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विश्व का पहला आनुवंशिक रूप से संशोधित रबड़: असम

  • 24 Jun 2021
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये:

GM रबड़, रबड़ बोर्ड

मेन्स के लिये:

GM रबड़ की भारत में आवश्यकता, रबड़ के क्षेत्र में भारत की स्थिति, भारत की राष्ट्रीय रबड़ नीति 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में रबड़ अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित विश्व का पहला आनुवंशिक रूप से संशोधित (Genetically Modified- GM) रबड़ संयंत्र असम में स्थापित किया गया।

  • रबड़ संयंत्र इस क्षेत्र के लिये विशेष रूप से विकसित अपनी तरह का पहला संयंत्र है जिसके चलते पूर्वोत्तर क्षेत्र की जलवायु परिस्थितियों में रबड़ के अच्छी तरह से विकसित होने की आशा है।

प्रमुख बिंदु:

GM रबड़ के संदर्भ में:

  • आनुवंशिक संशोधन (GM) प्रौद्योगिकी में प्रयोगशाला तकनीकों का उपयोग कर प्रजातियों के बीच विशिष्ट लक्षणों के लिये जीन को स्थानांतरित किया जाता है।
  • इस रबड़ में मैंगनीज युक्त सुपरऑक्साइड डिसम्यूटेज़ (MnSOD) जीन को अंतर्वेशित कराया गया है जिसके चलते यह उत्तर-पूर्व में शीतऋतु में पड़ने वाली कड़ाके की ठंड का मुकाबला करने में सक्षम होगी।
    • MnSOD जीन में पौधों को ठंड और सूखे जैसे गंभीर पर्यावरणीय स्थितियों के प्रतिकूल प्रभावों से बचाने की क्षमता होती है।
  • आवश्यकता: 
    • प्राकृतिक रबड़ उष्ण आर्द्र अमेज़ॅन वनों की मूल प्रजाति है और पूर्वोत्तर की शीत परिस्थितियों के लिये स्वाभाविक रूप से अनुकूल नहीं है, जो भारत में रबड़ के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है।
    • शीतकाल के दौरान मृदा के लगातार शुष्क बने रहने के कारण रबर के पौधों की वृद्धि रुक जाती है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में रबड़ के पौधों के परिपक्व होने की अवधि लंबी होती है।

प्राकृतिक रबड़:

  • वाणिज्यिक वृक्षारोपण फसल: रबर हेविया ब्रासिलिएन्सिस (Hevea Brasiliensis.) नामक वृक्ष के लेटेक्स से बनाया जाता है। रबर को बड़े पैमाने पर एक रणनीतिक औद्योगिक कच्चे माल के रूप में माना जाता है और इसे रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा तथा औद्योगिक विकास के लिये विश्व स्तर पर विशेष दर्जा दिया गया है।
  • वृद्धि के लिये आवश्यक दशाएँ: यह एक भूमध्यरेखीय फसल है परंतु विशेष परिस्थितियों में इसे उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में भी उगाया जाता है।
    • तापमान: नम और आर्द्र जलवायु के साथ 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान।
    • वर्षा: 200 सेमी. से अधिक।
    • मृदा का प्रकार: अच्छी जल निकासी वाली जलोढ़ मृदा।
    • इस रोपण फसल के लिये कुशल श्रम की सस्ती और पर्याप्त आपूर्ति की आवश्यकता होती है।
  • भारतीय परिदृश्य: 
    • अंग्रेज़ों ने भारत में पहला रबर बागान वर्ष 1902 में केरल में पेरियार नदी के तट पर स्थापित किया था।
    • भारत वर्तमान में उच्चतम उत्पादकता (वर्ष 2017-18 में 694,000 टन) के साथ विश्व में प्राकृतिक रबड़ का छठा सबसे बड़ा उत्पादक है।
    • शीर्ष रबड़ उत्पादक राज्य: केरल > तमिलनाडु > कर्नाटक।
  • सरकारी पहल:  रबड़ प्लांटेशन डेवलपमेंट स्कीम और रबड़ ग्रुप प्लांटिंग स्कीम रबड़ के लिये सरकार के नेतृत्व वाली पहल के उदाहरण हैं।
  • विश्व स्तर पर प्रमुख उत्पादक: थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, वियतनाम, चीन और भारत।
  • प्रमुख उपभोक्ता: चीन, भारत, अमेरिका, जापान, थाईलैंड, इंडोनेशिया और मलेशिया।

भारत की राष्ट्रीय रबड़ नीति:

  • वाणिज्य विभाग द्वारा मार्च 2019 में राष्ट्रीय रबड़ नीति प्रस्तुत की गई थी।
  • इस नीति में प्राकृतिक रबड़ उत्पादन क्षेत्र और संपूर्ण रबड़ उद्योग मूल्य शृंखला का समर्थन करने के लिये कई प्रावधान शामिल हैं।
    • इसमें रबर की नई रोपण और पुनर्रोपण, उत्पादकों के लिये सहायता, प्राकृतिक रबड़ का प्रसंस्करण और विपणन, श्रम की कमी, उत्पादक मंच, बाह्य व्यापार, केंद्र-राज्य एकीकृत रणनीति, अनुसंधान, प्रशिक्षण, रबर उत्पाद निर्माण और निर्यात, जलवायु परिवर्तन संबंधी मुद्दे और कार्बन बाज़ार शामिल हैं
    • यह देश में रबड़ उत्पादकों के सामने आने वाली समस्याओं को कम करने के लिये रबड़ क्षेत्र पर गठित टास्क फोर्स द्वारा चिह्नित अल्पकालिक और दीर्घकालिक रणनीतियों पर आधारित है।
    • मीडियम टर्म फ्रेमवर्क (MTF, वर्ष 2017-18 से 2019-20) में प्राकृतिक रबड़ क्षेत्र का सतत् और समावेशी विकास (Sustainable and Inclusive Development of Natural Rubber Sector) योजना को लागू करके उत्पादकों के कल्याण के लिये प्राकृतिक रबड़ क्षेत्र को विस्तारित करने हेतु रबड़ बोर्ड विकास और अनुसंधान गतिविधियों को संपन्न करता है।
    • विकासात्मक गतिविधियों में रोपण के लिये वित्तीय एवं तकनीकी सहायता, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री की आपूर्ति, उत्पादक मंचों के लिये सहायता, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास कार्यक्रम शामिल हैं।

रबड़ बोर्ड:

  • यह वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है तथा इसका मुख्यालय केरल के कोट्टायम में स्थित है।
  • यह रबड़ से संबंधित अनुसंधान, विकास, विस्तार एवं प्रशिक्षण गतिविधियों को सहायता और प्रोत्साहित करके देश में रबड़ उद्योग के विकास के लिये उत्तरदायी है।
  • रबड़ अनुसंधान संस्थान (Rubber Research Institute) रबड़ बोर्ड के अधीन कार्यरत है।

स्रोत: द हिंदू

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