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सामाजिक न्याय

मृत्यु दर में गिरावट

  • 12 Oct 2022
  • 15 min read

चर्चा में क्यों?

भारत के महापंजीयक (Registrar General of India- RGI) द्वारा हाल ही में जारी नमूना पंजीकरण प्रणाली (Sample Registration System- SRS) सांख्यिकीय रिपोर्ट, 2020 के अनुसार, वर्ष 2014 से सतत् विकास लक्ष्यों को वर्ष 2030 तक प्राप्त करने की दिशा में देश में शिशु मृत्यु दर (IMR), 5 वर्ष की आयु से कम मृत्यु दर से कम (U5MR) और नवजात मृत्यु दर  (Neonatal Mortality Rate-NMR) में उत्तरोत्तर कमी देखी जा रही है।

रिपोर्ट के निष्कर्ष क्या हैं?

  • 5 वर्ष की आयु से कम मृत्यु दर से कम (U5MR): देश में U5MR में वर्ष 2019 से 3 अंक (वार्षिक गिरावट दर: 8.6%) की महत्त्वपूर्ण गिरावट हुई है (वर्ष 2019 में प्रति 1000 जीवित जन्मों पर 35 के मुकाबले वर्ष 2020 में प्रति 1000 जीवित जन्म पर 32)। यह ग्रामीण क्षेत्रों में 36 से शहरी क्षेत्रों में 21 तक भिन्न-भिन्न है।
    • बालिकाओं के लिये U5MR बालकों (31) की तुलना में अधिक (33) है। इसी अवधि के दौरान पुरुष U5MR में 4 अंक और महिला U5MR में 3 अंक की गिरावट आई है।
    • U5MR में सबसे अधिक गिरावट उत्तर प्रदेश और कर्नाटक राज्यों में देखी गई है।
  • शिशु मृत्यु दर (IMR): IMR ने भी वर्ष 2019 में 30 प्रति 1000 जीवित जन्मों से वर्ष 2020 में प्रति 1000 जीवित जन्मों पर 2 अंकों की गिरावट दर्ज की (वार्षिक गिरावट दर: 6.7%)।
    • ग्रामीण-शहरी अंतर 12 अंक (शहरी 19, ग्रामीण 31) तक सीमित हो गया है।
    • वर्ष 2020 में कोई लिंग अंतर नहीं देखा गया है (बालक -28, बालिका - 28)।
  • नवजात मृत्यु दर (Neonatal Mortality Rate- NMR): यह वर्ष 2019 में 22 प्रति 1000 जीवित जन्मों से 2 अंकों की गिरावट के साथ वर्ष 2020 में प्रति 1000 जीवित जन्मों पर 20 हो गई है (वार्षिक गिरावट दर: 9.1%)। यह शहरी क्षेत्रों में 12 से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में 23 तक है।

SDG लक्ष्यों की स्थिति:

  • छह राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने पहले ही NMR (<=12 वर्ष 2030 तक) का SDG लक्ष्य हासिल कर लिया है: केरल (4), दिल्ली (9), तमिलनाडु (9), महाराष्ट्र (11), जम्मू और कश्मीर (12) और पंजाब (12)।
  • ग्यारह राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने पहले ही U5MR (<=25 वर्ष 2030 तक) का SDG लक्ष्य प्राप्त कर लिया है: केरल (8), तमिलनाडु (13), दिल्ली (14), महाराष्ट्र (18), जम्मू-कश्मीर (17), कर्नाटक (21) पंजाब (22), पश्चिम बंगाल (22), तेलंगाना (23), गुजरात (24) और हिमाचल प्रदेश (24)।

नमूना पंजीकरण प्रणाली (Sample Registration System- SRS) क्या है?

  • SRS राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय स्तरों पर शिशु मृत्यु दर, जन्म दर, मृत्यु दर, अन्य प्रजनन और मृत्यु दर संकेतकों के विश्वसनीय वार्षिक अनुमान प्रदान करने के लिये एक जनसांख्यिकीय सर्वेक्षण है।
  • यह वर्ष 1964-65 में कुछ राज्यों में भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा पायलट आधार पर शुरू किया गया था, यह वर्ष 1969-70 के दौरान पूरी तरह से चालू हो गया।
  • क्षेत्रीय जाँच में चयनित नमूना इकाइयों में निवासी अंशकालिक प्रगणकों, आम तौर पर आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षकों द्वारा जन्म और मृत्यु की निरंतर गणना और SRS पर्यवेक्षकों द्वारा हर छह महीने में एक स्वतंत्र सर्वेक्षण शामिल है। इन दो स्वतंत्र पदाधिकारियों द्वारा प्राप्त आंकड़ों का मिलान किया जाता है।

भारत का रजिस्ट्रार जनरल क्या है?

  • भारत के रजिस्ट्रार जनरल की स्थापना वर्ष 1961 में गृह मंत्रालय के तहत भारत सरकार द्वारा की गई थी।
  • यह भारत की जनगणना और भारतीय भाषा सर्वेक्षण सहित भारत के जनसांख्यिकीय सर्वेक्षणों के परिणामों की व्यवस्था, संचालन और विश्लेषण करता है।
  • रजिस्ट्रार का पद आमतौर पर एक सिविल सेवक को प्राप्त होता है जो संयुक्त सचिव का पद धारण करता है।
  • इस समय के दौरान बदलाव के क्या कारण रहे?
  • जैसा कि देखा गया है पिछले कुछ वर्षों से राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) U5MR, शिशु मृत्यु दर या नवजात मृत्यु दर एवं मातृ मृत्यु दर के मामले में भी देश के लिये एक गेम चेंजर रहे हैं।

NHM के बारे में:

  • NHM को भारत सरकार द्वारा वर्ष 2013 में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (वर्ष 2005 में शुरू किया गया) और राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (वर्ष 2013 में शुरू किया गया) को मिलाकर शुरू किया गया था।
  • मुख्य कार्यक्रम संबंधी घटकों में शामिल हैं- प्रजनन-मातृ-नवजात-बच्चे और किशोर स्वास्थ्य (RMNCH+A), संचारी और गैर-संचारी रोगों के लिये ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य प्रणाली का सुदृढ़ीकरण।
  • NHM न्यायसंगत, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुँच की उपलब्धि की परिकल्पना करता है जो लोगों की ज़रूरतों के प्रति जवाबदेह और उत्तरदायी हैं।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) को सहायता:

स्वास्थ्य सुविधाएँ:

  • राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के मानदंडों के अनुसार, नई सुविधाएँ स्थापित करने और उनकी आवश्यकता के आधार पर बुनियादी ढांचे की कमियों को पाटने के लिये मौजूदा सुविधाओं के उन्नयन के लिये NHM सहायता प्रदान की जाती है।

 स्वास्थ्य सेवाएँ:

  • NHM सहायता मातृ स्वास्थ्य, बाल स्वास्थ्य, किशोर स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम, और तपेदिक जैसी प्रमुख बीमारियों, मलेरिया, डेंगू और कालाजार, कुष्ठ रोगजैसी वेक्टर जनित बीमारियों से संबंधित कई मुफ्त सेवाओं के प्रावधान के लिये भी प्रदान की जाती है।

एनएचएम के तहत समर्थित प्रमुख पहल क्या हैं?

कौन से कारक मृत्यु दर को बढ़ाते हैं?

  • कुपोषण: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के बच्चों (58.6-67 प्रतिशत), महिलाओं (53.1-57 प्रतिशत) और पुरुषों (22.7-25 प्रतिशत) में एनीमिया का मामला सामने आया हैं। भारत के सभी राज्यों में (20%-40% घटनाओं को सामान्य माना जाता है)।
  • गैर-संस्थागत प्रसव: बच्चे का जन्म घर पर हुआ हो या किसी सुविधापूर्ण स्थान पर, यह भी शिशु के जीवित रहने की दर निर्धारित करता है। गैर-संस्थागत प्रसव के मामले में संक्रमण का जोखिम अधिक होता है।
    • हालाँकि भारत की संस्थागत प्रसव की हिस्सेदारी वर्ष 2019-2021 (NFHS-5) में बढ़कर 88.6% हो गई, जो वर्ष 2005-06 (NFHS 3) में 40.8% थी, फिर भी विकसित देशों की तुलना में यह बहुत कम है।
  • प्रतिरक्षा की कमी और कम वैक्सीन अनुपालन स्तर: निमोनिया, समय से पहले जन्म, जन्म के समय कम वजन, दस्त रोग, नवजात संक्रमण, जन्म श्वासावरोध, आदि भी ऐसे कारण हैं जो शिशु मृत्यु का कारण बनते हैं।
  • शिक्षा की कमी: मातृ शिक्षा से माताओं को विभिन्न स्वास्थ्य मुद्दों के बारे में पता होने की संभावना बढ़ जाती है और इस प्रकार ऐसे मुद्दों को रोकने की दिशा में सही और उचित कदम उठाए जाते हैं।
  • मां की उम्र: जन्म के समय मां की उम्र अहम भूमिका निभाती है। उदाहरण के लिये माताओं की उम्र और बच्चों में एनीमिया की घटनाओं के बीच एक विपरीत संबंध मौजूद है। इस बात से जुड़े सबूत हैं कि छोटी माताओं के बच्चे एनीमिया से अधिक पीड़ित होते हैं।

आगे की राह

  • आधारभूत संरचना और गुणवत्ता में सुधार: अस्पतालों की आधारभूत संरचना और गुणवत्ता भी मृत्यु दर को और कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। गुणवत्ता सुधार का उद्देश्य स्वास्थ्य देखभाल के विकास के संदर्भ में अनुमानित परिणाम प्राप्त करना और परिणामों में सुधार करना है।
  • शहरी-ग्रामीण विषमताएँ: देश के हर हिस्से में, शहरी से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक, व्यवस्थित परिवर्तन लाने की आवश्यकता है जो इन क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक तनाव को कम कर सकते हैं।
  • राजनीतिक इच्छाशक्ति: वित्त की उपलब्धता (केंद्र से) और साथ ही राज्यों द्वारा इसका विवेकपूर्ण उपयोग, तैयार की गई नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन और स्वास्थ्य हेतु बुनियादी ढाँचे को तैयार करना आवश्यक है।
  • एकीकृत दृष्टिकोण: विभिन्न योजनाओं के बेहतर समन्वय, अभिसरण और समग्र एकीकरण को सुनिश्चित करने के लिये संबंधित मंत्रालय एक दूसरे के साथ सहयोग कर सकते हैं।
  • सभी संकेतकों पर ध्यान देने की आवश्यकता: प्रत्येक संकेतक के पहलुओं से स्थितियों को देखने और उनकी बहुत सावधानी से निगरानी करने की तत्काल आवश्यकता है ताकि दुनिया में किसी भी मां या बच्चे को अनावश्यक रूप से न खोएँ।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी: निजी क्षेत्र की भागीदारी एक तत्काल आवश्यकता नहीं है, लेकिन राज्य के प्रति उनकी ईमानदार भागीदारी और पूरक भूमिका सरकार के बोझ को कम कर सकती है। अपने लोगों को स्वास्थ्य प्रदान करने में राज्य की भूमिका को बहुत अधिक महत्त्व नहीं दिया जा सकता है।

प्रमुख परिभाषाएँ

  • शिशु मृत्यु दर (IMR): यह एक वर्ष में प्रति 1000 जीवित जन्म लेने वाले बच्चों पर 1 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु की संख्या बताता है।
    • देश का औसत आईएमआर प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 32 है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन 36 और शहरी क्षेत्रों में 23 मौतें शामिल हैं।
  • 5 वर्ष से कम मृत्यु दर (U5MR): प्रति 1,000 नवजात शिशुओं पर पांच वर्ष से कम आयु के शिशुओं की मृत्यु की संभावना को संदर्भित करती है।
  • नवजात मृत्यु दर (NMR): इसे जेडकिसी दिए गए वर्ष या अवधि में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर जीवन के पहले 28 पूर्ण दिनों के दौरान मौतों की संख्या' के रूप में परिभाषित किया गया है।

  यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)  

प्रारंभिक परीक्षा

Q. 'राष्ट्रीय पोषण मिशन' के निम्नलिखित में से कौन से उद्देश्य हैं? (वर्ष 2017)

  1. गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं में कुपोषण के बारे में जागरूकता पैदा करना।
  2. छोटे बच्चों, किशोरियों और महिलाओं में एनीमिया की घटनाओं को कम करना।
  3. बाजरा, मोटे अनाज और बिना पॉलिश किये चावल की खपत को बढ़ावा देना।
  4. कुक्कुट अंडे की खपत को बढ़ावा देना।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 1, 2 और 3
(C) केवल 1, 2 और 4
(D) केवल 3 और 4

 उत्तर: (A)


मुख्य परीक्षा

Q. ''महिलाओं का सशक्तिकरण जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने की कुंजी है।'' विवेचना कीजिये। (वर्ष 2019)

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