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वर्दीधारी बल और मानसिक स्वास्थ्य

  • 07 Sep 2022
  • 7 min read

मेन्स के लिये:

वर्दीधारी बल, सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेपों में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे।

चर्चा में क्यों?

सरकार को वर्दीधारी सेवाओं में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के समाधान के लिये तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।

वर्दीधारी बलों में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों की व्यापकता के कारण:

  • कठोर संरचित पदानुक्रम:
    • वर्दीधारी बलों को एक कमांड-एंड-कंट्रोल पदानुक्रम प्रणाली के साथ कठोर रूप से संरचित किया जाता है।
    • एक वरिष्ठ अधिकारी अपने तत्काल कनिष्ठ के लिये रिपोर्टिंग प्राधिकारी होता है और इस कनिष्ठ को अपने कार्यों को उसके आदेश के तहत जनशक्ति के साथ पूरा करना होता है।
    • इसमें पदानुक्रम का शायद ही कभी उल्लंघन किया जाता है और प्रणाली अनुशासन, भूमिकाओं की स्पष्टता और जवाबदेही सुनिश्चित करती है।
    • हालाँकि यह अमानवीय हो जाता है, विशेषकर उन लोगों के लिये जो व्यक्तिगत मुद्दों पर उचित संवाद नहीं कर पाते हैं।
  • तनाव-प्रबंधन पर ध्यान न देना:
    • मानसिक तनाव का सामना कर रहे लोगों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता है।
    • समस्या को व्यक्त करने वालों लोगों को कमज़ोर व्यक्ति घोषित कर दिया जाता है।
    • एक वर्दीधारी पेशे में अधीनस्थ कर्मचारी कमज़ोर नहीं दिखना चाहते हैं क्योंकि यह उनके कार्य से असंगत छवि का निर्माण करता है।
  • उनकी उपलब्धियों के लिये कम सम्मान:
    • राज्य पुलिस और CAPFs में कांस्टेबुलरी का लगभग 85% हिस्सा है।
    • ये कर्मी अपने वरिष्ठों के निर्देशानुसार अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं।
    • वे ज़्यादातर अपनी उपलब्धियों के लिये कम सम्मान और विफलता के लिये अधिक उत्पीड़न के साथ लगातार संगठन की भूमिका में रहते हैं।
  • मद्यपान की ओर रुझान :
    • व्यवस्था में अनेक की कठिनाईयों से निपटने के लिये कर्मी अक्सर शराब और नशीली दवाओं के उपयोग का सहारा लेते हैं।
    • ऐसे मामलों में पकड़े जाने पर कानून के अनुसार दंडित किया जाता है और उपयुक्त विभागीय कार्रवाई भी की जाती है।

बलों के बीच बढ़ते मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों का प्रभाव:

  • युवा पीढ़ी हतोत्साहित होगी:
    • सशस्त्र बलों की अच्छी छवि और इस तथ्य के बावज़ूद कि यह एक बहुत ही सम्मानजनक कार्य है, बलों के बीच बढ़ते मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे युवा पीढ़ी को इसमें शामिल होने से हतोत्साहित कर सकते हैं।
  • बलों का मनोबल कमज़ोर होगा:
    • बलों के बीच बढ़ते मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे उन्हें हतोत्साहित कर सकते हैं और उनके दैनिक कार्यों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
  • आत्महत्या के बढ़ते मामले :
    • यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया (USI) के एक अध्ययन के निष्कर्षों के अनुसार, किसी भी दुश्मन या आतंकवादी गतिविधियों की तुलना में आत्महत्या, भ्रातृघात और अप्रिय घटनाओं के कारण सेना के अधिक जवानों को अपनी जान गंँवानी पड़ रही है।

आगे की राह:

  • काम करने की अच्छी स्थितियाँ: काम करने की स्थिति, छुट्टी, भत्ते और आवास को पात्रता के रूप में प्रदान किया जाना चाहिये।
  • अंतर्निहित मुद्दों की पहचान करें:
    • असंगत लोगों को हटाकर अंतर्निहित मुद्दों वाले लोगों की पहचान की जानी चाहिये और एक अलग दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिये।
    • यहीं से पुलिस नेतृत्व की भूमिका सामने आती है।
    • ज़रूरत एक ऐसी कार्यप्रणाली विकसित करने की है जो कर्मियों को व्यक्तिगत संतुष्टि प्रदान करे तथा मानसिक तनाव एवं बीमारी की संभावना को कम करे।
  • उचित संचार तंत्र:
    • पुलिस नेताओं के रूप में सभी रैंकों के साथ संचार बढ़ाने तथा कर्मचारियों की भलाई के लिये अनुशासन के प्रवर्तन को साथ-साथ चलाने की आवश्यकता है।
    • नियमित संपर्क सभा आयोजित करने की आवश्यकता है जहाँ कार्मिक अपनी शिकायतों को प्रसारित कर सकें तथा सभी संभावित मुद्दों पर उचित अनुवर्ती कार्रवाई की जा सके।
    • कार्यालय 24/7 सभी रैंकों के लिये खुला होना चाहिये।
    • इसके अतिरिक्त, मैदान पर यादृच्छिक निरीक्षण के दौरान, ड्यूटी पर कर्मियों के साथ मैत्रीपूर्ण संचार अनुशासन को प्रभावित नहीं पहुँचाती है - यह केवल नेतृत्व और कर्तव्य के प्रति समर्पण में उसका विश्वास बढ़ाता है।
  • पुरस्कार और सम्मान:
    • पुरस्कार और मान्यता बड़े प्रेरक के रूप में कार्य करते हैं। अक्सर, प्रोत्साहन प्रणाली संगठन की प्रमुख कल्पना पर होती है।
    • इसे उचित व्यवस्था का औपचारिक रूप दिया जाना है साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रम संकट के दौरान एक-दूसरे का समर्थन करने वाले कर्मियों के बीच सौहार्द बढ़ाते हैं।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्षों के प्रश्न (PYQ):

प्रश्न. सकारात्मक अभिवृत्ति एक लोक सेवक  अनिवार्य विशेषता माना जाती है जिसे प्राय: नितान्त दबाव में कार्य करना पड़ता है। एक व्यक्ति की सकारात्मक अभिवृत्ति में क्या योगदान देता है? (2020))

प्रश्न. "हम बाहरी दुनिया में तब तक शांति प्राप्त नहीं कर सकते जब तक हम अपने भीतर शांति प्राप्त नहीं कर लेते।" - दलाई लामा (2021)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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