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मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019

  • 10 Aug 2019
  • 12 min read

संदर्भ

राष्ट्रपति ने देश में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से सड़क सुरक्षा के लिये कठोर प्रावधानों वाले मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक, 2019 को मंज़ूरी दे दी है। यह अधिनियम 31 जुलाई, 2019 को हुई चर्चा के बाद राज्यसभा ने 13 के मुकाबले 108 मतों से पारित कर दिया था। यह अधिनियम 23 जुलाई को लोकसभा में पारित हुआ। ज्ञातव्य है कि वर्ष 1988 के मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन कर मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक, 2019 लाया गया था।

अधिनियम में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से बेहद कठोर प्रावधान रखे गए हैं एवं इसके प्रावधान 18 राज्यों के परिवहन मंत्रियों की सिफारिशों पर आधारित हैं। संसद की स्थायी समिति ने इन सिफारिशों की विस्तार से जाँच की और समिति की रिपोर्ट के आधार पर इन्हें अधिनियम में शामिल किया गया है। इस अधिनियम में केंद्र सरकार के लिये मोटर वाहन दुर्घटना कोष के गठन की बात कही गई है जो भारत में सड़क का उपयोग करने वालों को अनिवार्य बीमा कवर प्रदान करेगा। इस अधिनियम में यातायात के नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है।

अधिनियम के प्रमुख बिंदु

सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को मुआवज़ा: केंद्र सरकार ‘गोल्डन आवर’ के दौरान सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों का कैशलेस उपचार करने की एक योजना विकसित करेगी। अधिनियम के अनुसार, ‘गोल्डन आवर’ घातक चोट के बाद की एक घंटे की समयावधि होती है जब तत्काल मेडिकल देखभाल से मृत्यु से बचाव की संभावना सबसे अधिक होती है। केंद्र सरकार थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के अंतर्गत मुआवज़े का दावा करने वालों को अंतरिम राहत देने के लिये एक योजना भी बना सकती है। अधिनियम में हिट एंड रन के मामलों में न्यूनतम मुआवज़े को बढ़ा दिया गया है:

(i) मृत्यु की स्थिति में 25,000 रुपए से बढ़ाकर 2,00,000 रुपए और

(ii) गंभीर चोट की स्थिति में 12,500 से बढ़ाकर 50,000 रुपए।

अनिवार्य बीमा: अधिनियम में केंद्र सरकार से मोटर वाहन दुर्घटना कोष बनाने की अपेक्षा की गई है। यह कोष भारत में सड़क का प्रयोग करने वाले सभी लोगों को अनिवार्य बीमा कवर प्रदान करेगा। इसे निम्नलिखित स्थितियों के लिये उपयोग किया जाएगा:

  • गोल्डन आवर योजना के अंतर्गत सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों का उपचार।
  • हिट और रन मामलों में मौत का शिकार होने वाले लोगों के प्रतिनिधियों को मुआवज़ा देना।
  • हिट और रन मामलों में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को मुआवज़ा देना और
  • केंद्र सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किये गए व्यक्तियों को मुआवज़ा देना।

इस कोष में निम्नलिखित के माध्यम से धन जमा कराया जाएगा:

  • उस प्रकृति का भुगतान जिसे केंद्र सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए,
  • केंद्र सरकार द्वारा अनुदान या ऋण,
  • क्षतिपूर्ति कोष में शेष राशि (हिट और रन मामलों में मुआवज़ा देने के लिये एक्ट के अंतर्गत गठित मौजूदा कोष) या
  • केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित अन्य कोई स्रोत।

गुड समैरिटन (Good Samaritans):अधिनियम के अनुसार, गुड समैरिटन वह व्यक्ति है जो दुर्घटना के समय पीड़ित को आपातकालीन मेडिकल या नॉन मेडिकल मदद देता है। यह मदद सद्भावना पूर्वक, स्वैच्छिक और किसी पुरस्कार की अपेक्षा के बिना होनी चाहिये।

good Samaritans

  • अगर सहायता प्रदान करने में लापरवाही के कारण दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को किसी प्रकार की चोट लगती है या उसकी मृत्यु हो जाती है तो गुड समैरिटन किसी दीवानी या आपराधिक कार्रवाई के लिये उत्तरदायी नहीं होगा।

वाहनों को रीकॉल करना: अधिनियम केंद्र सरकार को ऐसे मोटर वाहनों को रीकॉल (वापस लेने) करने का आदेश देने की अनुमति देता है, जिसमें कोई ऐसी खराबी हो जो कि पर्यावरण या ड्राइवर या सड़क का प्रयोग करने वालों को नुकसान पहुँचा सकती है। ऐसी स्थिति में मैन्युफैक्चरर को (i) खरीदार को वाहन की पूरी कीमत लौटानी होगी, या (ii) खराब वाहन को दूसरे वाहन जो कि समान या बेहतर विशेषताओं वाला हो, से बदलना होगा।

राष्ट्रीय परिवहन नीति: केंद्र सरकार राज्य सरकारों की सलाह से राष्ट्रीय परिवहन नीति बना सकती है। इस नीति में:

  • सड़क परिवहन के लिये एक योजनागत संरचना बनाई जाएगी
  • परमिट देने के लिये फ्रेमवर्क विकसित किया जाएगा
  • परिवहन प्रणाली की प्राथमिकताएं विनिर्दिष्ट की जाएंगी इत्यादि।

सड़क सुरक्षा बोर्ड: अधिनियम में एक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड का प्रावधान है जिसे केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना के ज़रिये बनाया जाएगा। बोर्ड सड़क सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन के सभी पहलुओं पर केंद्र और राज्य सरकारों को सलाह देगा। इनमें निम्नलिखित से संबंधित सलाह शामिल हैं:

  • मोटर वाहनों का स्टैंडर्ड
  • वाहनों का रजिस्ट्रेशन और लाइसेंसिंग
  • सड़क सुरक्षा के मानदंड
  • नए वाहनों की प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना

Vehicle route
अपराध और दंड : अधिनियम में विभिन्न अपराधों के लिये दंड को बढ़ाया गया है। उदाहरण के लिये शराब या ड्रग्स के नशे में वाहन चलाने पर अधिकतम दंड 2,000 रुपए से बढ़ाकर 10,000 रुपए कर दिया गया है। अगर मोटर वाहन मैन्युफैक्चरर मोटर वाहनों के निर्माण या रखरखाव के मानदंडों का अनुपालन करने में असफल रहता है तो अधिकतम 100 करोड़ रुपए तक का दंड या एक वर्ष तक का कारावास या दोनों दिये जा सकते हैं। अगर कॉन्ट्रैक्टर सड़क के डिज़ाइन के मानदंडों का अनुपालन नहीं करता तो उसे एक लाख रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। केंद्र सरकार अधिनियम में उल्लिखित जुर्माने को हर साल 10% तक बढ़ा सकती है।

अपराध एवं जुर्माने का प्रावधान:

अपराध जुर्माना पहले (रुपए में) जुर्माना अब (रुपए में)
सीट बेल्ट नहीं पहनने पर 100 1000
दुपहिया वाहनों पर 2 से ज्यादा सवारी 100 1000
हेलमेट नहीं पहनने पर 100 1000 एवं तीन महीने के लिये लाइसेंस निलंबित
इमरजेंसी वाहनों को रास्ता नहीं देने पर 0 10,000
बिना ड्राइविंग लाइसेंस के ड्राइविंग करने पर 500 5,000
ड्राइविंग लाइसेंस रद्द होने के बावजूद ड्राइविंग करने पर 500 10,000
ओवरस्पीड 400 2000
खतरनाक ड्राइविंग करने पर 1000 5000
शराब पीकर वाहन चलाने पर 2000 10,000
ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन पर बात करने पर 1000 5000
बिना परमिट पाए जाने पर 5000 10000
गाडि़यों की ओवरलोडिंग पर 2000 और उसके बाद प्रति टन 1000 20000 और उसके बाद प्रति टन 2000
बिना इंश्योरेंस के गाड़ी चलाने पर 1000 2000
नाबालिग द्वारा गाड़ी चलाने पर 0 25000 और 3 साल की सज़ा, वाहन का रजिस्ट्रेशन रद्द और गाड़ी के मालिक तथा नाबालिग के अभिभावक दोषी माने जाएंगे, नाबालिग को 25 साल की उम्र तक लाइसेंस नहीं

टैक्सी एग्रीगेटर: अधिनियम एग्रीगेटर को डिज़िटल इंटरमीडियरी या मार्केट प्लेस के रूप में पारिभाषित करता है जिसे परिवहन के उद्देश्य से (टैक्सी सेवाओं के लिये) ड्राइवर से कनेक्ट होने के लिये यात्री इस्तेमाल कर सकता है। राज्य सरकारों द्वारा इन एग्रीगेटरों को लाइसेंस जारी किये जाएंगे। इसके अतिरिक्त एग्रीगेटरों को इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 का अनुपालन करना होगा।

ज्ञातव्य है कि मोटर वाहन समवर्ती सूची में शामिल है एवं अधिनियम के अनुसार, राज्य सरकारों पर इसे लागू करने का कोई दबाव नहीं है किंतु अगर वे इसे लागू करते हैं तो केंद्र सरकार सहयोग करेगी।

दृष्टि इनपुट

वर्ष 2019 में वैश्विक सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसके अनुसार वैश्विक स्तर पर सड़क दुर्घटनाओं में प्रतिवर्ष 1.35 मिलियन से अधिक लोगों की मौत होती है एवं 50 मिलियन से अधिक लोगों को गंभीर शारीरिक चोटें आती हैं। इस रिपोर्ट की मानें तो ज़्यादातर 5 से 29 वर्ष की आयु के लोग ही सड़क दुर्घटनाओं के शिकार होते हैं।

भारत सरकार की तरफ से ज़ारी आँकड़ों के अनुसार, भारत में सड़क दुर्घटनाओं में प्रतिवर्ष करीब 1,50,000 लोगों की मौत होती है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की सड़क दुर्घटना से संबंधित ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट में यह आँकड़ा लगभग 2,99,000 बताया गया है।

ज्ञातव्य है कि भारत, वर्ष 2015 में ब्रासीलिया सड़क सुरक्षा (Brasilia Declaration on Road Safety) घोषणा का हस्ताक्षरकर्त्ता बन गया, जिसके अंतर्गत वर्ष 2020 तक सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों की संख्या को आधा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में शहरीकरण की तीव्र दर, सुरक्षा के पर्याप्त उपायों का अभाव, नियमों को लागू करने में विलंब, नशीली दवाओं एवं शराब का सेवन कर वाहन चलाना, तेज़ गति से वाहन चलाते समय हेल्मेट और सीट-बेल्ट न पहनना आदि हैं।

अभ्यास प्रश्न: सड़क दुर्घटना कारणों और बचाव के बारे में बताएँ साथ ही मोटर वाहन अधिनियम दुर्घटनाओं की रोकथाम में कैसे सहायक सिद्ध होगा, चर्चा करें।

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