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प्रारंभिक परीक्षा

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 16 मई, 2020

  • 16 May 2020
  • 13 min read

सचेत

SACHET

15 मई, 2020 को भारत के रक्षा मंत्री ने देश में ही बनाए गए तटरक्षक बल के एक गश्ती जहाज़ ‘सचेत’ (SACHET) और दो इंटरसेप्टर नौकाओं (C-450 एवं C-451) को राष्ट्र को समर्पित किया।

प्रमुख बिंदु:  

  • सचेत का डिज़ाइन एवं निर्माण ‘गोवा शिपयार्ड लिमिटेड’ द्वारा किया गया है, इसे अत्याधुनिक नौवहन एवं संचार उपकरणों से सुसज्जित किया गया है।
  • भारतीय तटरक्षक जहाज़ ‘सचेत’ पाँच ‘अपतटीय गश्ती जहाज़ों’ (Offshore Patrol Vessels) की श्रृंखला में पहला पोत है।
  • 105 मीटर लंबे पोत ‘सचेत’ का वजन लगभग 2,350 टन है और यह 9,100 किलोवाट के दो डीज़ल इंजनों द्वारा संचालित होता है जिन्‍हें 6,000 नॉटिकल मील की सहनशक्ति के साथ 26 समुद्री मील (नॉट) की अधिकतम गति से चलने योग्य बनाया गया है। 
  • यह पोत तीव्र तलाशी एवं बचाव अभियानों के लिये दोहरे इंजन वाले एक हेलि‍कॉप्टर, उच्च गति वाली चार नौकाओं आदि को ले जाने में सक्षम है। यह समुद्र में तेल फैलने के कारण होने वाले प्रदूषण से निपटने के लिये ‘सीमित प्रदूषण रोधी उपकरण’ ले जाने में भी सक्षम है।

इंटरसेप्टर नौकाएँ (C-450 एवं C-451): 

  • इंटरसेप्टर नौकाओं (C-450 एवं C-451) को हजीरा स्थित ‘लार्सन एंड टुब्रो शिपयार्ड’ द्वारा देश में ही डिज़ाइन एवं निर्मित किया गया हैं और ये नवीनतम नौवहन तथा संचार उपकरणों से सुसज्जित हैं।
  • 30 मीटर लंबी ये नौकाएँ 45 समुद्री मील (नॉट) से भी तेज़ गति से चलने में सक्षम हैं। इन्हें उच्च गति अवरोधन तट के निकट गश्ती एवं कम तीव्रता के समुद्री अभियानों के लिये तैयार किया गया है। 
  • इंटरसेप्टर नौकाओं की त्वरित जवाबी कार्रवाई क्षमता किसी भी उभरती समुद्री परिस्थिति से निपटने और उसे विफल करने की दृष्टि से इसे एक आदर्श प्लेटफॉर्म बनाती है।

महत्त्व:

  • तटरक्षक बल के बेड़े में शामिल होने पर इन पोतों को राष्ट्र के समुद्री हितों की रक्षा के लिये विशेष रूप से ‘विशिष्‍ट आर्थिक क्षेत्र’ (Exclusive Economic Zone) की निगरानी, तटीय सुरक्षा आदि के लिये उपयोग में लाया जाएगा।
  • ये पोत भारतीय प्रधानमंत्री के विज़न ‘सागर’ (क्षेत्र में सभी के लिये सुरक्षा एवं विकास) को आगे बढ़ाते हुए सुरक्षित, संरक्षित एवं स्‍वच्‍छ समुद्र के साथ देश के लिये आर्थिक अवसर प्रदान करेंगे।  

गौरतलब है कि भारतीय तटरक्षक बल विश्व का चौथा सबसे बड़ा तटरक्षक बल है। यह न केवल हमारे समुद्र तट एवं तटीय समुदाय की रक्षा करता है बल्कि आर्थिक गतिविधियों एवं ‘विशिष्‍ट आर्थिक क्षेत्र’ (EEZ) में समुद्री पर्यावरण की भी रक्षा करता है।


इंजेक्टेबल सिल्क फाइब्रोइन-आधारित हाइड्रोजेल

Injectable Silk-Fibroin Based Hydrogel

हाल ही में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science and Technology) के तहत एक स्वायत्त अनुसंधान संस्थान ‘जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च’ (JNCASR) के वैज्ञानिकों ने मधुमेह रोगियों में इंसुलिन वितरण के लिये ‘इंजेक्टेबल सिल्क फाइब्रोइन-आधारित हाइड्रोजेल’ (Injectable Silk-Fibroin Based Hydrogel) विकसित किया है।

Silk-Fibroin

प्रमुख बिंदु: 

  • ‘फाइब्रोइन-आधारित हाइड्रोजेल’ को बायोकंपैटिबल एडिटिव्स (Biocompatible Additives) का उपयोग करके विकसित किया गया है। यह विकसित हाइड्रोजेल मधुमेह रोगियों में इंसुलिन के वितरण को आसान करेगा। इस जेल को पहली बार चूहों में परीक्षण के तौर पर प्रयोग किया गया था जो सफल रहा था। और इसके विवरण को ‘एसीएस एप्लाइड बायो मटेरियल’ (ACS Applied Bio Material) पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।
  • JNCASR के वैज्ञानिकों ने बताया है कि मधुमेह वाले चूहों में उनकी त्वचा के नीचे आईएसएफएच (Injectable SF hydrogel- iSFH) युक्त इंसुलिन के इंजेक्शन ने त्वचा के नीचे सक्रिय डिपो/भंडार का गठन किया जिसमें से इंसुलिन धीरे-धीरे बाहर निकलता है और 4 दिनों की लंबी अवधि के लिये ‘शारीरिक ग्लूकोज़ होमियोस्टेसिस’ (Physiological Glucose Homeostasis) को बहाल रखता है। जिससे रक्त में इंसुलिन की उच्च सांद्रता बढ़ने से रक्त शर्करा के अचानक कम होने का कोई जोखिम नहीं होता है।

फाइब्रोइन:

  • फाइब्रोइन एक अघुलनशील प्रोटीन है। कच्चे रेशम में दो प्रोटीन होते हैं जिन्हें सेरिसिन (Sericin) एवं फाइब्रोइन (Fibroin) कहा जाता है। रेशेदार कृमि द्वारा फाइब्रोइन का उत्पादन किया जाता है। इसमें तीन श्रंखलायें और हल्के एवं भारी ग्लाइकोप्रोटीन होते हैं।

हाइड्रोजेल:

  • एक हाइड्रोजेल बहुलक श्रृंखलाओं का एक नेटवर्क है। ये पॉलीविनाइल अल्कोहल, एक्रिलेट बहुलक (Acrylate Polymers) और सोडियम पॉलीक्रिलेट (Sodium Polyacrylate) एवं सह्बहुलकों (Copolymers) से बने होते हैं।

उल्लेखनीय है कि भारत में मधुमेह से 70 मिलियन से अधिक लोग प्रभावित हैं जो विश्व में दूसरे स्थान पर हैं। मधुमेह शरीर में बीटा कोशिकाओं के नुकसान या इंसुलिन प्रतिरोध के कारण इंसुलिन के अपर्याप्त उत्पादन के परिणामस्वरूप होता है जो ग्लूकोज होमियोस्टेसिस में असंतुलन पैदा करता है और रक्त शर्करा के स्तर में अचानक वृद्धि का कारण बनता है।


अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस-2020 

International Day of Families-2020 

विश्व भर में प्रत्येक वर्ष 15 मई को अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस (International Day of Families) मनाया जाता है।

Families-Day

उद्देश्य:

  • इस परिवार दिवस का उद्देश्य बड़े पैमाने पर परिवार प्रणालियों के लाभों के बारे में जागरूकता फैलाना है।

थीम:

  • अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस-2020 का थीम ‘Families in Development: Copenhagen & Beijing + 25’ है। 
    • गौरतलब है कि कोपेनहेगन घोषणा और ‘बीजिंग प्लेटफ़ॉर्म फॉर एक्शन’ (Copenhagen Declaration and Beijing Platform for Action) की इस वर्ष 25वीं वर्षगांठ है। 

कोपेनहेगन घोषणा और ‘बीजिंग प्लेटफ़ॉर्म फॉर एक्शन’

(Copenhagen Declaration and Beijing Platform for Action):

  • वर्ष 1995 में, बीजिंग और कोपेनहेगन के सम्मेलनों ने हमारे सामाजिक विकास में परिवार एवं इसकी भूमिका के महत्त्व को प्रस्तावित किया और परिवार में सभी व्यक्तियों की भलाई के लिये एक पहल के रूप में अपने विश्वव्यापी मापदंडों को निर्दिष्ट करने पर सहमति व्यक्त की।
  • वर्ष 1995 में कोपेनहेगन में आयोजित सामाजिक विकास के विश्व शिखर सम्मेलन में विश्व के राष्ट्रों ने लोगों को विकास के केंद्र में रखने की आवश्यकता पर एक नई सहमति बनाई और कोपेनहेगन घोषणा को अपनाया।
  • बीजिंग घोषणा, वर्ष 1995 में महिलाओं पर चौथे विश्व सम्मेलन (बीजिंग) के अंत में संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनाया गया एक संकल्प है। यह संकल्प पुरुषों एवं महिलाओं की समानता को बढ़ावा देने पर आधारित था।

इतिहास:

  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने बुनियादी परिवार प्रणाली के महत्त्व को महसूस करते हुए वर्ष 1993 में 15 मई को ‘अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस’ के रूप में घोषित किया और सबसे पहले इसे 15 मई, 1994 को मनाया गया था। परिवार प्रणाली सामाजिक एकजुटता और शांत समाज का सबसे आवश्यक तत्त्व है।

दिबांग बहुउद्देशीय परियोजना

Dibang Multipurpose Project

हाल ही में वन सलाहकार समिति (Forest Advisory Committee) ने एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश में दिबांग परियोजना पर अपना निर्णय टाल दिया है। 

  • गौरतलब है कि इस परियोजना में 6 वर्ष से अधिक की देरी हो चुकी है क्योंकि इस परियोजना के निर्माण की वजह से समृद्ध जैव विविधता वाले क्षेत्र में 1,165 हेक्टेयर जंगल हटाने की आवश्यकता पड़ेगी।

Dibang-Multipurpose

प्रमुख बिंदु:   

  • इसे भंडारण-आधारित जल विद्युत परियोजना के रूप में परिकल्पित किया गया है। जिसका मुख्य उद्देश्य बाढ़ को संतुलित करना है।  
  • यह भारत में निर्मित होने वाली सबसे बड़ी जल विद्युत परियोजना है। इस बांध की ऊँचाई 278 मीटर है और एक बार पूरा होने जाने के बाद यह भारत का सबसे ऊँचा बांध होगा।
  • यह परियोजना अरुणाचल प्रदेश के लोअर दिबांग घाटी ज़िले में दिबांग नदी पर स्थित है।
  • इस परियोजना की आधारशिला 31 जनवरी, 2008 को पूर्व प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह द्वारा रखी गई थी। 

वन सलाहकार समिति (Forest Advisory Committee):

  • वन सलाहकार समिति (FAC) एक शीर्ष निकाय है, जो औद्योगिक गतिविधियों के लिये वनों में पेड़ों की कटाई की अनुमति पर निर्णय लेता है।
  • वन सलाहकार समिति (Forest Advisory Committee-FAC) केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forest and Climate Change-MOEF&CC) के अंतर्गत काम करती है जिसमें केंद्र के वानिकी विभाग के स्वतंत्र विशेषज्ञ और अधिकारी शामिल होते हैं।
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