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भारत में अंगदान: वर्तमान परिदृश्य एवं संभावनाएँ

  • 14 May 2020
  • 18 min read

इस Editorial में The Hindu, The Indian Express, Business Line आदि में प्रकाशित लेखों का विश्लेषण किया गया है। इस लेख में भारत में अंगदान व उससे संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। आवश्यकतानुसार, यथास्थान टीम दृष्टि के इनपुट भी शामिल किये गए हैं।

संदर्भ 

भारत महिर्षि दधीचि जैसे ऋषियों का देश है, जिन्होंने एक कबूतर के प्राणों व असुरों से जन सामान्य की रक्षा के लिये अपना देहदान कर दिया था। परंतु समय के साथ भारत में अंगदान की प्रवृत्ति में गिरावट देखी गई। निश्चित तौर पर अंगदान करके किसी अन्य व्यक्ति की जिंदगी में नई उम्मीदों का सवेरा लाया जा सकता है। इस तरह अंगदान करने से एक प्रेरणादायी शक्ति पैदा होती है, जो अद्भुत होती है। इस तरह की उदारता व्यक्ति की महानता का द्योतक है, जो न केवल आपको बल्कि दूसरे को भी प्रसन्नता प्रदान करती है।

भारत में ही प्रतिवर्ष लगभग 5 लाख लोग अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। प्रत्यारोपण की संख्या और अंग उपलब्ध होने की संख्या के बीच एक बड़ा अंतराल है। अंग दान एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें अंग दाता अंग ग्राही को अंगदान करता है। दाता जीवित या मृत हो सकता है। दान किये जा सकने वाले अंग गुर्दे, फेफड़े, आंख, यकृत, कॉर्निया, छोटी आंत, त्वचा के ऊतक, हड्डी के ऊतक, हृदय वाल्व और शिराएँ  हैं। अंगदान जीवन के लिये अमूल्य उपहार है। अंगदान उन व्यक्तियों को किया जाता है, जिनकी बीमारियाँ अंतिम अवस्था में होती हैं तथा जिन्हें अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है।

इस आलेख में अंगदान, अंगदान के समक्ष चुनौतियाँ, प्रत्यारोपण, भारत में अंगदान के कानूनी पहलू, सरकार के द्वारा अंगदान को बढ़ावा देने में किये जा रहे प्रयास तथा अंगदान कानून की तुलनात्मक समझ पर चर्चा की जाएगी। 

अंगदान से तात्पर्य 

  • अंगदान ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी व्यक्ति (जीवित या मृत, दोनों) से स्वस्थ अंगों और ऊतकों को लेकर किसी अन्य ज़रूरतमंद व्यक्ति के शरीर में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है।
  • प्रत्यारोपित होने वाले अंगों में दोनों गुर्दे (किडनी), यकृत (लीवर), ह्रदय, फेफड़े, आंत और अग्न्याशय शामिल होते हैं। जबकि ऊतकों के रूप में कॉर्निया, त्वचा, ह्रदय वाल्व कार्टिलेज, हड्डियों और वेसेल्स का प्रत्यारोपण होता है। 

अंगदान कौन कर सकता है? 

  • जीवित व्यक्ति के लिये अंगदान के समय न्यूनतम आयु 18 वर्ष होना अनिवार्य है। साथ ही अधिकांश अंगों के प्रत्यारोपण का निर्णायक कारक व्यक्ति की शारीरिक स्थिति होती है, उसकी आयु नहीं।
  • जीवित अंगदाता द्वारा एक किडनी, अग्न्याशय, और यकृत के कुछ हिस्से दान किये जा सकते हैं।
  • कॉर्निया, हृदय वाल्व, हड्डी और त्वचा जैसे ऊतकों को प्राकृतिक मृत्यु के पश्चात् दान किया जा सकता है, परंतु हृदय, यकृत, गुर्दे, फेफड़े और अग्न्याशय जैसे अन्य महत्त्वपूर्ण अंगों को केवल ब्रेन डेड (Brain Death) के मामले में ही दान किया जा सकता है।   
  • कार्डियक डेथ अर्थात प्राकृतिक रूप से मरने वाले का सामान्यतः नेत्र (कॉर्निया) दान किया जाता है।

अंगदान में भारत की स्थिति 

  • भारत में प्रति वर्ष लाखों लोग अंग प्रत्यारोपण का इंतजार करते-करते मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। इसका कारण मांग और दान किये गए अंगों की संख्या के बीच बड़ा अंतराल है।  
  • भारत में अंग प्रत्यारोपण करने की सुविधा अच्छी है लेकिन यहाँ पर अंगदान करने वालों की संख्या बहुत ही कम है। विश्व संदर्भ में देखें तो अंगदान करने के मामले में भारत दुनिया में बेहद पिछड़ा हुआ देश है। यहाँ प्रति दस लाख की आबादी पर केवल 0.16 लोग अंगदान करते हैं। जबकि प्रति दस लाख की आबादी पर स्पेन में 36 लोग, क्रोएशिया में 35 और अमेरिका में 27 लोग अंगदान करते हैं।
  • भारत में ‘ब्रेन डेड’ या ‘मानसिक मृत’ हो चुके लोगों के परिवार जन भी अंगदान करने से बचते हैं जबकि यह निश्चित हो जाता है कि ऐसे लोगों का जीवनकाल बढ़ाना अब संभव नहीं है। यही कारण है कि इस मामले में भी अंगदान बहुत कम हो रहा है। वर्ष 2018 में महाराष्ट्र में 132, तमिलनाडु में 137, तेलंगाना में 167 और आंध्रप्रदेश में 45 और चंडीगढ़ में केवल 35 अंगदान हुए।
  • तमिलनाडु ने बीते कुछ समय में इस क्षेत्र में बेहतर काम किया है। यहाँ प्रत्येक वर्ष लगभग 80 हजार कॉर्निया का अंगदान होता है।
  • दिसंबर 2018 में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा एक प्रश्न के उत्तर में राज्यसभा में यह जानकारी दी गई कि प्रत्येक वर्ष भारत में लगभग 2 लाख गुर्दे, 30 हजार ह्रदय और 10 लाख नेत्र की ज़रूरत है। जबकि केवल ह्रदय 340 और 1 लाख नेत्र यानी कॅर्निया ही प्रतिवर्ष मिल रहे हैं।
  • मार्च 2020 में अंग दान तथा प्रत्यारोपण करने के मामले में महाराष्ट्र ने तमिलनाडु और तेलंगाना को पीछे छोड़ दिया है।

भारत में अंगदान के समक्ष चुनौतियाँ

  • आधारिक संरचना का अभाव: 
    • भारत के सभी अस्पतालों में अंग प्रत्यारोपण संबंधी उपकरणों की व्यवस्था नहीं है। वर्ष 2017 के आँकड़ों के अनुसार, देश में लगभग 301 अस्पताल ऐसे हैं जहाँ अंग प्रत्यारोपण संबंधी उपकरण मौजूद हैं और इनमें से केवल 250 अस्पताल ही राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) के साथ पंजीकृत हैं।
    • उपरोक्त आँकड़े दर्शाते है कि देश में अंग प्रत्यारोपण हेतु लगभग 43 लाख लोगों के लिये ऐसा मात्र 1 ही अस्पताल मौजूद है जहाँ अंग प्रत्यारोपण संबंधी सभी आवश्यक उपकरण मौजूद हैं।   
  • मांग और पूर्ति के बीच अंतर: 
    • आँकड़ों के अनुसार, प्रतिदिन औसतन 150 लोगों का नाम अंग प्रत्यारोपण का इंतज़ार कर रहे लोगों की सूची में जुड़ जाता है। जहाँ एक ओर वर्ष 2017 में तकरीबन 2 लाख लोग किडनी प्रत्यारोपण का इंतज़ार कर रहे थे, परंतु इनमें से केवल 5 प्रतिशत लोगों का ही किडनी प्रत्यारोपण हो पाया था।
    • यह स्थिति तब है जब एक व्यक्ति अंग दान के माध्यम से कुल 8 लोगों की जान बचा सकता है।
    • हालाँकि विगत कुछ वर्षों में अंग दानकर्त्ताओं की संख्या में काफी वृद्धि दर्ज की गई है, परंतु फिर भी यह वृद्धि लगातार बढ़ती अंगदान की मांग को पूरा करने में समर्थ नहीं है।
  • प्रत्यारोपण की उच्च लागत:  
    • भारत में अंग दान करने वालों में अधिकतर मध्यम निम्न वर्ग या निम्न वर्ग के लोग ही होते हैं, परंतु अंग प्राप्त करने वाले लोगों में इस वर्ग का प्रतिनिधित्व काफी कम होता है, जिसका एक सबसे बड़ा कारण प्रत्यारोपण की उच्च लागत को माना जाता है। उल्लेखनीय है कि भारत में अंग प्रत्यारोपण की लागत लगभग 5 से 25 लाख रुपए के आस-पास है, जो कि मध्यम निम्न वर्ग या निम्न वर्ग के लिये काफी बड़ी लागत है। 
  • जागरूकता की कमी:
    • भारत के आम नागरिकों में अंग दान को लेकर उचित शिक्षा और जागरूकता का अभाव है। कई बार यह देखा जाता है कि दूरदराज़ के क्षेत्रों में रहने वाले अंग विफलता से पीड़ित लोगों को अंग दान और अंग प्रत्यारोपण जैसी प्रणाली के बारे में पता ही नहीं होता है जिसके कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
  • सामाजिक मान्यताएँ: 
    • भारत में अधिकांश लोग मृत्यु के बाद जीवन एवं पारलौकिक विश्वासों में जीता है। अतः अंगों में काट-छाँट उन्हें प्रकृति व धर्म के विपरीत लगता है।
    • कुछ लोगों का मानना है कि अंग प्रत्यारोपण की सहमति देने पर अस्पताल के कर्मचारी उनका जीवन बचाने के लिये गंभीरता से प्रयास नहीं करेंगे।  

भारत में अंगदान को बढ़ावा देने में सरकार के प्रयास 

  • मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम,1994: 
    • अंग प्रत्यारोपण में गलत प्रवृत्ति को नियंत्रित करने के लिये सरकार द्वारा वर्ष 1994 में मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम बनाया गया। 
    • इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य चिकित्सीय प्रयोजनों के लिये मानव अंगों के निष्कासन, भंडारण और प्रत्यारोपण को विनियमित करना है। साथ ही यह मानव अंगों के वाणिज्यिक प्रयोग को भी प्रतिबंधित करता है। 
    • इस अधिनियम में किसी गैर-संबंधी (माता-पिता, सगे भाई-बहन, पति-पत्नि के अलावा) के अंग प्रत्यारोपण को गैर-कानूनी घोषित किया गया था। 
    • वर्ष 1999 में इस अधिनियम में संशोधन कर चाचा-चाची, मौसा-मौसी और बुआ आदि को तथा वर्ष 2011 में भावनात्मक लगाव रखने वाले संबंधों को भी मान्यता दी गई।
  • मानव अंग प्रत्यारोपण (संशोधन) अधिनियम, 2011:
    • इस अधिनियम में मानव अंग दान के लिये प्रक्रिया को आसान बनाने के प्रावधान किये गए थे। साथ ही अधिनियम के दायरे को और अधिक व्यापक कर उसमें ऊतकों (Tissues) को भी शामिल कर लिया गया था। 
    • इन प्रावधानों में रिट्रिवल सेंटर और मृतक दानकर्त्ताओं से अंगों के रिट्रिवल के लिये उनका पंजीकरण, स्वैप डोनेशन और अस्पताल के पंजीकृत मेडिकल प्रेक्टिशनर द्वारा अनिवार्य जाँच करना शामिल है।
    • इस अधिनियम में राष्ट्रीय स्तर पर दानकर्त्ताओं और प्राप्तकर्त्ताओं के पंजीकरण का भी प्रावधान है।
  • मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 2014
    • इस अधिनियम के द्वारा अंगदान के कार्य को सहज, सरल और पारदर्शी बनाने तथा नियमों की गलत व्याख्या रोकने के प्रावधान किये गए हैं।
    • यदि अंग दान हासिल करने वाला विदेशी नागरिक हो और दानदाता भारतीय, तो बगैर निकट रिश्तेदारी के प्रत्यारोपण की अनुमति नहीं मिलेगी और इस संबंध में निर्णय प्राधिकार समिति द्वारा लिया जाएगा।
    • जब प्रस्तावित अंग दानकर्त्ता और अंग प्राप्तकर्त्ता करीब संबंधी न हों तो प्राधिकार समिति यह मूल्यांकन करेगी कि अंग दानकर्त्ता और अंग प्राप्तकर्त्ता के बीच किसी भी तरह का व्यावसायिक लेन-देन न हो।  
  • देशभर में अंगदान को बढ़ावा देने के लिये सरकार ने राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम लागू किया है। वहीं ब्रेन डेड व्यक्ति से अंगदान को बढ़ावा देने के लिये भारत सरकार ने अनेक उपाय किये हैं जैसे- नई दिल्ली में राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (National Organ and Tissue Transplant Organisation-NOTTO) और पूरे भारत में सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के लिये 5 अन्य क्षेत्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (Regional Organ and Tissue Transplant Organisation- ROTTO) स्थापित किये हैं, जिनमें से ऐसा ही एक संस्थान पी.जी.आई चंडीगढ़ में स्थापित किया गया है जोकि उत्तरी भारत के 7 राज्यों पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख तथा उत्तराखंड में अंग और ऊतक दान की  निगरानी करता है। 
  • गौरतलब है कि अंगदान करने वाले व्यक्तियों से प्राप्त अंगों को उपयोग के लायक जीवित रखने के लिये राज्यों द्वारा इस संदर्भ में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। तमिलनाडु देश का पहला राज्य है, जिसने इस संदर्भ में कई पहलों की शुरूआत की है, जैसे ब्रेन डेड व्यक्ति का प्रमाणपत्र बनाना, अंग वितरण को सुव्यवस्थित करना और अंगों के आवागमन के लिये हरित कॉरिडोर निर्धारित करना आदि।  

राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन 

  • राष्ट्रीय अंग व ऊतक प्रत्यारोपण संगठन, स्वास्थ्य सेवा निदेशालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन स्थापित एक राष्ट्रीय स्तर का संगठन है।
  • इसमें ‘राष्ट्रीय मानव अंग और ऊतक निष्कासन एवं भंडारण’ तथा ‘राष्ट्रीय बॉयोमैटीरियल केंद्र’ जैसे दो प्रभाग हैं। 
  • यह देश में अंगों और ऊतकों की खरीद के नेटवर्क के साथ-साथ अंगों और ऊतक दान एवं प्रत्यारोपण के पंजीकरण में सहयोग जैसी अखिल भारतीय गतिविधियों के लिये सर्वोच्च केंद्र के तौर पर कार्यरत है।    

आगे की राह

  • अंगदान की मांग और आपूर्ति में बड़ा अंतर सांस्कृतिक मान्यताओं, पारंपरिक सोच और कर्मकाण्डों की वजह से है। ऐसे में डॉक्टरों, गैर-सरकारी संगठनों और समाज सेवियों को अंगदान के महत्त्व के प्रति लोगो को जागरूक करना चाहिये। 
  • सरकार को यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिये कि अंग प्रत्यारोपण की सुविधाएँ समाज के कमज़ोर वर्ग तक भी पहुँच सकें। इसके लिये सार्वजनिक अस्पतालों की अंग प्रत्यारोपण क्षमता में वृद्धि की जा सकती है।  
  • अंग दान के बारे में गलत धारणाओं और मिथकों को दूर करना देश में अंग दान करने वालों की कमी को दूर करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यदि भारत में सड़क दुर्घटनाओं के कारण मरने वालों में से 5 प्रतिशत व्यक्ति भी अंग दान करें तो जीवित व्यक्तियों को अंग दान करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।

प्रश्न- अंगदान से क्या तात्पर्य है? भारत में अंगदान करने के मार्ग में आने वाली चुनौतियों का उल्लेख करते हुए समाधान के उपायों पर चर्चा कीजिये।

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