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शासन व्यवस्था

‘यू.के. इंडिया एजुकेशन एंड रिसर्च इनिशिएटिव’

  • 27 Feb 2020
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये:

यू.के. इंडिया एजुकेशन एंड रिसर्च इनिशिएटिव, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग

मेन्स के लिये:

भारतीय विश्वविद्यालयों में उच्च एवं मध्यम स्तरीय प्रशासन

चर्चा में क्यों?

हाल ही में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा ‘यू.के इंडिया एजुकेशन एंड रिसर्च इनिशिएटिव’ (UK India Education and Research Initiative-UKIERI) के तत्त्वावधान में ‘प्रशासकों के लिये उच्च शिक्षा नेतृत्व विकास कार्यक्रम’ (Higher Education Leadership Development Programme for Administrator) प्रारंभ किया गया है।

मुख्य बिंदु:

  • विश्वविद्यालय अनुदान आयोग इस कार्यक्रम का संचालन विश्व स्तर पर संस्थागत विशेषज्ञता और नेतृत्व उत्कृष्टता में मान्यता प्राप्त संस्थान यू..के. स्थित ‘एडवांस एचई’ (Advance HE) के साथ प्रशिक्षण भागीदार के रूप में करेगा, इसे भारत में ब्रिटिश काउंसिल द्वारा संचालित किया जा रहा है।
  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय विश्वविद्यालयों में उच्च और मध्यम स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों के लिये नेतृत्व विकास कार्यक्रम संचालित करना है।

कार्यक्रम के बारे में?

  • इस कार्यक्रम के अंतर्गत यू.के. के प्रशिक्षकों द्वारा दो कार्यशालाएँ आयोजित की जाएंगी, जिनके माध्यम से रजिस्ट्रार और संयुक्त/उप/ सहायक रजिस्ट्रार स्तर के 300 शैक्षणिक प्रशासकों को प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि उन्हें उच्च शिक्षा संस्थानों में व्यावसायिक परिवर्तन लाने के लिये सक्षम बनाया जा सके।
  • इस कार्यक्रम को भविष्य में स्थायी रूप से लागू करने के लिये 300 प्रतिभागियों में से 30 संभावित नेतृत्व विकास कार्यक्रम प्रशिक्षकों को चुना जाएगा और अन्य प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करने के लिये अतिरिक्त प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कार्यक्रम के निहितार्थ:

  • यह एक अनूठा कार्यक्रम है जो भारतीय विश्वविद्यालयों के मध्य और उच्च स्तर के पदाधिकारियों में नेतृत्व क्षमता बढ़ाने के महत्त्वपूर्ण पहलुओं को प्रोत्साहन प्रदान करेगा।
  • यह कार्यक्रम शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिये संस्थागत विकास की दिशा में सरकारों की प्रतिबद्धता सुनिश्चित करते हुए एक उपयुक्त कदम उठाने में सहायता करेगा।
  • यह कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय स्तर की उच्च शिक्षा समावेशी प्रणालियों को ग्रहण करने के लिये प्रोत्साहित करेगा तथा ऐसे वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास करेगा जो यू.के. और भारत में आर्थिक एवं सामाजिक विकास का समर्थन करते हैं।
  • यह कार्यक्रम प्रशासकों के लिये उनके प्रदर्शन और क्षमताओं को बेहतर बनाने हेतु एक प्रेरक के रूप में कार्य करेगा, जिसके परिणामस्वरूप भारत में संस्थागत ढाँचा मज़बूत होगा तथा और विश्वविद्यालयों की प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।
  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य वरिष्ठ और मध्यम स्तर के अकादमिक प्रशासकों को प्रशिक्षित करना है ताकि वे भारत के विश्वविद्यालयों में नए दृष्टिकोण, क्षमता, उपकरण और कौशल का प्रयोग करके प्रणालीगत बदलाव ला सकें।
  • ‘प्रशासकों के लिये उच्च शिक्षा नेतृत्व विकास कार्यक्रम’ विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक अधिकारियों की प्रभावशीलता सुनिश्चित करता है।

भारत में उच्च शिक्षा संबंधी समस्याएँ:

  • भारत में उच्च शिक्षा की खराब स्थिति को निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर समझा जा सकता है-
    • भारत में उच्च शिक्षा में नामांकन दर अत्यंत कम है।
    • उच्च शिक्षण संस्थानों में मानव संसाधन की भी अत्यधिक कमी है।
    • बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप भारत में उच्च शिक्षा का पाठ्यक्रम नहीं बदला गया है।
    • इन संस्थानों में स्वायत्तता की कमी है।
    • शोध कार्यों का स्तर निम्न है।

आगे की राह:

‘प्रशासकों के लिये उच्च शिक्षा नेतृत्व विकास कार्यक्रम’ के अतिरिक्त यह आवश्यक है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नियामक संस्थाओं को मज़बूत और पारदर्शी बनाया जाए तथा भारत में शिक्षा के बजट में वृद्धि करने के साथ-साथ स्कूली शिक्षा को भी स्तरीय बनाया जाए, तभी भारत की उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बनाया जा सकेगा।

स्रोत-पीआईबी

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