrorism Assistance- ATA) और उपकरणों के प्राथमिक प्रदाता के रूप में कार्य करता है, जो विदेशी नागरिक कानून प्रवर्तन, आतंकवाद विरोधी कौशल को मज़बूत करते हुए आतंकवादी गतिविधियों की जाँच, पता लगाने, रोकने और बाधित करने की क्षमता का निर्माण करता है।
      • भारत वर्ष 1995 से इस कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है।

BPR&D के समक्ष चुनौतियाँ

  • सीमित संसाधन: BPR&D बजटीय बाधाओं के भीतर काम करता है, जो व्यापक अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के संचालन के साथ-साथ पर्याप्त प्रशिक्षण तथा बुनियादी ढाँचे का समर्थन प्रदान करने की इसकी क्षमता को सीमित कर सकता है।
  • पुलिस विभाग का विविध और गतिशील परिदृश्य: भारत में पुलिस विभाग की चुनौतियाँ विविध भौगोलिक, सामाजिक-सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय कारकों के साथ जटिल और लगातार बढ़ रही हैं। BPR&D को इन विविध चुनौतियों का समाधान करने तथा विभिन्न क्षेत्रों और संदर्भों को पूरा करने वाले समाधान विकसित करने की आवश्यकता है।
  • अनुसंधान-नीति अंतर को कम करना: BPR&D अनुसंधान करता है तथा सिफारिशें प्रदान करता है, जबकि उन निष्कर्षों को पुलिस बलों के भीतर कार्रवाई योग्य नीतियों एवं प्रथाओं में प्रभावी ढंग से लागू करना एक चुनौती हो सकती है। अनुसंधान एवं नीति कार्यान्वयन के बीच अंतर को कम करने के लिये निरंतर प्रयासों और सहयोग की आवश्यकता है।
  • तकनीकी प्रगति: प्रौद्योगिकी की तीव्र प्रगति के साथ BPR&D को साइबर अपराध, डिजिटल फोरेंसिक और डेटा एनालिटिक्स जैसे उभरते रुझानों के साथ तालमेल बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ता है। इन उभरती चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिये इसे अपनी तकनीकी क्षमताओं और विशेषज्ञता को लगातार उन्नत करने की आवश्यकता है।

आगे की राह 

  • बढ़ी हुई फंडिंग: BPR&D को पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने से यह व्यापक अनुसंधान, विकास और प्रशिक्षण गतिविधियों को अंजाम देने में सक्षम होगा। बढ़ी हुई फंडिंग से कुशल शोधकर्त्ताओं को काम पर रखने, बुनियादी ढाँचे को उन्नत करने तथा पुलिस विभाग की उभरती चुनौतियों पर व्यापक अध्ययन करने में सुविधा होगी।
  • सहयोग और साझेदारी: BPR&D को शैक्षणिक संस्थानों, थिंक टैंक, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों तथा नागरिक समाज समूहों के साथ सक्रिय रूप से साझेदारी एवं सहयोग में संलग्न होना चाहिये।
    • इस तरह के सहयोग विशेषज्ञता का लाभ उठाने, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने तथा ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में सहायता कर सकते हैं, जिससे BPR&D के अनुसंधान एवं नीति विकास प्रयासों को समृद्ध किया जा सकता है।
  • क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण: BPR&D को विभिन्न रैंक के पुलिस कर्मियों के लिये व्यापक और विशिष्ट प्रशिक्षण कार्यक्रमों के विकास को प्राथमिकता देनी चाहिये। इन कार्यक्रमों में प्रौद्योगिकी, सामुदायिक सहभागिता तथा अपराध की रोकथाम सहित पुलिस विभाग में उभरती चुनौतियों का समाधान किया जाना चाहिये।

निष्कर्ष 

पुलिस स्टेशन को न्याय के एक पवित्र मंदिर के रूप में देखा जाता है, जहाँ न्याय प्रदान करने की इसकी शक्ति में अटूट विश्वास के साथ नागरिक न्याय पाने की आस में पहुँचते हैं। यह विभिन्न तरीकों से समाज में पीड़ितों को निष्पक्षता के साथ न्याय दिलाने में भूमिका निभाता है। इसके अलावा यह आशा के स्तंभ के रूप में कार्य करता है तथा अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर प्रत्येक व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा एवं सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास करता है।

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