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ऑपरेशन ग्रीन एंड फ्लड

  • 02 Mar 2021
  • 9 min read

इस Editorial में The Hindu, The Indian Express, Business Line आदि में प्रकाशित लेखों का विश्लेषण किया गया है। इस लेख में ऑपरेशन ग्रीन एंड ऑपरेशन फ्लड तथा इससे संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। आवश्यकतानुसार, यथास्थान टीम दृष्टि के इनपुट भी शामिल किये गए हैं।

हाल ही में भारत सरकार ने केंद्रीय बजट 2021 पेश करते हुए घोषणा की कि ऑपरेशन ग्रीन (Operation Green) के अंतर्गत टमाटर, प्याज तथा आलू (TOP) के अलावा जल्दी खराब होने वाले 22 और कृषि उत्पादों को शामिल किया जाएगा।

ऑपरेशन ग्रीन को वर्ष 2018 में लॉन्च किया गया था। योजना के अंतर्गत इस बात पर विचार किया गया था कि "ऑपरेशन फ्लड" (Operation Flood- AMUL मॉडल) की तर्ज पर TOP मामले में भी एक वैल्यू चेन का निर्माण किया जाएगा, जिससे उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर कृषि उत्पाद और किसानों को फसल का एक स्थिर मूल्य प्राप्त होता रहेगा।

शुरुआती समय में OG के तीन प्रमुख उद्देश्य थे- कुशल मूल्य शृंखला का निर्माण, व्यापक मूल्य अस्थिरता और फसल बाद के नुकसान को कम करना।

इस योजना के विश्लेषण से पता चला है कि यह अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने की दिशा में बहुत पीछे है, इसलिये श्वेत क्रांति की सफलता की कहानी को दोहराने के लिये ऑपरेशन फ्लड से बहुत कुछ सीखना होगा।

ऑपरेशन ग्रीन का उद्देश्य

  • मूल्य अस्थिरता: इसमें भारत की तीन सबसे प्रमुख सब्जियों (TOP) के मामले में व्यापक मूल्य अस्थिरता शामिल होनी चाहिये।
    • टमाटर-प्याज-आलू (Tomatoes-Onions-Potato) तीन बुनियादी सब्जियाँ हैं जो अत्यधिक मूल्य अस्थिरता की स्थिति का सामना करती हैं और सरकार अक्सर किसानों के लिये पारिश्रमिक मूल्य तथा उपभोक्ताओं हेतु सस्ती कीमतों को सुनिश्चित करने के अपने दोहरे उद्देश्यों को पूरा करने में खुद को लाचार पाती है।
    • जब कृषि उत्पादों की भरमार के कारण कीमतें अनियंत्रित हो जाती हैं, तो NAFED को मूल्य स्थिरीकरण के लिये बाज़ार में हस्तक्षेप करना पड़ता है। ऐसे में कृषि उत्पाद अधिशेष क्षेत्रों से कुछ अतिरिक्त आवक की खरीद करके उन्हें प्रमुख खपत केंद्रों में संग्रहीत किया जाता है।
  • कुशल मूल्य शृंखला: यह उपभोक्ताओं से प्राप्त धन का एक बड़ा हिस्सा किसानों को देने के उद्देश्य से नए मूल्य-वर्द्धित उत्पादों के लिये कुशल मूल्य शृंखला बनाने की परिकल्पना करता है।
    • इस लक्ष्य को पूरा करने के लिये किसान उत्पादक संगठन (Farmer Producer Organisation- FPO) को सब्सिडी प्रदान करने का प्रावधान है।
  • फसल की कटाई के बाद के नुकसान को कम करना: इसमें आधुनिक वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज और खाद्य प्रसंस्करण समूहों की स्थापना कर फसल के नुकसान को कम किया जाना चाहिये।

ऑपरेशन ग्रीन बनाम ऑपरेशन फ्लड 

  • विजातीय TOP: OG के अंतर्गत प्रत्येक वस्तु का दूध की एकरूपता के विपरीत अपनी अलग विशिष्टता, उत्पादन और खपत चक्र है।
    • TOP सब्जियों की कई किस्में हैं जो विभिन्न जलवायु परिस्थितियों और विभिन्न मौसमों में उगाई जाती हैं, जिससे विपणन हस्तक्षेप (प्रसंस्करण और भंडारण) अधिक जटिल हो जाता है।
  • APMC बैरियर: दूध किसी APMC बैरियर से नहीं गुज़रता है और न ही इसमें कोई कमीशन शामिल होता है, जिससे किसानों को उपभोक्ता के रुपए का 75-80% हिस्सा मिलता है।
    • TOP का ज़्यादातर कारोबार APMC बाज़ारों में होता है, जहाँ इन पर मंडी शुल्क और कमीशन लगाया जाता है, जिससे किसानों को उपभोक्ता के रुपए का एक-तिहाई से भी कम मिल पाता है।

आगे की राह

बागवानी क्षेत्र की विपरीत स्थिति दुग्ध क्षेत्र में देखने को मिलती है। ऑपरेशन फ्लड ने भारत के दूध क्षेत्र को बदल दिया और भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बन गया। इस ऑपरेशन की सफलता को दोहराने के लिये निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:

  • अलग नियमन निकाय: दूध के लिये राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (National Dairy Development Board) की तर्ज पर एक अलग बोर्ड होना चाहिये।
  • नियोजित रणनीति: पहला और सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि ये परिणाम तीन से चार वर्षों में नहीं प्राप्त होते हैं। ऑपरेशन फ्लड लगभग 20 साल तक चला, इससे पहले दूध की मूल्य शृंखला को दक्षता और समावेशिता के ट्रैक पर रखा गया था।
    • इस प्रकार इस योजना को कम-से-कम पाँच साल का समय दिया जाना चाहिये और पर्याप्त परिणाम प्राप्त करने के लिये इसको जवाबदेह बनाया जाना चाहिये।
  • उच्च प्रसंस्करण द्वारा उत्पादन हिस्सेदारी को बढ़ाना: उत्पादन की तुलना में प्रसंस्करण की उच्च हिस्सेदारी के चलते दुग्ध क्षेत्र सबसे कम अस्थिरता वाले क्षेत्रों में शामिल है।
    • AMUL मॉडल किसान सहकारी समितियों से दूध की बड़ी मात्रा में खरीद और प्रसंस्करण, फ्लश सीजन (Flush Season) के दौरान मिल्क पाउडर के रूप में अतिरिक्त दूध का भंडारण तथा लीन सीजन (Lean Season) के दौरान इसका उपयोग करने एवं एक संगठित खुदरा नेटवर्क के माध्यम से दूध के वितरण पर आधारित है।
    • इस प्रकार सरकार को बागवानी क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इसी संदर्भ में कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड के साथ अतिरिक्त 10,000 FPO बनाने के लिये बजट में की गई घोषणा एक सराहनीय कदम है लेकिन इसे तेज़ी से लागू करने की आवश्यकता है।
    • सरकार को शहरी और थोक उपभोक्ताओं के बीच प्रसंस्कृत उत्पादों (टमाटर प्यूरी, प्याज के गुच्छे, पाउडर) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिये उद्योग संगठनों के साथ मिलकर अभियान चलाना चाहिये जैसा कि अंडे के लिये किया गया था।
  • बाज़ार सुधार की आवश्यकता: ऑपरेशन फ्लड की सफलता यह दर्शाती है कि APMC में मौजूदा APMC मंडियों के अनुबंध आदि के बुनियादी ढाँचे का जीर्णोद्धार करने के लिये बाज़ार में सुधार की आवश्यकता है।
    • नए कृषि कानून बाज़ार सुधारों को पूरा करने का इरादा रखते हैं। हालाँकि इसके लिये नीति निर्माण प्रक्रिया में सबसे महत्त्वपूर्ण हितधारकों यानी किसानों को ध्यान में रखना होगा।

निष्कर्ष

ऑपरेशन ग्रीन का उद्देश्य आगामी वर्ष 2022 के अंत तक किसानों की आय को दोगुना करना है। हालाँकि मुख्य चुनौती विपणन सुधारों को संचालित करने की है ताकि ऑपरेशन फ्लड की तर्ज पर ऑपरेशन ग्रीन को फलने-फूलने में सक्षम बनाया जा सके।

अभ्यास प्रश्न: ऑपरेशन फ्लड के समान उपलब्धि हासिल करने में ऑपरेशन ग्रीन के मार्ग में आने वाली बाधाओं का विश्लेषण करें।

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