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डेली अपडेट्स

अंतर्राष्ट्रीय संबंध

अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की रिपोर्ट

  • 30 Apr 2020
  • 7 min read

प्रीलिम्स के लिये:

अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग

मेन्स के लिये:

भारत में धार्मिक स्वतंत्रता से संबंधित मुद्दे 

चर्चा में क्यों?

अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (United States Commission on International Religious Freedom-USCIRF) की वर्ष 2020 की वार्षिक रिपोर्ट में भारत को ‘कंट्रीज़ ऑफ पर्टिकुलर कंसर्न’ (प्रमुख चिंता वाले देशों) (Countries Of Particular Concern-CPC) की श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है।

प्रमुख बिंदु:

  • उल्लेखनीय है कि धार्मिक आज़ादी के मामले में भारत को चीन, उत्तर कोरिया, पाकिस्तान और सउदी अरब जैसे देशों की श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है।
    • ध्यातव्य है कि वर्ष 2019 में भारत को ‘टियर 2 कंट्री’ (Tier 2Country)  की श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया था। 
  • गौरतलब है कि वर्ष 2004 के बाद से यह पहली बार है जब भारत को इस श्रेणी में रखा गया है।
  • USCIRF द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में नागरिकता संशोधन अधिनियम (Citizenship Amendment Act), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (National Register of Citizens- NRC) और जम्मू और कश्मीर की स्थितियों से संबंधित मुद्दों को केंद्र में रखा गया है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने मज़बूत बहुमत का उपयोग कर भारत में धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करने वाली राष्ट्रीय-स्तर की नीतियों का निर्माण किया है।
  • USCIRF की समिति के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकारों ने धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ उत्पीड़न और हिंसा के राष्ट्रव्यापी अभियानों को जारी रखने की अनुमति  साथ ही द्वेषपूर्ण भाषण देने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
  • रिपोर्ट में अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम (International Religious Freedom Act- IRFA) के तहत भारत के खिलाफ कड़ी करवाई करने का सुझाव दिया गया है।
  • रिपोर्ट में अमेरिकी प्रशासन से भारत सरकार की एजेंसियों पर लक्षित प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया गया है साथ ही मानवाधिकार के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघन के लिये ज़िम्मेदार अधिकारियों को अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगाने का सुझाव भी दिया है। 
    • ध्यातव्य है कि वर्ष 2002 में गुजरात में दंगों के मद्देनज़र USCIRF ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री को अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया था। 
  • समिति के 10 सदस्यों में से 3 सदस्य इस रिपोर्ट से असहमत हैं।

भारत का पक्ष:

  • भारत सरकार ने USCIRF की रिपोर्ट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे "पक्षपाती" करार दिया है, साथ ही इसके अवलोकनों को खारिज कर दिया है।
  • भारत सरकार के आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार, USCIRF की वार्षिक रिपोर्ट में भारत पर की गई टिप्पणियों को अस्वीकार किया गया है। 
  • भारत सरकार के अनुसार, USCIRF की रिपोर्ट पक्षपातपूर्ण है और भारत के खिलाफ टिप्पणी करना कोई नई बात नहीं है। 
  • विदेश मंत्रालय ने USCIRF के बयान को गलत बताते हुए खारिज कर दिया और भारत के आंतरिक मामलों में अमेरिकी निकाय की दखलंदाज़ी को लेकर सवाल उठाया है। 

अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम

(International Religious Freedom Act-IRFA):

  • अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 1998, 105वीं अमेरिकी कॉन्ग्रेस (वर्ष 1997-99) द्वारा पारित किया गया था और 27 अक्तूबर, 1998 को तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन द्वारा हस्ताक्षरित किये जाने के साथ ही कानून के रूप में लागू हुआ। यह विदेशों में धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के संदर्भ में अमेरिका द्वारा व्यक्त चिंताओं का विवरण है।
  • इस अधिनियम के निम्नलिखित उद्देश्य हैं:
    • संयुक्त राज्य अमेरिका की विदेश नीति के तहत अमेरिकी पक्ष का मज़बूती से समर्थन करना।
    • विदेशों में धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के जवाब में संयुक्त राज्य की कार्रवाई को अधिकृत करना।
    • डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता के लिये राजदूत नियुक्त करना।

अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग

(United States Commission on International Religious Freedom-USCIRF):

  • USCIRF एक सलाहकार और परामर्शदात्री निकाय है, जो अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता से संबंधित मुद्दों पर अमेरिकी कॉंग्रेस और प्रशासन को सलाह देता है।
  • USCIRF स्वयं को अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम (International Religious Freedom Act-IRFA) द्वारा स्थापित एक स्वतंत्र, अमेरिकी संघीय आयोग के रूप में वर्णित करता है।

स्रोत: द हिंदू

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