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Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 27 सितंबर, 2021

  • 27 Sep 2021
  • 7 min read

पंडित दीनदयाल उपाध्याय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 105वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि ‘उन्होंने अपना जीवन राष्ट्र निर्माण में समर्पित कर दिया था।’ पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर, 1916 को मथुरा ज़िले के नगला चंद्रभान गाँव में हुआ था। वे एक दार्शनिक, समाजशास्त्री, अर्थशास्त्री एवं राजनीतिज्ञ थे। इनके द्वारा प्रस्तुत दर्शन को ‘एकात्म मानववाद’ कहा जाता है, जिसका उद्देश्य एक ऐसा ‘स्वदेशी सामाजिक-आर्थिक मॉडल’ प्रस्तुत करना था जिसमें विकास के केंद्र में मानव हो। वर्ष 1942 में वे ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ में एक पूर्णकालिक कार्यकर्त्ता के रूप में शामिल हुए। इसके पश्चात् वर्ष 1940 के दशक में उन्होंने लखनऊ से ‘राष्ट्र धर्म’ नाम से एक मासिक पत्रिका की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य हिंदुत्व राष्ट्रवाद की विचारधारा का प्रसार करना था। इसके बाद उन्होंने ‘पांचजन्य’ और ‘स्वदेश’ जैसी पत्रिकाओं की भी शुरुआत की। वर्ष 1967 में जनसंघ के अध्यक्ष के रूप में चुने जाने के एक वर्ष बाद पटना में एक ट्रेन यात्रा के दौरान अज्ञात कारणों के चलते उनकी मृत्यु हो गई।

विश्व पर्यटन दिवस

प्रतिवर्ष 27 सितंबर को ‘विश्व पर्यटन संगठन’ (UNWTO) की स्थापना को चिह्नित करने हेतु ‘विश्व पर्यटन दिवस’ का आयोजन किया जाता है। ‘विश्व पर्यटन संगठन’ की स्थापना इसी दिन वर्ष 1980 में वैश्विक स्तर पर सामाजिक-सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक मूल्यों और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के विकास में पर्यटन की भूमिका को रेखांकित करने के उद्देश्य से की गई थी। वर्तमान में ‘विश्व पर्यटन संगठन’ संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी के रूप में कार्यरत है, जो सतत् एवं सार्वभौमिक रूप से सुलभ पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु उत्तरदायी है। मौजूदा महामारी के बाद रिकवरी के दौर में वैश्विक स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा देना काफी महत्त्वपूर्ण है। ज्ञात हो कि बीते वर्ष महामारी के कारण 90% विश्व धरोहर स्थल बंद हो गए थे, जिसके परिणामस्वरूप ग्रामीण समुदायों के अधिकांश युवा बेरोज़गार गए। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि विकासशील देशों में गरीबी का मुकाबला करने हेतु ‘पर्यटन क्षेत्र’ एक महत्त्वपूर्ण उपकरण के तौर पर कार्य कर सकता है। वर्ष 2021 के लिये ‘विश्व पर्यटन दिवस’ की थीम है- ‘समावेशी विकास हेतु पर्यटन’। 

विश्व फार्मासिस्ट दिवस

दुनिया भर में प्रतिवर्ष 25 सितंबर को स्वास्थ्य में सुधार हेतु ‘फार्मासिस्ट’ की भूमिका को रेखांकित करने के लिये ‘विश्व फार्मासिस्ट दिवस’ का आयोजन किया जाता है। वर्ष 2021 के लिये ‘विश्व फार्मासिस्ट दिवस’ की थीम है- ‘फार्मेसी: ऑलवेज़ ट्रस्टेड टू योर हेल्थ’। दुनिया भर में फार्मासिस्ट, आम लोगों को बेहतर दवाएँ प्राप्त करने में मदद करते हैं और उन्हें स्थानीय स्तर पर चिकित्सीय सलाह भी प्रदान करते हैं। ज्ञात हो कि इंटरनेशनल फार्मास्युटिकल फेडरेशन (FIP), जो कि फार्मासिस्ट और फार्मास्युटिकल वैज्ञानिकों के राष्ट्रीय संघों का वैश्विक महासंघ है, 25 सितंबर, 1912 को अस्तित्व में आया था। विश्व फार्मासिस्ट दिवस की स्थापना वर्ष 2009 में इस्तांबुल (तुर्की) में ‘वर्ल्ड काॅन्ग्रेस ऑफ फार्मेसी एंड फार्मास्युटिकल साइंसेज़’ में इंटरनेशनल फार्मास्युटिकल फेडरेशन (FIP) काउंसिल द्वारा की गई थी। 

ईश्वर चंद्र विद्यासागर

26 सितंबर, 2021 को देश भर में समाज सुधारक और शिक्षाविद ईश्वर चंद्र विद्यासागर की 201वीं जयंती मनाई गई। ईश्वर चंद्र विद्यासागर का जन्म 26 सितंबर, 1820 को पश्चिम बंगाल के एक गाँव में हुआ था। अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद वे कलकत्ता चले गए और वहाँ वर्ष 1829 से वर्ष 1841 के बीच उन्होंने संस्कृत विश्वविद्यालय से वेदांत, व्याकरण, साहित्य, अलंकार शास्त्र और नीतिशास्र में निपुणता हासिल की, इस दौरान वर्ष 1839 में उन्हें संस्कृत और दर्शन में विशेषज्ञता के लिये विद्यासागर की उपाधि दी गई। 21 वर्ष की आयु में ईश्वर चंद्र विद्यासागर फोर्ट विलियम कॉलेज में संस्कृत विभाग के प्रमुख के रूप में शामिल हो गए। उनकी पुस्तक ‘बोर्नो पोरिचोय’ को आज भी बांग्ला भाषा के अक्षर सीखने के लिये एक परिचयात्मक पुस्तक के रूप में उपयोग किया जाता है। यह उनके अथक संघर्ष का ही परिणाम था कि भारत की तत्कालीन सरकार ने वर्ष 1856 में विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित किया। अन्य समाज सुधारकों के विपरीत ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने समाज को भीतर से बदलने की कोशिश की और इसी के परिणामस्वरूप बंगाल के रूढ़िवादी हिंदू ब्राह्मण समाज में विधवा पुनर्विवाह की शुरुआत हुई। 29 जुलाई, 1891 को 70 वर्ष की उम्र में कलकत्ता में उनका निधन हो गया।

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