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प्रारंभिक परीक्षा

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 22 मई, 2020

  • 22 May 2020
  • 7 min read

मध्यम इकाइयाँ

Medium Units

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम’ (Micro, Small and Medium Enterprises-MSMEs) की परिभाषा बदलने के बाद भारत सरकार ने ‘मध्यम इकाइयों’ (Medium Units) के लिये निवेश एवं टर्नओवर सीमा को बढ़ाकर क्रमश: 50 करोड़ रुपए और 200 करोड़ रुपए तक बढ़ाने का फैसला किया है।

प्रमुख बिंदु: 

  • संशोधित परिभाषा के अनुसार, 1 करोड़ रुपए तक के निवेश और 5 करोड़ रुपए से कम के कारोबार करने वाली किसी भी फर्म को ‘सूक्ष्म’(Micro) के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।
  • जबकि 10 करोड़ रुपए तक के निवेश और 50 करोड़ रुपए तक के टर्नओवर वाली कंपनी को ‘छोटे’ (Small) के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।

अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस

International Day for Biological Diversity

प्रत्येक वर्ष 22 मई को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस (International Day for Biological Diversity) मनाया जाता है।

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थीम: 

  • इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस की थीम ‘हमारे समाधान प्रकृति में हैं’ (Our Solutions are in Nature) है।

उद्देश्य: 

  • इसका उद्देश्य लोगों में जैव-विविधता के महत्त्व के बारे में जागरूक उत्पन्न करना है।

प्रमुख बिंदु:

  • अंतर्राष्‍ट्रीय जैव-विविधता दिवस को मनाने की शुरुआत 20 दिसंबर, 2000 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव द्वारा की गई थी।
  • 22 मई, 1992 को नैरोबी में जैव-विविधता पर अभिसमय (Convention on Biological Diversity- CBD) के पाठ को स्वीकार किया गया था। इसलिये 22 मई को प्रतिवर्ष अंतर्राष्‍ट्रीय जैव-विविधता दिवस मनाया जाता है। 

मई चौथा आंदोलन

May Fourth Movement

यह 4 मई, 1919 को चीन में हुई एक बौद्धिक क्रांति तथा समाजशास्त्री सुधार आंदोलन था। इसे चीन में मई चौथा आंदोलन (May Fourth Movement) कहा जाता है।

प्रमुख बिंदु:   

  • यह एक साम्राज्यवाद-विरोधी, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक आंदोलन था जो 4 मई, 1919 को बीजिंग में छात्रों के विरोध से शुरू हुआ था।
    • प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद मित्र देशों के मध्य वर्साय की संधि हुई चूँकि चीन ने प्रथम विश्व युद्ध में मित्र देशों का साथ दिया था इसलिए उसे उम्मीद थी कि इस बैठक में उसे यदि बराबर की हिस्सेदारी नहीं मिली तो कम-से-कम उसकी आवाज़ तो सुनी ही जाएगी किंतु बातचीत के दौरान फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने गुप्त समझौते के तहत चीन की सीमा का कुछ हिस्सा जापान को सौंप दिया।  
  • जिसके परिणामस्वरूप चीन में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन करना शुरू हुआ जिसे मई चौथा आंदोलन (May Fourth Movement) के रूप में जाना जाता है।

सोनिक बूम

Sonic Boom

कर्नाटक के बेंगलुरु में 20 मई, 2020 को एक सुपरसोनिक प्रोफाइल से युक्त ‘IAF टेस्ट फ्लाइट’ से निकली तेज़ ध्वनि जिसे 'सोनिक बूम'(Sonic Boom) के रूप में जाना जाता है, ने शहरवासियों को आश्चर्यचकित कर दिया।

Sonic-Boom

प्रमुख बिंदु:

  • जब कोई वस्तु ध्वनि की गति से अधिक तेज़ी से हवा के माध्यम से यात्रा करती हुई शाॅक वेव्स (Shock Waves) बनाती है तो उसे 'सोनिक बूम'(Sonic Boom) के रूप में जाना जाता है।
  • इस प्रक्रिया में ऊर्जा का विशाल उत्सर्जन (आमतौर पर ध्वनि के रूप में) हो सकता है जिसमें गरज के समान एक तेज़ विस्फोट होता है।
  • सोनिक बूम एक निरंतर ध्वनि है जिसे सुपरसोनिक गति से यात्रा कर रहे विमान द्वारा उत्सर्जित किया जाता है।
  • यदि विमान कम ऊँचाई पर उड़ रहा है तो सोनिक बूम से भूकंप आने और काँच के टूटने के समान झटके लग सकते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस

International Tea Day

21 मई को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा प्रथम अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस (International Tea Day- ITD) मनाया गया।

International-tea-day

उद्देश्य:

  • इस दिवस का उद्देश्य दुनिया भर में चाय के लंबे इतिहास और गहरे सांस्कृतिक एवं आर्थिक महत्त्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। 

प्रमुख बिंदु: 

  • वर्ष 2015 में भारत ने मिलान (इटली) में खाद्य एवं कृषि संगठन’ (Food and Agriculture Organization- FAO) के अंतर सरकारी समूह की बैठक में 21 मई को दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव रखा था। परिणामतः 15 दिसंबर, 2019 को संयुक्त राष्ट्र ने 21 मई को अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस के रूप घोषित किया।    
  • अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस मनाने का संकल्प वर्ष 2019 में संयुक्त राष्ट्र के ‘खाद्य एवं कृषि संगठन’ द्वारा अपनाया गया था।
  • वर्तमान में विश्व के 35 से अधिक देशों में चाय का उत्पादन होता है और विश्व भर में छोटे किसानों सहित इस क्षेत्र में 13 मिलियन लोग संबद्ध हैं।
  • देश में 100 से अधिक किस्मों की खपत के साथ भारत चाय के शीर्ष चार उत्पादकों में शामिल है। चीन, भारत, केन्या और श्रीलंका के लगभग 90 लाख किसान आय के लिये चाय उत्पादन पर निर्भर हैं।
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