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जैव विविधता और पर्यावरण

यूनाइटेड किंगडम की ‘जेट ज़ीरो ’ योजना

  • 15 Jun 2020
  • 8 min read

प्रीलिम्स के लिये:

जेट ज़ीरो काउंसिल, उड्डयन क्षेत्र से जुड़े प्रदूषक 

मेन्स के लिये:

उड्डयन क्षेत्र तथा प्रदूषण की समस्या 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ‘यूनाइटेड किंगडम’ (United Kingdom) ने उड्डयन क्षेत्र में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के उद्देश्य से 'जेट ज़ीरो' (Jet Zero) योजना पर कार्य करने की घोषणा की है।

प्रमुख बिंदु:

  • यूनाइटेड किंगडम ने वर्ष 2050 तक देश को 'शुद्ध-शून्य अर्थव्यवस्था' (Net-Zero Economy) बनाने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान पहल इसी का एक भाग है।
  • इस पहल का मुख्य उद्देश्य अटलांटिक पारगमनीय उड़ानों को कार्बन-मुक्त बनाना है। 

जेट ज़ीरो पहल का उद्देश्य:

  • जेट ज़ीरो योजना पर कार्य करने के लिये 'जेट ज़ीरो काउंसिल' (Jet Zero Council) का गठन किया गया है। जिसका उद्देश्य निम्नलिखित लक्ष्यों को प्राप्त करना है:
    • विभिन्न हितधारकों यथा उड्डयन क्षेत्र से जुड़े लोगों, पर्यावरण समूहों तथा सरकार के नेताओं को एक साथ लाना; 
    • COVID-19 महामारी के बाद उड्डयन क्षेत्र में हरित पहल को पुन: प्रारंभ करना;
    • उड्डयन क्षेत्र में भविष्य की उड़ानों में 'शुद्ध शून्य उत्सर्जन' (Net Zero Emissions) को संभव बनाना। 

GHGs उत्सर्जन में योगदान:

  • वर्ष 2018 में उड्डयन क्षेत्र का कुल CO2 उत्सर्जन में योगदान 2.4 प्रतिशत था। हालाँकि यह उत्सर्जन मात्रा अन्य औद्योगिक क्रियाओं की तुलना में कम प्रतीत होती है परंतु कुल वैश्विक तापन में वाणिज्यिक उड्डयन क्षेत्र का योगदान 5 प्रतिशत है। 
  • यात्री परिवहन का GHGs उत्सर्जन में 81 प्रतिशत तथा माल परिवहन का शेष 19 प्रतिशत योगदान है।

प्रमुख उत्सर्जक: 

  • वाणिज्यिक उड्डयन के जलवायु परिवर्तन पर प्रभाव प्रक्रिया बहुत जटिल हैं। इन उत्सर्जकों की मात्रा तथा प्रभवा सतह से उच्च ऊँचाई से साथ-साथ भिन्न-भिन्न देखने को मिलता है।
  • कार्बन डाइऑक्साइड (CO2 ):
    • कुल उड्डयन उत्सर्जकों में CO2 का लगभग 70 प्रतिशत योगदान है तथा ‘वैश्विक तापन’ पर धनात्मक प्रभाव उत्पन्न करती है।
  • जलवाष्प:
    • जलवाष्प दूसरा प्रमुख उत्सर्जक है जो जेट ईंधन की खपत से उत्पन्न होता है। ये जलवाष्प शीघ्र ही  'हिम क्रिस्टल' के नाभिक का निर्माण करते हैं। जिससे सिरस (Cirrus) बादलों का निर्माण होता है।
    • ये सिरस बादल अवरक्त किरणों को अवशोषित करते हैं जिससे CO2 की तुलना में 3 गुना अधिक तापन प्रभाव पड़ता है।
  • नाइट्रस गैस:
    • नाइट्रस गैसें शीतलन तथा तापन दोनों प्रभाव उत्पन्न करती हैं। नाइट्रोजन ऑक्साइड रासायनिक क्रिया द्वारा ओजोन का निर्माण करते हैं, जो वैश्विक तापन प्रभाव उत्पन्न करती है। दूसरी तरफ यह मीथेन से क्रिया करके उसकी मात्रा को कम करती है जिससे शीतलन प्रभाव उत्पन्न होता है। हालाँकि नाइट्रस गैसों का शुद्ध प्रभाव ‘वैश्विक तापन’ है।

कणकीय पदार्थ:

  • कणकीय पदार्थों में हाइड्रोकार्बन, कालिख और सल्फेट्स शामिल हैं। सल्फेट्स सूर्य की किरणों को परावर्तित करके शीतलन प्रभाव दर्शाते हैं। कालिख ऊष्मा को अवशोषित करते हैं तथा नाभिकीय क्रिस्टल के रूप में कार्य करके वातावरण में हिम का निर्माण करते हैं।

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उड्डयन उत्सर्जन का विनियमन:

  • इंजनों की प्रमाणीकरण आवश्यकताओं के माध्यम से उड्डयन संचालन से उत्पन्न उत्सर्जन को विनियमित किया जाता है। वर्ष 2016 में अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) ने दो स्तरीय योजना के माध्यम से नवीन विमानों के लिये CO2 उत्सर्जन मानकों की स्थापना की है। 
    • प्रथम स्तरीय मानक उन विमानों पर लागू किया गया है, जिनका पहले से निर्माण किया जा चुका है या जिनका निर्माण कार्य जारी है। 
    • दूसरे स्तर के मानक जो अधिक कठोर होंगे उन्हे वर्ष 2020 तक व्यावसायिक जेट तथा वर्ष 2023 तक बिज़नेस जेट के संबंध में लागू किया जाएगा।

जेट ज़ीरो पहल का महत्त्व:

  • यू.के. के पास विमानन क्षेत्र में 'सतत् उड्डयन ईंधन' (Sustainable Aviation Fuels) के उत्पादन तथा विद्युत आधारित उड्डयन सेवा में एक अग्रणी सेवा प्रदाता बनने का अवसर है। 
  • ब्रिटेन में वर्तमान में कुछ कंपनियाँ ‘विमानन जैव ईंधन संयंत्र’ के निर्माण की दिशा में भी कार्य कर रही है। अत: ब्रिटेन के समक्ष ‘विमानन जैव ईंधन’ में प्रमुख प्रौद्योगिकी निर्यातक देश बनने का अवसर है। 

संभावित चुनौतियाँ:

  • विमानन क्षेत्र का कुल वैश्विक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में लगभग 2% योगदान है, तथा वर्ष 2005 के बाद से इस क्षेत्र में GHGs के उत्सर्जन में 70% तक वृद्धि देखी गई है।
  • 'अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन संगठन' (International Civil Aviation Organization) के अनुसार इस विमानन क्षेत्र में उत्सर्जन गतिविधियों को कम करने की दिशा में आवश्यक उपायों को नहीं अपनाया गया तो वर्ष 2050 तक कार्बन उत्सर्जन वर्तमान स्तर से 300% अधिक हो जाएगा।

अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन

(International Civil Aviation Organisation-ICAO):

  • यह संयुक्त राष्ट्र (United Nations-UN) की एक विशिष्ट एजेंसी है, जिसकी स्थापना वर्ष 1944 में राज्यों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन अभिसमय (शिकागो कन्वेंशन) के संचालन तथा प्रशासन के प्रबंधन हेतु की गई थी।
  • इसका एक उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय हवाई परिवहन की योजना एवं विकास को बढ़ावा देना है ताकि दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन की सुरक्षित तथा व्यवस्थित वृद्धि सुनिश्चित हो सके।
  •  इसका मुख्यालय मॉन्ट्रियल, कनाडा में है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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