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जैवविविधता और पर्यावरण

क्लाइमेट ब्रेकथ्रू समिट

  • 29 May 2021
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये

ग्रीन हाइड्रोजन, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, COP 26, रेस टू ज़ीरो अभियान, जलवायु  महत्त्वाकांक्षी गठबंधन

मेन्स के लिये

ज़ीरो-कार्बन अर्थव्यवस्था की भूमिका, क्लाइमेट ब्रेकथ्रू समिट की विशेषताएँ एवं महत्त्व, पेरिस समझौते की भूमिका, ग्लोबल क्लाइमेट एक्शन की साझेदारी

चर्चा में क्यों?

हाल ही में विश्व के राष्ट्रों के नेताओं ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों (स्टील, शिपिंग, ग्रीन हाइड्रोजन और प्रकृति सहित) में प्रगति का प्रदर्शन करने के लिये क्लाइमेट ब्रेकथ्रू समिट की बैठक बुलाई।

प्रमुख बिंदु 

परिचय:

  • यह वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, मिशन पॉसिबल पार्टनरशिप, यूनाइटेड नेशंस क्लाइमेट चैंपियंस और यूनाइटेड किंगडम (COP 26 प्रेसीडेंसी) के बीच एक सहयोग है।
  • इसका उद्देश्य ज़ीरो-कार्बन अर्थव्यवस्था के लिये वैश्विक पहुँच बढ़ाने हेतु संरचनात्मक परिवर्तन की आवश्यकता को प्रदर्शित करना है।
    • ‘ज़ीरो-कार्बन अर्थव्यवस्था’ न्यून ऊर्जा खपत और न्यून प्रदूषण के आधार पर हरित पारिस्थितिक अर्थव्यवस्था को संदर्भित करती है, जहाँ उत्सर्जन की आपूर्ति ग्रीनहाउस गैसों (नेट-ज़ीरो) के अवशोषण और उन्हें हटाने से होती है।
  • इसके प्रमुख अभियानों में से एक 'रेस टू ज़ीरो' (Race to Zero) अभियान है जो 708 शहरों, 24 क्षेत्रों, 2,360 व्यवसायों, 163 निवेशकों और 624 उच्च शिक्षण संस्थानों को एक सतत् भविष्य के लिये ज़ीरो-कार्बन रिकवरी की ओर ले जाने के लिये समर्थन जुटाता है।

शिखर सम्मेलन की मुख्य विशेषताएँ:

  • संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन को सुरक्षित करने और वर्ष 2050 तक वैश्विक ताप वृद्धि को औद्योगिक-पूर्व के तापमान स्तर की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लक्ष्य को पूरा करने हेतु समन्वित कार्रवाई का आह्वान किया।
  • मर्स्क (Maersk), विश्व की सबसे बड़ी कंटेनर शिपिंग लाइन और पोत संचालक है जो वर्ष 2030 तक उत्सर्जन को आधा करने की प्रतिबद्धता के साथ रेस टू ज़ीरो अभियान में शामिल हो गया।
  • विश्व भर से 40 स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों ने 2030 तक उत्सर्जन को आधा करने और 2050 तक नेट ज़ीरो तक पहुँचने के लिये स्वयं को प्रतिबद्ध किया है।
    • ये 40 संस्थान करीब 18 देशों में 3,000 से अधिक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • इस तरह की विभिन्न कंपनियों और संस्थानों के परिवर्तन को क्षेत्रीय-व्यापक  योजनाओं (Sector-Wide Plans) द्वारा समर्थित किया जा रहा है, जो संशोधित जलवायु कार्ययोजना के मार्ग (Climate Action Pathways) में परिलक्षित होता है, जिसे ग्लोबल क्लाइमेट एक्शन के लिये मराकेश (Marrakech) पार्टनरशिप के साथ लॉन्च किया गया है।
    •  क्लाइमेट एक्शन पाथवे वर्ष 2050 तक 1.5 डिग्री सेल्सियस तक दुनिया की पहुँच स्थापित करने के लिये क्षेत्रीय दृष्टिकोण निर्धारित करते हैं, जो देशों और गैर-राज्य नेतृत्वकर्त्ताओं  को समान रूप से 2021, 2025, 2030 और 2040 तक ज़ीरो-कार्बन वाला विश्व तैयार करने हेतु आवश्यक कार्यों की पहचान करने में मदद करने के लिये एक रोडमैप प्रदान करते हैं।

महत्त्व:

  • भारी उद्योग  (एल्यूमीनियम, कंक्रीट एवं सीमेंट, रसायन, धातु-खनन, प्लास्टिक तथा स्टील) और हल्के उद्योग (उपभोक्ता वस्तु, फैशन, आईसीटी और मोबाइल तथा खुदरा वस्तु) दोनों को तकनीकी और आर्थिक रूप से डीकार्बोनाइज (Decarbonizing) करना सुनियोजित है। 
  • जहाँ प्रत्यक्ष उत्सर्जन में कमी नहीं की जा सकती है वहाँ इसकी सामग्री और ऊर्जा के उपयोग में कमी करके उत्सर्जन को कम किया जा सकता है जिससे उनकी उत्पादकता में वृद्धि होगी और प्राकृतिक जलवायु समाधान जैसे परिवर्तनशील समाधानों को लागू करते हुए उत्पादन प्रक्रियाओं को डीकार्बोनाइज़ किया जा सकेगा।  

ग्लोबल क्लाइमेट एक्शन के लिये मराकेश (Marrakech ) पार्टनरशिप

  • यह जलवायु परिवर्तन पर कार्यरत रहने वाली सरकारों और शहरों, क्षेत्रों, व्यवसायों तथा निवेशकों के बीच सहयोग स्थापित करके पेरिस समझौते के कार्यान्वयन का समर्थन करता है।
  • 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान के लक्ष्य को  प्राप्त करने और जलवायु-तटस्थ तथा लचीले विश्व बनाने के लिये सभी हितधारकों की उच्च महत्त्वाकांक्षा को बढ़ावा देने हेतु सामूहिक रूप से प्रयास किये जा रहे हैं जिसमें पर्यावरण, आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

 रेस टू ज़ीरो अभियान (Race to Zero Campaign)

  • संयुक्त राष्ट्र समर्थित रेस टू ज़ीरो अभियान में गैर-राज्य अभिनेताओं (कंपनियां, शहर, क्षेत्र, वित्तीय और शैक्षणिक संस्थान ) को शामिल किया गया है। इसके अंर्तगत वर्ष 2030 तक वैश्विक उत्सर्जन को आधा करने और एक स्वस्थ, निष्पक्ष, ज़ीरो-कार्बन विश्व प्रदान करने के लिये कठोर और तत्काल कार्रवाई करने की आवश्यकता है। 
  • रेस टू ज़ीरो राष्ट्रीय सरकारों के बाहरी  नेतृत्वकर्त्ताओं को जलवायु महत्त्वाकांक्षी गठबंधन (Climate Ambition Alliance) में शामिल होने के लिये एकत्रित करता है।

जलवायु  महत्त्वाकांक्षी गठबंधन (Climate Ambition Alliance)

  • जलवायु महत्त्वाकांक्षी गठबंधन (CAA) में वर्तमान में 120 राष्ट्र और कई अन्य निजी भागीदार शामिल हैं जो वर्ष 2050 तक नेट-ज़ीरो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये प्रतिबद्ध है।
  • हस्ताक्षर करने वाले राष्ट्र या निजी भागीदार दुनिया भर में वर्तमान में उत्सर्जित ग्रीनहाउस-गैस  के 23% और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में 53% के लिये  ज़िम्मेदार हैं।
  • भारत इस गठबंधन का अंग नहीं है।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

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