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एक्वापोनिक्स: भविष्य का एक विकल्प

  • 10 Aug 2019
  • 7 min read

चर्चा में क्यों?

एक्वापोनिक्स (Aquaponics) पारिस्थितिकी रूप से एक स्थायी मॉडल है जो एक्वाकल्चर (Aquaculture) के साथ हाइड्रोपोनिक्स (Hydroponics) को जोड़ता है।

मुख्य बिंदु

  • एक्वापोनिक्स में एक ही पारिस्थितिकी-तंत्र में मछलियाँ और पौधे साथ-साथ वृद्धि कर सकते हैं।
  • मछलियों का मल पौधों को जैविक खाद्य उपलब्ध कराता है जो मछलियों के लिये जल को शुद्ध करने का कार्य करता है और इस प्रकार एक संतुलित पारिस्थितिकी-तंत्र का निर्माण होता है।
  • तीसरा प्रतिभागी यानि सूक्ष्मजीव या नाइट्राइजिंग बैक्टीरिया मछली के मल में उपस्थित अमोनिया को नाइट्रेट्स में परिवर्तित कर देता है जो कि पौधों की वृद्धि के लिये आवश्यक है।

Aquaponics

हाइड्रोपोनिक्स

(Hydroponics)

  • हाइड्रोपोनिक्स में पौधे मिट्टी के बिना वृद्धि करते हैं जहाँ मिट्टी को पानी द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है।

एक्वाकल्चर प्रणाली

(Aquaculture System)

  • इस प्रणाली के तहत एक प्राकृतिक या कृत्रिम झील, ताज़े पानी वाले तालाब या समुद्र में, उपयुक्त तकनीक और उपकरणों की आवश्यकता होती है।
  • इस तरह की खेती में जलीय जंतुओं जैसे- मछली एवं मोलस्क का विकास, कृत्रिम प्रजनन तथा संग्रहण का कार्य किया जाता है।
  • एक्वाकल्चर एक ही प्रजाति के जंतुओं की बड़ी मात्रा, उनके मांस या उप-उत्पादों के उत्पादन में सक्षम बनाता है।
  • मत्स्य पालन इसका सर्वोत्तम उदाहरण है।

एक्वापोनिक्स के लाभ और खामियाँ

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (Food and Agriculture Organization -FAO) ने वर्ष 2014 में एक तकनीकी शोध-पत्र प्रकाशित किया जिसमें इन प्रयासों के सकारात्मक और नकारात्मक परिणामों पर प्रकाश डाला गया है।

लाभ:

  • उच्च पैदावार (20-25% अधिक) और गुणात्मक उत्पादन।
  • गैर कृषि योग्य भूमि जैसे मरुस्थलीय, लवणीय, रेतीली, बर्फीली भूमि का उपयोग किया जा सकता है।
  • पौधों और मछलियों दोनों का उपयोग उपभोग एवं आय के सृजन में किया जा सकता है।

खामियाँ:

  • मृदा उत्पादन अथवा हाइड्रोपोनिक्स की तुलना में आरंभिक लागत बहुत महँगी है।
  • मछली, बैक्टीरिया और पौधों की जानकारी आवश्यक है।
  • अनुकूलतम तापमान (17-34°C) की आवश्यकता होती है।
  • छोटी-सी गलतियों और दुर्घटनाओं से सारा तंत्र नष्ट हो सकता है।
  • यदि एकल रूप में (यानी एक स्थान पर केवल एक एक्वापोनिक्स) उपयोग किया जाता है तो एक्वापोनिक्स पूर्ण भोजन प्रदान नहीं करेगा।

नाइट्रोजन चक्र:

  • सभी जीवों के जीवन के लिये नाइट्रोजन एक प्राथमिक पोषक तत्त्व है।
  • जीवित प्राणियों में कार्बन, हाइड्रोजन व ऑक्सीजन के अतिरिक्त नाइट्रोजन प्रमुख तत्त्व है। नाइट्रोजन एमीनो अम्लों, प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्लों, वृद्धि नियंत्रकों, पर्णहरितों एवं बहुतायत विटामिनों का संघटक है। मृदा में उपस्थित सीमित नाइट्रोजन के लिये पादप सूक्ष्म जीवों से प्रतिस्पर्द्धा करते हैं, अतः नाइट्रोजन प्राकृतिक एवं कृषि पारितंत्र के लिये नियंत्रक पोषक तत्त्व है।
  • नाइट्रोजन गैस का बड़ी मात्रा में रूपांतरण निम्न क्रियाविधि के अनुसार होता है:
    • नाइट्रोजन स्थिरीकरण Nitrogen fixation (nitrogen gas to ammonia),
    • नाइट्रोजनीकरण Nitrification (ammonia to nitrite and nitrate),
    • विनाइट्रीकरण Denitrification (nitrate to nitrogen gases)
  • नाइट्रोजन में दो नाइट्रोजन परमाणु शक्तिशाली त्रिसहसंयोजी आबंध से जुड़े रहते हैं, N≡N नाइट्रोजन (N2) के अमोनिया में बदलने की प्रक्रिया को नाइट्रोजन स्थिरीकरण कहते हैं।
  • प्रकृति में बिजली चमकने से और पराबैंगनी विकिरणों द्वारा नाइट्रोजन को नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO2) में बदलने के लिये ऊर्जा प्राप्त होती है।
  • औद्योगिक दहन, जंगल में लगी आग, वाहनों का धुंआ तथा बिजली उत्पादन केंद्र भी वातावरणीय नाइट्रोजन ऑक्साइड के स्रोत हैं। मृत पादपों व जंतुओं में उपस्थित कार्बनिक नाइट्रोजन का अमोनिया में अपघटन अमोनीकरण कहलाता है। इसमें से कुछ अमोनिया वाष्पीकृत होकर पुनः वायुमंडल में लौट जाती है, लेकिन अधिकांश मृदा में उपस्थित सूक्ष्मजीवों द्वारा निम्न अनुसार नाइट्रेट में बदल दी जाती है:

नाइट्रोजनीकरण

(Nitrification)

  • नाइट्रोजनीकरण वह प्रक्रिया है जो अमोनिया को नाइट्राइट और फिर नाइट्रेट में परिवर्तित करती है।
  • अधिकांश नाइट्रोजनीकरण वायवीय रूप से होते हैं और नाइट्रोजनीकरण के दो अलग-अलग चरण होते हैं जो विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीवों द्वारा संपन्न होते हैं।
  • पहला चरण अमोनिया का नाइट्राइट में ऑक्सीकरण है, जो कि अमोनिया ऑक्सीकारक माइक्रोव्स द्वारा किया जाता है।
  • नाइट्रोजनीकरण में दूसरा चरण नाइट्राइट (NO2-) का नाइट्रेट (NO3-) में ऑक्सीकरण है। यह कदम प्रोकैरियोट्स (एक एककोशिकीय जीव) से पूरी तरह से अलग समूह द्वारा किया जाता है, जिसे नाइट्राइट-ऑक्सीकरण बैक्टीरिया के रूप में जाना जाता है।

स्रोत: द हिंदू

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