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मुख्य परीक्षा

मनुष्य/इंसान

  • 13 Sep 2018
  • 2 min read

बेईमान सजे-बजे हैं
तो क्या हम मान लें कि
बेईमानी भी एक सजावट है?
कातिल मजे में हैं
तो क्या हम मान लें कि कत्ल करना एक मजेदार काम है?
मसला मनुष्य का है
इसलिये हम तो हरगिज नहीं मानेंगे
कि मसले जाने के लिये ही
बना है मनुष्य।

-वीरेन डंगवाल

उन्हें सलाम
जिन्होंने दम तोड़ते हुए
आदमी की आँखों में झाँका और उनमें
उम्मीदों के
सितारे जगमगाने लग गए।

-महेंद्र नेह

आओ,
हम बीहड़ और कठिन सुदूर यात्रा पर चलें
आओ, क्योंकि-
छिछला, निरुद्देश्य और लक्ष्यहीन जीवन
हमें स्वीकार नहीं
हम आकांक्षा, आक्रोश, आवेग और
अभिमान से जिएंगे
असली इंसान की तरह जिएंगे।

-कार्ल मार्क्स

इन्द्र आप यहाँ से जाएँ
तो पानी बरसे
अदिति, आप यहाँ से चलें
तो कुछ ढंग की संततियाँ जन्म लें
देवियो-देवताओ, हम मनुष्य आप से
जो कुछ कह रहे हैं
प्रार्थना के शिल्प में नहीं।

-देवी प्रसाद मिश्र

ताकत से आदमी उठता कम गिरता ज़्यादा है
जब वह इस ताकत की व्यर्थता समझ जाता है
तो ज्यादा बेहतर आदमी होता है
और ज्यादा बेहतर आदमी होता है तो देवता कहलाता है।

-प्रियदर्शन

ईश्वर का पहला चिंतन था-फरिश्ता।
ईश्वर का पहला शब्द था-मनुष्य।

-खलील जिब्रान

बस कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना
आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसाँ होना।

-मिर्जा गालिब

हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी
जिस को भी देखना हो कई बार देखना।

-निदा फाजली

वक्त रहता नहीं कहीं टिककर
इसकी आदत भी आदमी सी है।

-गुलजार

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