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क्या है ग्रीष्म अयनांत का मतलब?

  • 22 Jun 2018
  • 4 min read

संदर्भ

हर साल 21 जून को ग्रीष्म अयनांत या संक्रांति (Summer Solstice) होती है। उत्तरी गोलार्द्ध में इस दिन रात की तुलना में दिन अधिक बड़ा होता है, साथ ही यह वर्ष का भी सबसे बड़ा दिन होता है। शीतकालीन अयनांत या संक्रांति 21 या 22 दिसंबर को होती है, इस तिथि को दिन की तुलना में रात अधिक बड़ी होती है। आखिर क्या कारण है कि दिन और रात रोज़ बराबर नहीं होते हैं?

क्या है कारण दिन और रात की अवधि में अंतर का?

  • इस प्रश्न का स्पष्टीकरण पृथ्वी के झुकाव में निहित है क्योंकि हमारी पृथ्वी की धुरी 23.5 डिग्री के कोण पर झुकी हुई है। 
  • पृथ्वी के घूर्णन और कक्षा जैसे कारकों के साथ यह झुकाव संयुक्त रूप से वर्ष के विभिन्न दिनों में किसी भी स्थान पर पड़ने वाली सूर्य की रोशनी की अवधि में विविधता का कारण बनता है। 
  • पृथ्वी के अक्ष पर यह झुकाव विभिन्न मौसमों के लिये भी ज़िम्मेदार है।

दिन तथा रात

  • पृथ्वी का जो भाग सूर्य के सामने पड़ता है वहाँ पर दिन होता है। पृथ्वी के घूर्णन के साथ यह स्थिति परिवर्तित होती रहती और इसी कारण जो स्थान सूर्य की रोशनी की विपरीत दिशा में होता हैं वहाँ रात होती है। 
  • भूमध्य रेखा पर दिन और रात दोनों बराबर होते हैं। जैसे-जैसे ध्रुवों की ओर बढ़ते जाते हैं,  दिन और रात की अवधि के बीच का अंतर भी बढ़ता जाता है। 
  • ग्रीष्म ऋतु के दौरान दोनों गोलार्द्धों के ध्रुवीय भागों पर महीनों तक 24 घंटे सूर्य का प्रकाश पड़ता है जिससे वहाँ लगातार छः महीने तक दिन होता है, इसके विपरीत सर्दियों के दौरान इन क्षेत्रों में महीनों तक अंधेरा व्याप्त रहता है।

मुख्य अक्षांश

  • अक्षांश भूमध्य रेखा से किसी स्थान की दूरी का एक मापक है। पृथ्वी का झुकाव कुछ परिचित काल्पनिक रेखाओं को परिभाषित करने में मदद करता है, यह झुकाव संक्रांति को निर्धारित करने के लिये भी महत्त्वपूर्ण हैं। 
  • 23.5 डिग्री अक्षांश (झुकाव के समान) पर भूमध्य रेखा के उत्तर और दक्षिण में क्रमशः कर्क और मकर रेखाएँ हैं। 
  • 66.5 डिग्री उत्तर और दक्षिण में क्रमशः उत्तर और दक्षिण ध्रुव वृत्त स्थित हैं। भूमध्य रेखा से 66.5 डिग्री से अधिक अक्षांश पर (किसी भी दिशा में) दिन या रात लगातार बने रहते हैं।

अयनांत या संक्रांति

  • प्रत्येक उष्णकटिबंध पर, वर्ष में एक बार दोपहर के समय सूर्य का प्रकाश लम्बवत् पड़ता है। 
  • जब यह कर्क रेखा के उष्णकटिबंध पर होता है, तो उत्तरी गोलार्द्ध में इसे ग्रीष्मकालीन संक्रांति के नाम से जाना जाता है। 
  • मकर रेखा के उष्णकटिबंध में होने पर पर शीतकालीन संक्रांति होती है। भूमध्य रेखा पर सूर्य इन दोनों तिथियों को लम्बवत् होता है। 
  • मार्च में इसे वसंत विषुव और अगस्त में शरद ऋतु विषुव के नाम से जाना जाता है।
  • पूरी पृथ्वी पर ये दो दिन ऐसे हैं जब दिन और रात बराबर अवधि के होते हैं। भूमध्य रेखा पर दिन और रात हमेशा बराबर होते हैं।
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