दृष्टि ज्यूडिशियरी का पहला फाउंडेशन बैच 11 मार्च से शुरू अभी रजिस्टर करें
ध्यान दें:

डेली अपडेट्स


विविध

Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 23 अक्तूबर, 2020

  • 23 Oct 2020
  • 5 min read

वीज़ा प्रतिबंधों की समाप्ति

कोरोना वायरस महामारी के कारण लागू किये गए लॉकडाउन से संबंधित यात्रा प्रतिबंधों में और अधिक छूट देते हुए केंद्र सरकार ने ‘ओवरसीज़ सिटीज़नशिप ऑफ इंडिया’ (OCI) कार्डधारकों और अन्य विदेशी नागरिकों को पर्यटन के अलावा किसी भी अन्य कार्य के लिये भारत में आने की इजाज़त दे दी है। इस संबंध में जारी एक अधिसूचना के अनुसार, श्रेणीबद्ध तरीके से दी जा रही इस यात्रा छूट के तहत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक वीज़ा, टूरिस्ट वीज़ा और मेडिकल वीज़ा को छोड़कर सभी मौजूदा वीज़ा को तत्काल प्रभाव से बहाल करने का फैसला किया है। हालाँकि ऐसे सभी यात्रियों को क्वारंटाइन, सोशल डिस्टेंसिंग और कोरोना वायरस संबंधी अन्य प्रोटोकॉल्स के बारे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। ध्यातव्य है कि सरकार ने इस वर्ष महामारी के कारण फरवरी माह में ही हवाई यात्राओं को प्रतिबंधित कर दिया था। कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप से निपटने के लिये लगभग दो महीने के निलंबन के बाद सरकार ने 25 मई को अनुसूचित घरेलू यात्री उड़ानों को फिर से शुरू कर दिया था। 

साद अल-हरीरी

लेबनान के राष्ट्रपति मिशेल ओउन (Michel Aoun) ने लेबनान की मौजूदा राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति से निपटने के लिये नई सरकार बनाने हेतु पूर्व प्रधानमंत्री साद अल-हरीरी को लेबनान के नए प्रधानमंत्री के रूप में नामित किया है। ध्यातव्य है कि साद अल-हरीरी को लेबनान की संसद के अधिकांश सांसदों का समर्थन भी हासिल है। साद अल-हरीरी सर्वप्रथम वर्ष 2009 में लेबनान के प्रधानमंत्री बने थे और वर्ष 2011 तक इस पद पर रहे थे, इसके बाद वे वर्ष 2016 में एक बार फिर लेबनान के प्रधानमंत्री बने, किंतु अक्तूबर, 2019 में उन्हें भारी विरोध प्रदर्शन के बीच इस्तीफा देना पड़ा था। साद अल-हरीरी की सरकार के समक्ष बैंकिंग संकट, मुद्रा संकट और गरीबी तथा सार्वजानिक ऋण में बढ़ोतरी जैसी काफी गंभीर चुनौतियाँ मौजूद हैं। इसके अलावा नई सरकार को कोरोना वायरस महामारी की गंभीर चुनौती का भी सामना करना पड़ेगा। ध्यातव्य है कि अगस्त माह में लेबनान की राजधानी बेरुत में एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ था, जिसमें लगभग 200 लोगों की मृत्यु हुई थी। ज्ञात हो कि पश्चिम एशिया में भू-मध्य सागर के पूर्वी तट पर स्थित देश लेबनान की जनसंख्या लगभग 68.5 लाख है। 

CTET और TET प्रमाणपत्र की मान्यता

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) प्रमाणपत्र को जीवन भर के लिये मान्य कर दिया है। इस निर्णय के माध्यम से वे उम्मीदवार जिन्होंने CTET और TET परीक्षा उत्तीर्ण की है, वे अपने पूरे जीवनकाल में शिक्षक भर्ती के लिये आवेदन कर सकते हैं। ध्यातव्य है कि इससे पूर्व इन प्रमाणपत्रों की वैधता जारी होने की तारीख से 7 वर्ष तक मान्य थी। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा अभी तक यह घोषणा नहीं की गई है कि यह निर्णय कब से लागू होगा। NCTE का यह निर्णय खासतौर पर उन CTET और TET प्रमाणित उम्मीदवारों के लिये काफी महत्त्वपूर्ण है, जो 7 वर्ष की वैधता समाप्त होने के कारण शिक्षक भर्ती के लिये आवेदन नहीं कर पर रहे थे। साथ ही यह शिक्षण क्षेत्र में कॅरियर बनाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिये रोज़गार के अवसर भी बढ़ाएगा। एक सांविधिक निकाय के रूप में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) 17 अगस्त, 1995 को अस्तित्त्व में आई थी। इस परिषद का मूल उद्देश्य समूचे भारत में अध्यापक शिक्षा प्रणाली का नियोजन और समन्वित विकास करना, अध्यापक शिक्षा प्रणाली में मानदंडों और मानको का विनियमन तथा उन्हें समुचित रूप से बनाए रखना है।

close
एसएमएस अलर्ट
Share Page
images-2
images-2