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ट्राइब्स इंडिया ने दी अहमदाबाद, उदयपुर और कोलकाता हवाई अड्डों पर आउटलेट खोलने की मंज़ूरी

  • 24 Aug 2018
  • 4 min read

चर्चा में क्यों?

भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण ने ट्राइब्स इंडिया के आउटलेट खोलने के लिये अहमदाबाद, उदयपुर और कोलकाता हवाई अड्डे पर जगह आवंटित की है।

प्रमुख बिंदु

  • इसके अलावा देहरादून, वाराणसी, पुणे, गोवा, कोयंबटूर, लखनऊ, अमृतसर और गंगटोक में अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों पर ट्राइब्स इंडिया के आउटलेट की स्थापना के लिये जगह की पेशकश की गई है।
  • इन हवाई अड्डों पर जनजातियों के लिये ट्राइब्स इंडिया की उपस्थिति न केवल जनजातीय उत्पादों का विपणन करने का एक अच्छा अवसर प्रदान करेगा बल्कि लक्षित ग्राहकों के बीच एक ब्रांड के रूप में "ट्राइब्स इंडिया" को पहचान दिलाने में भी सहायक होगा।
  • गौरतलब है कि जुलाई 2017 की तुलना में ट्राइफेड ने अब तक 89 आउटलेट्स का नेटवर्क स्थापित किया है जिसमें उसके स्वयं के 42 बिक्री आउटलेट्स, 33 माल बिक्री आउटलेट्स और देश भर में स्थित 14 फ़्रैंचाइजी आउटलेट्स शामिल हैं।

ट्राइफेड (TRIFED)

  • बहुराज्यीय सहकारी समिति अधिनियम, 1984 के तहत राष्ट्रीय स्तर के शीर्षस्थ निकाय के रूप में वर्ष 1987 में भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास ‘ट्राइफेड’ (Tribal Co-Operative Marketing Development Federation of India Ltd. - TRIFED) की स्थापना की गई।
  • बहुराज्यीय सहकारी समिति अधिनियम, 2007 के अधिनियमित होने के बाद ट्राइफेड को इस अधिनियम में पंजीकृत कर इसे राष्ट्रीय सहकारी समिति के रूप में अधिनियम की दूसरी अनुसूची में अधिसूचित किया गया।
  • यह संगठन विपणन विकास और उनके कौशल तथा उत्पादों के निरंतर उन्नयन के माध्यम से देश के जनजातीय समुदायों के आर्थिक विकास को बढ़ावा देने का प्रयास करता है।
  • इसके मुख्य साधनों में क्षमता निर्माण, आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण प्रदान करना, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में ब्रांड निर्माण और सतत आधार पर विपणन के अवसरों के लिये विपणन संभावनाओं की खोज करना शामिल है।
  • अतः कहा जा सकता है कि ट्राइफेड का एकमात्र उद्देश्य जनजातीय समाज के बहु-आयामी परिवर्तन और उनकी मौजूदा छवि की धारणा में बदलाव लाना है।

जनजातीय कारीगर मेला (टीएएम) क्या है?

  • ट्राइफेड द्वारा टीएएम का आयोजन जनजातीय उत्पादकों के माध्यम से तैयार किये गए उत्पादों को विस्तार देने के लिये राज्यों/ ज़िलों/ गाँवों में सोर्सिंग स्तर पर नए कारीगरों की पहचान के लिये किया जाता है।
  • उल्लेखनीय है कि जुलाई 2018 में उदयपुर (राजस्थान) और क्योझर(ओडिशा) में 2 टीएएम आयोजित किये गए थे, जहाँ  120 कारीगरों ने भाग लिया और अपने शिल्प का प्रदर्शन किया था।
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