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जैव विविधता और पर्यावरण

वन्यजीव पैनल का आभासी सम्मेलन

  • 10 Apr 2020
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये:

राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड 

मेन्स के लिये:

पर्यावरण मंज़ूरी प्रक्रिया 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (National Board for Wildlife- NBWL) की स्थायी समिति द्वारा पहली बार वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक की गई। 

मुख्य बिंदु:

  • बैठक में NBWL ने 11 राज्यों से जुड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को मंज़ूरी दी। 
  • वनों या संरक्षित रिज़र्व क्षेत्रों में आने वाली परियोजनाओं को सरकार की 'पर्यावरणीय मंज़ूरी प्रक्रिया' (Environmental Clearance Process- ECP) के एक भाग के रूप में NBWL के अनुमोदन की आवश्यकता होती है।

आभासी सम्मेलन तथा पर्यावरणीय मंज़ूरी:

  • सम्मेलन से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकाँश परियोजनाओं सम्मेलन के माध्यम से स्वीकृति प्रदान की गई, यद्यपि आभासी सम्मेलनों के साथ कुछ समस्याएँ भी जुड़ी होती हैं:
    • आभासी सम्मेलन में प्रस्तावित परियोजनाओं की अवस्थिति को दर्शाने वाले मानचित्रों की जाँच करना मुश्किल होता है, क्योंकि बैठक के कुछ औपचारिक मिनटों में परियोजना का विस्तृत रूप से अवलोकन करना संभव नहीं है। 

पर्यावरण मंज़ूरी प्रक्रिया (ECP):

  • एक परियोजना के लिये पर्यावरण मंज़ूरी प्राप्त करने के लिये एक पर्यावरण प्रभाव आकलन (Environment Impact Assessment- EIA) रिपोर्ट तैयार की जाती है।
  • किसी परियोजना के लिये राज्य नियामकों की मंज़ूरी अथवा अनापत्ति प्रमाण पत्र (No Objection Certificate- NOC) जारी करने से पहले 'जन सुनवाई’ आयोजित की जाती है तथा प्रस्तावित परियोजना क्षेत्र में रहने वाले लोगों की चिंताओं को सुना जाता है।
  • परियोजना को पर्यावरणीय मंज़ूरी के लिये एक आवेदन पत्र को EIA रिपोर्ट के साथ (EIA रिपोर्ट जन सुनवाई संबंधी जानकारी तथा NOC शामिल हो) आगे केंद्र या राज्य सरकार को प्रस्तुत किया जाता है। 
  • अगर परियोजना A श्रेणी की है तो इसे पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forests and Climate Change- MoEFCC) को प्रस्तुत किया जाता है।  
  • अगर परियोजना B श्रेणी की है तो इसे राज्य सरकार को प्रस्तुत की जाती है।
  • A और B श्रेणी की परियोजनाओं की मंज़ूरी के लिये जमा किये गए दस्तावेज़ों का विश्लेषण केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के नियंत्रण में विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (Expert Appraisal Committee- EAC) या संबंधित राज्य पर्यावरणीय प्रभाव आकलन प्राधिकरणों (State Environmental Impact Assessment Authorities- SEIAAs) के द्वारा किया जाता है। 
  • समिति की सिफारिशों को अंतिम अनुमोदन या अस्वीकृति के लिये MoEFCC को भेजा जाता है।

राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड

(National Board for Wildlife- NBWL): 

  • वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम’, 1972 (Wild Life Protection Act, 1972) के तहत वर्ष 2003 में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड का गठन किया गया था। 
  • राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की अध्यक्षता प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है।
  • राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड वन्य पारस्थितिकी से संबंधित मामलों में सर्वोच्च निकाय के रूप में कार्य करता है। यह निकाय वन्य जीवन से जुड़े मामलों तथा राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों के आस-पास निर्माण या अन्य परियोजनाओं की समीक्षा करता है।
  • NBWL की स्थायी समिति (Standing Committee) की अध्यक्षता पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री द्वारा की जाती है। 
    • स्थायी समिति, संरक्षित वन्यजीव क्षेत्रों या इस क्षेत्रों के आसपास के 10 किमी के भीतर आने वाली सभी परियोजनाओं को मंज़ूरी देती है।

स्रोत: द हिंदू

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