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कृषि अवसंरचना कोष

  • 26 Aug 2020
  • 15 min read

संदर्भ:

हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा ‘कृषि अवसंरचना कोष’ (Agriculture Infrastructure Fund-AIF) की स्थापना की घोषणा की गई है। यह फंड फसल कटाई के बाद बुनियादी ढाँचा प्रबंधन एवं सामुदायिक कृषि परिसंपत्तियों (Community Agricultural Assets) हेतु में निवेश के लिये मध्यम एवं दीर्घकालिक ऋण वित्तपोषण की सुविधा प्रदान करेगी। सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना के माध्यम से किसान फसल की कटाई के बाद उसकी सही कीमत मिलने तक उसे सुरक्षित रख सकेंगे। इस योजना के क्रियान्वयन के लिये सरकार द्वारा वर्तमान में सार्वजनिक क्षेत्र के 11 बैंकों से समझौता-ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये जा चुके हैं।

 

प्रमुख बिंदु:

  • ‘कृषि अवसंरचना कोष’ (Central Sector Scheme-Agriculture Infrastructure Fund) के तहत एक लाख करोड़ रुपए की वित्तपोषण की सुविधा दी गई है।
  • इस योजना के तहत ऋण पर ब्याज में 3% की छूट प्रदान की जाएगी साथ ही ऋण जारी करने वाली संस्था को 2 करोड़ रुपए तक के ऋण पर बैंक गारंटी सरकार द्वारा दी जाएगी।
  • इस योजना के क्रियान्वयन के लिये अगले चार वर्षों के दौरान एक लाख करोड़ रुपए का ऋण प्रदान किया जाएगा।
    • इसके तहत वर्तमान/चालू वित्तीय वर्ष में 10,000 करोड़ रुपए के और अगले तीन वर्षों में 30,000 करोड़ रुपए (प्रतिवर्ष) की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
  • इस योजना की अवधि वित्तीय वर्ष 2020 से 2029 (10 वर्ष) तक निर्धारित की गई है।
  • इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिये निम्नलिखित संस्थाएँ/समूह पात्र होंगे-
    • ‘प्राथमिक कृषि साख समितियाँ (Primary Agricultural Credit Societies- PACS)
    • विपणन सहकारी समितियाँ (Cooperative Societies)
    • किसान उत्पादक संगठन (Farmer Producers Organizations)
    • स्वयं सहायता समूह (Self Help Group)
    • संयुक्त देयता समूह (Joint Liability Group)
    • बहुउद्देशीय सहकारी समितियाँ (Multipurpose Cooperative Societies)
    • कृषि उद्यमियों, स्टार्ट-अप, एग्रीगेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स (Aggregation Infrastructure Providers) आदि।

पृष्ठभूमि:

  • गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा किसानों की आय को दोगुना करने के लिये कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिये गये हैं। जैसे-
  • सरकार द्वारा इन प्रयासों के बाद के अंतर्गत यह बहुत आवश्यक हो गया था कि कृषि क्षेत्र में सुधारों के अगले चरण के तहत निवेश बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए।

सुधार की आवश्यकता:

  • पूर्व में कृषि क्षेत्र के लिये सरकार द्वारा शुरू की गई अधिकांश योजनायें कृषि उपज को बढ़ाने पर केंद्रित रही हैं।
  • 1980 के दशक में कृषि क्षेत्र में वार्षिक निवेश देश की जीडीपी का लगभग 11% था जबकि वर्तमान में यह घटकर लगभग 7% से भी कम हो गया है।

उद्देश्य:

  • फसलों की कटाई के बाद अनाज के प्रबंधन हेतु अवसंरचना (Post-Harvest Management Infrastructure) का विकास करना।
  • उपज बढ़ाने के लिये सामुदायिक कृषि परिसंपत्तियों (Community Agricultural Assets) हेतु धन उपलब्ध करना।
  • लिये गए ऋण पर सब्सिडी और बैंक गारंटी के माध्यम से किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े उद्यमों को निवेश बढ़ाने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिये प्रोत्साहित करना।
  • इस योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में आधारिक तंत्र को मज़बूत करना है, जिससे देश के बड़े बाज़ारों तक किसानों की पहुँच सुनिश्चित की जा सके और साथ ही नवीन तकनीकों के माध्यम से फाइटोसैनेटिक मानडंडों (Phytosanitary norms)को पूरा करते हुए अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों तक भारतीय किसानों की पहुँच बढ़ाई जा सके।

विशेषता:

  • इस योजना के तहत ‘टॉप अप’ (Top Up) प्रणाली के तहत दोहरे लाभ की सुविधा प्राप्त हो सकेगा, अर्थात यदि किसी पात्र व्यक्ति को पहले से ही किसी अन्य योजना के तहत सब्सिडी प्राप्त हो रही हो तब भी वह इस योजना का लाभ प्राप्त कर
  • सकेगा।
  • इस योजना के तहत 2 करोड़ तक के ऋण पर ‘क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज़’ (Credit Guarantee Fund Trust for Micro and Small Enterprises- CGTMSE) के द्वारा गारंटी प्रदान की जाएगी साथ ही इस गारंटी के लिये ट्रस्ट का शुल्क केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
  • इसके तहत ऋण (अधिकतम 2 करोड़ रुपए तक) स्वीकृत होने से अगले 7 वर्षों तक सब्सिडी प्राप्त होती रहेगी।
  • इस योजना के तहत ऋण के पुनर्भुगतान पर अधिस्थगन न्यूनतम 6 महीने और अधिकतम 2 वर्ष के बीच हो सकता है।

प्रबंधन:

  • ‘कृषि अवसंरचना कोष’ का प्रबंधन और निगरानी ‘प्रबंधन सूचना प्रणाली’(Management Information System- MIS) के माध्यम से ऑनलाइन की जाएगी।
    • इस प्रणाली के माध्यम से सभी पात्र संस्थान ‘कृषि अवसंरचना कोष’ से ऋण प्राप्त करने के लिये आवेदन कर सकेंगे।
    • साथ यह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म कई बैंकों द्वारा दी जाने वाली ब्याज दरों में पारदर्शिता, ब्याज अनुदान एवं क्रेडिट गारंटी सहित योजना विवरण, न्यूनतम दस्तावेज़, अनुमोदन की तीव्र प्रक्रिया के साथ-साथ अन्य योजना के लाभ के साथ एकीकरण जैसी सुविधा भी प्रदान करेगा।
  • इस योजना की निगरानी और प्रभावी प्रतिक्रिया को सुनिश्चित करने के लिये राष्ट्रीय, राज्य और ज़िला स्तर पर निगरानी समितियों का गठन किया जाएगा।

क्रियान्वयन राज्यों की भूमिका:

  • अधिकांश योजनाओं की तरह ही इस योजना के क्रियान्वयन और प्रोत्साहन का कार्य में राज्यों द्वारा किया जाएगा।
  • इसके लिये राज्य स्तर पर एक निगरानी समिति का गठन किया गया है, राज्य के मुख्य सचिव इस समिति के अध्यक्ष होंगे।
  • इसी प्रकार ज़िला कलेक्टर, ज़िला स्तरीय निगरानी समिति के अध्यक्ष होंगे और संबंधित ज़िले से नाबार्ड के ज़िला प्रबंधक तथा इस योजना में शामिल बैंकों के प्रधान प्रबंधक इस समिति के सदस्य होंगे।
  • ज़िला स्तर पर संबंधित विभागों के अधिकारियों द्वारा कृषि क्लस्टरों की पहचान और उनकी कमियों को रेखांकित करने का कार्य संपन्न किया जाएगा।

एग्री इंफ्रा पोर्टल:

  • इस योजना के क्रियान्वयन को आसान बनाने के लिये एग्री इंफ्रा पोर्टल की शुरुआत की गई है।
  • इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिये पात्र व्यक्ति/संस्थान इस पोर्टल के माध्यम से आसानी से आवेदन कर सकेंगे।
  • सरकार द्वारा इस योजना में शामिल बैंकों के साथ समझौता-ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये गए है और ऋण वितरण की दरों को सीमित कर दिया गया है, जिससे बैंक अपनी इच्छा के अनुरूप दरों में वृद्धि नहीं कर सकेंगे।
  • केंद्र सरकार द्वारा इस योजना के तहत ऋण वितरण के लिये ‘सीमांत निधि लागत पर आधारित उधार दर’(Marginal Cost of Funds based Lending Rate-MCLR) से 1% से ऊपर की सीमा निर्धारित की गई है। अर्थात बैंक दिये गए ऋण पर ब्याज की दर में MCLR से 1% से अधिक की बृद्धि नहीं कर सकेंगे।

अन्य प्रयास:

  • इस योजना के तहत सरकार द्वारा कृषि क्लस्टर की पहचान कर वहाँ उगाए जाने वाली फसलों के लिये आवश्यक अवसंरचना के विकास और इसके लिये आवश्यक सहयोग प्रदान करने का प्रयास किया जाएगा।
    • उदाहरण के लिये- यदि किसी क्षेत्र में केले की खेती अधिक होती है और वहाँ राइपनिंग चैंबर (Ripening Chamber) की आवश्यकता है, संतरे की खेती वाले क्षेत्रों में वैक्सिंग प्लांट की आवश्यकता (Waxing Plant) या अनाज के वैज्ञानिक पद्धति से भण्डारण हेतु उपयुक्त प्रबंध लिये, फलों और सब्जियों के लिये कोल्ड स्टोर का निर्माण आदि।
    • इस योजना के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों अनाज और अन्य फसलों (जैसे-प्याज, लहसुन आदि) के भण्डारण हेतु आधुनिक तकनीकी से युक्त भंडार गृहों के निर्माण कर इसे ज्यादा दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकेगा।

लाभ:

‘प्रबंधन सूचना प्रणाली’ पर एकत्र किये गए आँकड़ों के माध्यम से इस योजना के क्रियान्वयन की निगरानी के साथ यह भी पता चल सकेगा कि निवेशकों द्वारा किस प्रकार की योजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

  • सुरक्षित भण्डारण:
    • आधुनिक तकनीकों से युक्त भंडार गृहों के निर्माण से किसानों के पास कृषि उपज का उपयुक्त मूल्य प्राप्त होने तक उसे सुरक्षित रखने का विकल्प होगा, जिससे कृषि उपज पर अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकेगा।
    • साथ ही सुरक्षित भण्डारण के माध्यम से कृषि उपज के मूल्य को स्थिर रखने के साथ वर्ष भर बाज़ार में इसकी उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।
  • ऋण वितरण में पारदर्शिता:
    • सरकार द्वारा शुरू किये गए पोर्टल के माध्यम से इच्छुक व्यक्ति/संस्थान ऋण के लिये आवेदन से पहले अलग-अलग बैंकों द्वारा प्रस्तावित ऋण दरों के बीच तुलना करके बेहतर निर्णय ले सकेंगे।
    • सरकार और बैंकों के बीच किये गए MoU के तहत यह निर्धारित किया गया है कि बैंक आवेदन के 60 दिनों के अंदर अपना निर्णय हितग्राही, ज़िला स्तरीय, राज्य स्तरीय और राष्ट्र स्तरीय निगरानी समिति, नाबार्ड तथा वित्तीय सेवा विभाग के साथ साझा करेगा।
    • नाबार्ड द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु किसान उत्पादक संगठन जुड़ी परियोजनाओं के चयन के पश्चात पोर्टल पर इसकी जानकारी साझा की जाएगी और नाबार्ड द्वारा धनराशि जारी करने के बाद ‘सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली’ (Public Financial Management System-PFMS) के माध्यम से सब्सिडी सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेज दी जाएगी।


आगे की राह:

  • स्वतंत्रता के शुरूआती 40 वर्षों में सरकार द्वारा देश में कृषि उपज को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है जिसके बाद पिछले कुछ वर्षों में कृषि प्रबंधन के क्षेत्र में भी महत्त्वपूर्ण प्रगति ही है, अतः सरकार को क्षेत्र विशेष में संसाधनों की उपलब्धता और बाज़ार की मांग के अनुरूप ‘फसल नियोजन’ (Crop Planning) को बढ़ावा देना चाहिये।
  • कृषि से जुड़े मुनाफे में वृद्धि के लिये कृषि पर निर्भर लोगों की संख्या में कमी करना बहुत ही आवश्यक है, गौरतलब है कि वर्तमान में देश में कामगारों की लगभग 42% आबादी अपनी आजीविका के लिये कृषि पर निर्भर है जबकि देश की जीडीपी में कृषि का योगदान लगभग 15% से भी कम है।
  • वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र में जल का अनियंत्रित दुरुपयोग (लगभग 78%) एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, ऐसे में सरकार को कृषि में आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिये।
  • अंतर्राष्ट्रीय कृषि बाज़ार तक भारतीय कृषि उत्पादों की पहुँच को सुनिश्चित करने के लिये उत्पादन और प्रबंधन में सुधार के साथ कृषि से जुड़े अंतर्राष्ट्रीय मानकों का पालन तथा इसकी जागरूकता का प्रसार बहुत ही आवश्यक होगा।


अभ्यास प्रश्न: ‘कृषि अवसंरचना कोष’ से आप क्या समझाते हैं? कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण के संदर्भ में कृषि अवसंरचना कोष की भूमिका की चर्चा कीजिये।

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