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जीव विज्ञान और पर्यावरण

वायनाड आर्द्रभूमि पक्षी गणना

  • 13 Jan 2020
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये:

वायनाड आर्द्रभूमि पक्षी गणना, एशियन वॉटर-बर्ड सेंसस

मेन्स के लिये:

वायनाड आर्द्रभूमि पक्षी गणना का महत्त्व।

चर्चा में क्यों ?

11-12 जनवरी, 2020 को सामाजिक वानिकी वायनाड (Social Forestry Wayanad), ह्यूम सेंटर फॉर इकोलॉजी ( Hume Centre for Ecology-HCE), वाइल्ड लाइफ बायोलॉजी (Wildlife Biology) और कॉलेज ऑफ वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज (College of Veterinary and Animal Sciences-CVAS), पूकोड ( Pookode) द्वारा संयुक्त रूप से वायनाड आर्द्रभूमि पक्षी गणना (Wayanad Wetland Bird Count) केरल के वायनाड ज़िले में संपन्न हुई।

गणना के आयोजक :

इस गणना का आयोजन, एशियाई वॉटर-बर्ड जनगणना (Asian Waterbird Census-AWC) के तहत सिटिजन साइंस वेंचर (Citizen Science Venture- CSV) द्वारा किया गया।

प्रमुख बिंदु :

  • इस गणना में वायनाड ज़िले के प्रमुख आर्द्रभूमि पारिस्थितिक तंत्रों से जुड़े जलप्रपातों को शामिल कर स्थानिक और प्रवासी दोनों प्रकार के पक्षियों को शामिल किया गया।
  • इसमें कबीना नदी के तट पर स्थित पमामराना आर्द्रभूमि क्षेत्र (Pamamaraan wetlands on the banks of the Kabani river ) मनंथवादी के पास स्थित अरतुथारा धान के खेत (Arattuthara paddy field near Mananthavadi ), राज्य की दूसरी सबसे बड़ी मीठे पानी की झील- पूकोड झील (Pookode lake ), वायनाड वन्यजीव अभयारण्य में स्थित अमावयाल और गोलूर (Ammavayal and Golur inside the Wayanad Wildlife Sanctuary) तथा बाणासुर सागर एवं करपुझा जलाशयों के जल क्षेत्र (water belt areas of Banasura Sagar and Karapuzha reservoirs ) को शामिल किया गया है।
  • इस दौरान एक पक्षी पहचान कार्यशाला कार्यक्रम का आयोजन 11 जनवरी, 2020 को आयोजित किया गया।

गणना के लाभ:

  • वार्षिक घटना से उत्पन्न डेटा का आधार पर जलवायु और पारिस्थितिक तंत्र परिवर्तनों के चलते पक्षियों की आबादी में होने वाले बदलावों को समझने में मदद मिलती है जिससे वैश्विक प्रयासों को बढ़ाने में मदद मिलती हैं।
  • आर्द्र्भूमि पारिस्थितिकी किसी क्षेत्र के जल संसाधनों को बनाए रखने तथा कृषि उत्पादन प्रणालियों की जीवन रेखा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

एशियाई जलीय पक्षी गणना:

  • एशियाई जलपक्षी गणना (Asian WaterBirds Census-AWC) एक अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम है जो जल पक्षियों और आर्द्रभूमि की स्थिति की निगरानी पर केंद्रित है।
  • इसका उद्देश्य जल पक्षियों के संरक्षण और आर्द्रभूमि से संबंधित मुद्दों पर जन जागरूकता में वृद्धि करना है।
  • भारत में, AWC को बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) और वेटलैंड्स इंटरनेशनल द्वारा वार्षिक रूप से आयोजित किया जाता है।
  • यह पक्षी गणना वैश्विक परियोजना ‘द इंटरनेशनल वॉटर बर्ड सेंसस प्रोग्राम’ का एक अभिन्न अंग है।
  • इसका आयोजन हर साल जनवरी में किया जाता है। इसके तहत एशिया और ऑस्ट्रेलिया में हज़ारों स्वयंसेवक अपने देश की आर्द्रभूमि का भ्रमण कर जलपक्षियों/वाटरबर्ड्स की गणना करते हैं।
  • एशियन वॉटर बर्ड सेंसस को अफ्रीका, एशिया, पश्चिम एशिया, नियोट्रोपिक और कैरेबियन में अंतर्राष्ट्रीय वॉटर बर्ड जनगणना के अन्य क्षेत्रीय कार्यक्रमों के समानांतर आयोजित किया जाता है। भारतीय उपमहाद्वीप में AWC की शुरुआत वर्ष 1987 में की गई थी।

स्रोत: द हिंदू

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