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भारतीय मौसम पर एक विहंगम दृष्टि

  • 09 Jan 2020
  • 4 min read

प्रीलिम्स के लिये:

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग

मेन्स के लिये:

चरम मौसमी घटनाओं के दुष्प्रभाव

चर्चा में क्यों ?

हाल ही में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 में भारत वर्षा, चक्रवात, शीत और उष्णता जैसी चरम मौसमी घटनाओं से अत्यधिक प्रभावित रहा। वर्ष 2019 में औसत तापमान में वृद्धि वर्ष 2016 के बाद से सबसे कम थी, बावजूद इसके वर्ष 1901 के सापेक्ष वर्ष 2019 सातवाँ सबसे उष्ण वर्ष रहा।

प्रमुख बिंदु:

Killer-extrema

  • वर्ष 2019 में 'भारत की जलवायु पर वक्तव्य' नामक शीर्षक के एक मौसम संबंधी संक्षिप्त विवरण में IMD ने यह बताया कि बारिश और बाढ़ के कारण लगभग 849 लोगों की मृत्यु हो गई, जिसमें बिहार सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्य है।
  • दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) और पूर्वोत्तर मानसून (अक्तूबर से दिसंबर) दोनों में ही वर्षा की मात्रा लंबी औसत अवधि (Long Period Average) का 109 प्रतिशत रही।
  • रिपोर्ट के अनुसार, औसत तापमान सामान्य से 0.36 डिग्री अधिक रहा जिससे वर्ष 2019 सातवाँ सबसे उष्ण वर्ष रहा जबकि विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार, वर्ष 2019 में (जनवरी से अक्तूबर) वैश्विक औसत सतह तापमान में वृद्धि + 1.10 डिग्री सेल्सियस थी।
  • IMD के अनुसार, वर्ष 2019 भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों पर आने वाले चक्रवातों की संख्या के लिये भी असाधारण रहा।
  • विशेष रूप से, अरब सागर ने वर्ष के दौरान बंगाल की खाड़ी की तुलना में अधिक चक्रवाती तूफानों की बारंबारता को महसूस किया। 117 वर्षों के बाद दूसरी बार ऐसी स्थिति है जब अरब सागर ने चक्रवातों की तीव्रता और बारंबार आवृत्ति को महसूस किया।
  • भारतीय उपमहाद्वीप में बर्फीले तूफानों के प्रवेश के कारण वर्ष 2018-19 की शीत अवधि में उत्तरी गोलार्द्ध का मौसम सर्वाधिक सर्द रहा। जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख में हिमस्खलन की घटनाओं के कारण लगभग 51 लोगों की मृत्यु हुई ।
  • चरम मौसमी घटनाओं से कृषि को अत्यधिक नुकसान पहुँचा तथा लोगों को अपने स्थान से विस्थापित भी होना पड़ा ।
  • चरम मौसमी घटनाओं ने महामारियों की व्यापकता में वृद्धि की तथा लोगों को आर्थिक रूप से कमज़ोर भी किया।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग

  • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की स्थापना वर्ष 1875 में की गई थी। स्वतंत्रता के बाद 27 अप्रैल, 1949 को यह विश्व मौसम विज्ञान संगठन का सदस्य बना ।
  • यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत एक प्रमुख एजेंसी है।
  • इसका प्रमुख कार्य मौसम संबंधी भविष्यवाणी व प्रेक्षण करना तथा भूकंपीय विज्ञान के क्षेत्र में शोध करना है।
  • इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
  • IMD के छह प्रमुख क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र हैं, जो क्रमशः चेन्नई, गुवाहाटी, कोलकाता, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली में स्थित है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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