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याराबुबा क्रेटर

  • 23 Jan 2020
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये:

सबसे पुराना क्षुदग्रह क्रेटर, याराबुबा क्रेटर, व्रेडफोर्ट क्रेटर

मेन्स के लिये:

वैज्ञानिक खोजों का मानव जीवन पर प्रभाव, पृथ्वी की उत्पत्ति से संबंधित मुद्दे

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भू-वैज्ञानिकों ने ऑस्ट्रेलिया में दुनिया के सबसे पुराने क्षुदग्रह क्रेटर याराबुबा क्रेटर (Yarrabubba Crater) की खोज की है जिससे पृथ्वी के हिमयुग से बाहर निकलने से संबंधित जानकारी प्राप्त हो सकती है|

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • याराबुबा क्षेत्र की सतह की जाँच के बाद वैज्ञानिकों का मानना है कि एक क्षुद्रग्रह लगभग 2.2 बिलियन वर्ष पहले पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के याराबुबा में टकराया था|
  • भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि यह घटना उस युग के दौरान एक गर्म घटना के लिये जिम्मेदार हो सकती है। जिसके कारण पृथ्वी जैसे ग्रह हिमयुग से बाहर निकल पाए|
  • यह क्रेटर पृथ्वी पर सबसे पुराना क्रेटर है जो कि दक्षिण अफ्रीका में अवस्थित व्रेडफोर्ट क्रेटर (Vredefort Crater) से लगभग 200 मिलियन वर्ष पुराना है| ध्यातव्य है कि व्रेडफोर्ट दुनिया का अगला सबसे प्राचीन क्रेटर प्रभावित् क्षेत्र है|

इसकी पहचान कैसे की गई?

  • याराबुबा क्रेटर को वर्ष 1979 में खोजा गया था लेकिन भू-वैज्ञानिकों द्वारा इसका पहले परीक्षण नहीं किया गया था|
  • अरबों वर्षों के क्षरण के कारण यह क्रेटर सामान्यतः दिखाई नहीं देता है। वैज्ञानिकों ने इसके 70 किमी (43 मील) व्यास को निर्धारित करने के लिये क्षेत्र के चुंबकीय क्षेत्र को चयनित किया है।
  • इस क्रेटर के बहुत पुराने होने के कारण यहाँ की भौगोलिक स्थिति सपाट है किंतु यहाँ की चट्टानें विशिष्ट हैं जिनके आधार पर इसकी आयु का पता लगाया गया|
  • भूवैज्ञानिकों ने इस प्रभाव के काल की गणना का अनुमान ज़िरकोन (Zircon) और मोनाज़ाइट (Monazite) जैसे खनिजों में आइसोटोपिक क्लॉक (Isotopic Clocks) का उपयोग कर की| चूँकि ये खनिज यूरेनियम की छोटी मात्रा रखते हैं और यूरेनियम सीसा में बदल जाता है|
  • क्षुद्रग्रह हमले उन चट्टानों का तापमान बढ़ाते हैं जो खनिजों को जमा करते हैं जिससे उनकी संचित सीसा खो जाती है तथा इम्पैक्ट के पश्चात पुनः सीसा की मात्रा बढ़ने लगती है| इस प्रकार इन खनिजों में यूरेनियम और सीसा के आइसोटोपों को मापकर प्रभाव के समय का पता लगया गया है|
  • ध्यातव्य है कि ज़िरकॉन और मोनाज़ाइट के क्रिस्टल जो मनुष्य के बाल के बराबर होते हैं, की बनावट से पता चलता है कि वे एक बड़े पैमाने पर क्षुदग्रह के टकराने के प्रभाव से गर्म हो गए थे|
  • याराबुबा प्रभाव पृथ्वी के इतिहास में प्रोटेरोज़ोइक कल्प के दौरान हुआ था|

Crater

(यह वह जिरकॉन क्रिस्टल है जिसकी मदद से याराबुबा क्रेटर की उम्र की जाँच की गई)

इसकी खोज से निकलने वाले निष्कर्ष

  • अध्ययनों में पृथ्वी के इतिहास में कई अवधियाँ पाई गई हैं जिसमें कई महाद्वीपों में एक ही आयु की चट्टानों में हिम अवसाद होते थे। ये अवसाद दुनिया भर में हिमाच्छादित स्थितियों को स्पष्ट करते हैं, इसे अक्सर स्नोबॉल अर्थ (Snowball Earth) घटना के रूप में जाना जाता है।
  • भूगर्भीय साक्ष्यों से स्पष्ट है कि पृथ्वी याराबुबा प्रभाव के दौरान एक बर्फीले चरण में थी। दक्षिण अफ्रीका में चट्टानों के परिक्षण से यह ज्ञात होता है कि इस समय ग्लेशियर मौजूद थे। लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि क्या बर्फ की मात्रा आज के समान थी|
  • पृथ्वी के हिमयुग से बाहर निकलने से संबंधित निष्कर्ष
    • कंप्यूटर मॉडलिंग का उपयोग करते हुए टीम ने गणना की कि क्षुद्रग्रह पृथ्वी के ऊपर फैली एक मोटी बर्फ की चादर से टकराया होगा।
    • अनुमान के अनुसार यदि याराबुबा क्षुद्रग्रह 5 किलोमीटर मोटी बर्फ की चादर से टकराया होगा, तो 200 अरब टन से अधिक जलवाष्प वायुमंडल में उत्सर्जित हुई होगी। जो आज की तुलना में बहुत बड़ा अंश रहा होगा। ध्यातव्य है कि आज के वायुमंडल में जल वाष्प की कुल मात्रा का लगभग 2 प्रतिशत है|
    • जलवाष्प एक हानिकारक ग्रीनहाउस गैस है। वर्तमान में यह सौर विकिरण के लगभग आधे उष्मा अवशोषण के लिए ज़िम्मेदार है। इस प्रकार वायुमंडल में जलवाष्प की अत्यधिक मात्रा के कारण पृथ्वी के तापमान में वृद्धि हुई होगी और हिमयुग का अंत हुआ होगा|

स्रोत: डाउन टू अर्थ

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