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रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार 2022

  • 06 Oct 2022
  • 8 min read

कैरोलिन आर. बर्टोजी, के. बैरी शार्पलेस और मोर्टन मेल्डल को 'क्लिक केमिस्ट्री एवं बायोऑथोर्गोनल केमिस्ट्री के विकास के लिये' रसायन विज्ञान में 2022 का नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

  • शार्पलेस (दूसरी बार जीते) ने 'क्लिक केमिस्ट्री' शब्द पर बड़े पैमाने पर काम किया।
  • मेल्डल, ने स्वतंत्र रूप से 'ट्रायज़ोल' नामक एक विशेष रासायनिक संरचना के बारे में खोज की जिसके कई महत्त्वपूर्ण अनुप्रयोग हैं।
  • बर्टोज़ी ने क्लिक प्रतिक्रियाओं को विकसित करने का काम किया जो जीवित जीवों के अंदर काम कर सकते थे, इसे 'बायोऑर्थोगोनल' प्रतिक्रियाएँ (एक शब्द जिसे उन्होंने गढ़ा था) कहा जाता है।
  • रसायन विज्ञान में 2021 का नोबेल पुरस्कार बेंजामिन लिस्ट और डेविड मैकमिलन को असममित ऑर्गेनोकैटलिसिस (Asymmetric Organocatalysis) के विकास के लिये दिया गया।

नोट:

के बैरी शार्पलेस ने "डेवलपिंग द फर्स्ट चिरल कैटेलिस्ट्स" के लिये विलियम एस नोल्स और नोयोरी रयोजी के साथ 2001 का नोबेल पुरस्कार साझा किया था।

क्लिक केमिस्ट्री में नोबेल विजेताओं का योगदान:

  • अवधारणा (शार्पलेस द्वारा द्वारा गढ़ी गई):
    • क्लिक केमिस्ट्री रसायन विज्ञान का एक न्यूनतर रूप है जिसमें आणविक बिल्डिंग ब्लॉक जल्दी और कुशलता से एक साथ स्नैप कर सकते हैं। यह रसायन विज्ञान का एक सरल एवं विश्वसनीय रूप है, जहाँ प्रतिक्रियाएँ जल्दी होती हैं तथा अवांछित उप-उत्पादों से बचा जाता है।
    • क्लिक केमिस्ट्री की अवधारणा वर्ष 2000 के आसपास बैरी शार्पलेस द्वारा गढ़ी गई थी, उन्होंने पाया कि कार्बन परमाणुओं, कार्बनिक पदार्थों के निर्माण खंडों को अणुओं के निर्माण की प्रक्रिया में एक-दूसरे के साथ बंधन के लिये मजबूर करने के बजाय, छोटे अणुओं को पूर्ण कार्बन ढाँचे के साथ जोड़ना आसान है।
    • इसका केंद्रीय विचार उन अणुओं के बीच सरल प्रतिक्रियाओं का चयन करना है जिनके पास एक साथ बंधन के लिये "मज़बूत आंतरिक ड्राइव" है, जिसके परिणामस्वरूप एक तेज़ और कम अपव्ययी प्रक्रिया होती है।
    • महत्त्व: रसायनशास्त्री अक्सर प्रकृति में पाए जाने वाले जटिल रासायनिक अणुओं को फिर से बनाने की कोशिश करते हैं और इसमें अन्य बातों के अलावा चिकित्सा के क्षेत्र में- कोशिकाओं में रोगजनकों को कैसे लक्षित एवं अवरुद्ध किया जाए, जैसे अनुप्रयोग शामिल होते हैं। हालाँकि यह प्रक्रिया जटिल तथा समय लेने वाली हो सकती है।
      • अणुओं के निर्माण के लिये उपयोगी क्लिक केमिस्ट्री के अंतर्गत प्राकृतिक अणुओं की सटीक प्रतियाँ तो नहीं बन सकती हैं, लेकिन उन अणुओं को बनाना संभव होगा जो समान कार्यों को करने में सक्षम हों।
  • एज़ाइड-एल्काइन साइक्लोएडिशन (मेल्डल और शार्पलेस)
    • 2000 के दशक में मेल्डल और शार्पलेस (एक-दूसरे से स्वतंत्र) ने क्लिक केमिस्ट्री में प्रमुख कार्य किया- कॉपर कैटालाइज्ड -एज़ाइड एल्काइन साइक्लोएडिशन।
    • मेल्डल ने पाया कि एल्काइन और एसाइल हैलाइड के बीच होने वाली अभिक्रिया में कॉपर आयनों को जोड़ने से अप्रत्याशित रूप से एक ट्राईज़ोल (एक स्थिर रिंग के आकार की रासायनिक संरचना) बनती है जो फार्मास्यूटिकल्स, डाई और कृषि रसायनों में एक सामान्य विनिर्माण तत्त्व है। कॉपर आयनों को जोड़ने से अभिक्रिया को नियंत्रित करने के साथ एक अन्य तत्त्व बनाने में मदद मिली।
    • एल्काइन और एज़ाइड मिलकर एक ट्राईज़ोल बनाते हैं। एज़ाइड एक N3 (नाइट्राइड आयन) कार्बनिक यौगिक है, जबकि एल्काइन एक हाइड्रोकार्बन है जिसमें कम-से-कम एक कार्बन-कार्बन ट्रिपल बॉण्ड होता है।
      • यह सरल और प्रभावी रासायनिक अभिक्रिया, अब दवाओं के विकास, डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड (डीएनए) की मैपिंग और इस तरह के अन्य उद्देश्य हेतु ऐसी सामग्री बनाने के लिये व्यापक रूप से उपयोग की जाती है।
  • बायोऑर्थोगोनल अभिक्रियाएँ (Bioorthogonal Reactions-Bertozzi):
    • ये अभिक्रियाएँ जीवों के अंदर कोशिका के सामान्य रसायन विज्ञान को बाधित किये बिना काम करती हैं।
    • नैनोटेक्नोलॉजी के संयोजन में इसके उपयोग से बायोमेडिसिन के विभिन्न क्षेत्रों में और विकास हो सकता है, जैसे कि आणविक बायोइमेजिंग, लक्षित वितरण, स्वस्थाने दवा सक्रियण (in situ drug activation), कोशिका-नैनोमटेरियल इंटरैक्शन का अध्ययन, बायोसेंसिंग आदि।
    • बायोऑर्थोगोनल प्रतिक्रियाओं का उपयोग करके शोधकर्त्ताओं ने कैंसर फार्मास्यूटिकल्स के लक्ष्यीकरण में सुधार किया है।

बर्टोज़ी द्वारा कैंसर फाइटिंग क्लिक केमिस्ट्री का विकास:

  • स्पॉटिंग ग्लाइकान:
    • ग्लाइकान पर शोध करते हुए कोशिकाओं की सतह पर पाया जाने वाला परिहारकारी प्रकार का कार्बोहाइड्रेट जो प्रतिरक्षा प्रणाली के लिये महत्त्वपूर्ण है, कैरोलिन आर बर्टोज़ी फ्लोरोसेंट अणुओं को ग्लाइकान से जोड़ना चाहते थे ताकि उन्हें आसानी से देखा जा सके।
      • बर्टोज़ी उसी एज़ाइड में बदल गया जिसका इस्तेमाल शार्पलेस और मेल्डल ने किया था। एज़ाइड न केवल कोशिका के अन्य भागों के साथ अंतःक्रिया करने से बचता है, बल्कि जीवित प्राणियों में भी इसका परिचय सुरक्षित है।
    • वर्ष 2004 में उन्होंने वैकल्पिक क्लिक केमिस्ट्री प्रतिक्रिया विकसित की जो विषाक्त ताँबे के बिना काम करती थी, जिससे यह जीवित कोशिकाओं के लिये सुरक्षित हो जाता है।
    • बर्टोज़ी कार्य का उपयोग ट्यूमर कोशिकाओं की सतह पर ग्लाइकान की पहचान करने और उनके सुरक्षात्मक तंत्र को अवरुद्ध करने के लिये किया जा रहा है जो प्रतिरक्षा कोशिकाओं को अक्षम कर सकते हैं।
      • यह विधि वर्तमान में उन्नत कैंसर वाले लोगों के लिये नैदानिक परीक्षणों में है। शोधकर्त्ताओं ने "क्लिक करने योग्य एंटीबॉडी" को विकसित करना भी शुरू कर दिया है जो ट्यूमर को ट्रैक करने और कैंसर कोशिकाओं में विकिरण को सटीक रूप से वितरित करने में मदद कर सकते हैं।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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