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भारतीय अर्थव्यवस्था

व्यय अनुपात क्या है?

  • 24 Sep 2019
  • 3 min read

चर्चा में क्यों?

सेबी ने पिछले वर्ष ओपन एंडेड इक्विटी योजनाओं के लिये अधिकतम कुल व्यय अनुपात (Total Expense Ratio) को 2.75% से कम करते हुए 2.25% कर दिया था।

प्रमुख बिंदु

  • म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) के तहत निवेश करने पर एसेट्स मैनेजमेंट कंपनी द्वारा वार्षिक निधि परिचालन व्यय (Annual Fund Operating Expense) के रूप में कुछ राशि काट ली जाती है। जिसे कुल व्यय अनुपात कहते हैं।
  • कुल व्यय अनुपात के अंतर्गत प्रबंधकीय, प्रशासनिक व अन्य खर्चों को शामिल किया जाता है।
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिये KYC (Know Your Client) की आवश्यकताओं पर एच.आर. खान समिति की सिफारिशों को व्यापक स्तर पर स्वीकार करते हुए सेबी ने ओपन एंडेड इक्विटी योजनाओं के लिये कुल व्यय अनुपात को कम किया था।

ओपन एंडेड इक्विटी स्कीम: म्यूचुअल फंड के तहत दो तरह की योजनाएँ शामिल की जाती हैं-

  • ओपन एंडेड इक्विटी स्कीम।
  • क्लोज़ एंडेड इक्विटी स्कीम।

जहाँ क्लोज़ एंडेड इक्विटी स्कीम की परिपक्वता अवधि (Maturity Period) निर्धारित होती है तथा निर्धारित समय-सीमा के बाद इसे तरलता (liquidity) रूप प्रदान किया जा सकता है, वहीं ओपन एंडेड स्कीम की कोई परिपक्वता अवधि नहीं होती है, इसे कभी भी भुनाया जा सकता है और तरलता (liquidity) के रूप में प्राप्त किया जा सकता है।

इस कदम के निहितार्थ

  • ‘व्यय अनुपात’ विक्रय प्रतिशत के सापेक्ष कुल व्यक्तिगत व्यय या कुल लागत को व्यक्त करता है अर्थात् कुल व्यय अनुपात जितना कम होगा, निवेशक के लाभ में उतनी ही वृद्धि होगी।
  • कुल व्यय अनुपात से सक्रीय रूप से प्रबंधित फंड और निष्क्रिय रूप से प्रबंधित फंड के मध्य अंतर को स्पष्ट किया जा सकेगा।
  • निवेशकों को निवेश करते हेतु प्रोत्साहन मिलेगा व म्यूचुअल फंड के माध्यम से पूंजी जुटाने में आसानी होगी।
  • ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस की स्थिति बेहतर हो सकेगी।
  • नियामक के अनुसार व्यय अनुपात कम होने से निवेशकों को कमीशन में 1300 करोड़ से 1500 करोड़ रुपए की बचत होगी।

स्रोत: द हिंदू

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