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जैवविविधता और पर्यावरण

प्रथम वर्चुअल पीटर्सबर्ग जलवायु संवाद

  • 29 Apr 2020
  • 8 min read

प्रीलिम्स के लिये:

पीटर्सबर्ग जलवायु संवाद, COP- 26, पोस्ट- 2020 जलवायु कार्रवाई, प्री- 2020 जलवायु कार्रवाई

मेन्स के लिये:

UNFCCC की भूमिका 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत ने प्रथम ‘वर्चुअल पीटर्सबर्ग जलवायु संवाद’ (Virtual Petersburg Climate Dialogue- VPCD) में 30 देशों के साथ जलवायु परिवर्तन से संबंधित मामलों पर विचार-विमर्श किया। 

मुख्य बिंदु:

  • VPCD ‘पीटर्सबर्ग जलवायु संवाद’ का ग्‍यारहवाँ सत्र है।
  • प्रथम VPCD में भारत का प्रतिनिधित्व केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री ने किया है।

पीटर्सबर्ग जलवायु संवाद

(Petersberg Climate Dialogue- PCD): 

  • पृष्ठभूमि:
    • ‘पीटर्सबर्ग जलवायु संवाद’ (Petersberg Climate Dialogue- PCD) को वर्ष 2010 में जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल की पहल पर प्रारंभ किया गया था।
    • वर्ष 2009 में कोपेनहेगन जलवायु वार्ता के प्रभावी निष्कर्ष पर नहीं पहुँचने के बाद से PCD को प्रारंभ किया गया। 
    • यह प्रथम वर्चुअल जलवायु संवाद, पीटरबर्ग जलवायु संवाद का 11 वाँ सत्र था, जिसकी मेजबानी वर्ष 2010 से जर्मनी द्वारा की जा रही है।
    •  इस संवाद की प्रमुख विशेषता यह है कि UNFCCC के आगामी सम्मेलन की अध्यक्षता करने वाला देश PCD की सह-मेजबानी करता है।
  • PCD का लक्ष्य एवं उद्देश्य:
    • PCD का लक्ष्य मंत्रियों के बीच घनिष्ठ और रचनात्मक संवाद के लिये एक मंच प्रदान करना था।
    • PCD जलवायु के संबंध में अंतरराष्ट्रीय विचार विमर्श और जलवायु संबंधी कार्रवाई की उन्नति पर केंद्रित अनौपचारिक उच्च-स्तरीय राजनीतिक चर्चाओं हेतु एक मंच प्रदान करता है।

11वाँ पीटर्सबर्ग जलवायु संवाद:

  •  11 वें ‘पीटर्सबर्ग जलवायु संवाद’ की सह-अध्यक्षता जर्मनी और  ब्रिटेन द्वारा की गई है। 
    • यहाँ ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि ब्रिटेन ‘संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन’ (United Nations Framework Convention on Climate Change (UNFCCC) के आगामी कॉन्फ्रेंस ऑफ़ पार्टीज़- 26 (Conference of Parties 26- COP 26) का अध्‍यक्ष है। 
  • संवाद में लगभग 30 देशों के मंत्रियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

संवाद का मुख्य एजेंडा:

  • वर्चुअल संवाद का मुख्य उद्देश्य इस बात पर चर्चा करना था कि सामूहिक लोचशीलता को संवर्द्धित  करने तथा जलवायु परिवर्तन कार्यवाई की दिशा में कैसे कार्य किया जाए।  
  • असहाय लोगों की सहायता करते हुए COVID-19 महामारी के बाद अर्थव्‍यवस्‍थाओं और समाजों में उत्पन्न चुनौतियों का सामूहिक रूप से  कैसे सामना किया जाए।

संवाद का महत्त्व:

  • यह संवाद इसलिये महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसका आयोजन ऐसे समय में किया जा रहा है जहाँ एक तरह विश्व COVID-19 महामारी से जूझ रहा है वहीं दूसरी तरफ UNFCCC के तहत अपनाए गए ‘पेरिस समझौते’ पर वर्ष 2020 के बाद (Post-2020 Period) अपनाई जाने वाली रणनीति की तैयारी कर रहा है।

संवाद में भारत द्वारा रखे गए पक्ष:

  • पर्यावरण संबंधी प्रौद्योगिकी तक सभी की मुक्‍त रूप से तथा किफायती कीमत पर उपलब्‍धता होनी चाहिये।
  • विकासशील विश्‍व को तत्‍काल प्रभाव से 1 ट्रिलियन डॉलर अनुदान देने की योजना तैयार करनी चाहिये।
  • विश्‍व को सतत् जीवन शैलियों की आवश्‍यकता के अनुरूप उपभोग की ज्‍यादा टिकाऊ परिपाटियों को अपनाने पर विचार करना चाहिये।
  • नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग में तेज़ी लाने और नवीकरणीय ऊर्जा तथा ऊर्जा दक्षता क्षेत्र में पर्यावरण के अनुकूल नए रोज़गारों को सृजित करने पर बल देने की आवश्यकता है।

2020 से पहले के शमन प्रयास (Mitigation efforts prior to pre-2020):

  • वर्ष 2012 में क्योटो प्रोटोकॉल की दूसरी प्रतिबद्धता अवधि (वर्ष 2013-2020 की अवधि) के लिये क्योटो प्रोटोकॉल में संशोधन किया गया। जिसे दोहा संशोधन के रूप में जाना जाता है। इसमें प्रोटोकॉल के पक्षकार विकसित देशों के लिये क्योटो प्रोटोकॉल की दूसरी प्रतिबद्धता अवधि के तहत परिमाणित उत्सर्जन सीमा या कटौती प्रतिबद्धताओं को शामिल किया गया।

प्री- 2020 जलवायु कार्रवाई (Pre-2020 Climate Action):

  • पेरिस जलवायु समझौते को अपनाने के बाद, वर्ष 2016 से 2020 की अवधि के लिये उत्सर्जन को कम करने वाले देशों का समर्थन करने की दिशा में कार्य करना।

पोस्ट- 2020 UNFCCC:

  • वर्ष 2020 के बाद की व्यवस्था जो कि ‘दीर्घकालिक जलवायु वित्त व्यवस्था’ का निर्माण करती है। 
  • इसके लिये निम्नलिखित व्यवस्था की जाएगी:
    • द्विवार्षिक संचार 
    • समर्पित ऑनलाइन पोर्टल  
    • द्विवार्षिक संचार का संश्लेषण 
    • द्विवार्षिक इन-सत्र कार्यशालाएँ 
    • द्विवार्षिक उच्च-स्तरीय मंत्रिस्तरीय संवाद

COP- 26:

  • कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ (COP), UNFCCC सम्मेलन का सर्वोच्च निकाय है। इसके तहत विभिन्न प्रतिनिधियों को सम्मेलन में शामिल किया गया है। यह प्रतिवर्ष अपने सत्र आयोजित करता है।
  • COP- 26 का आयोजन ग्लासगो (यूनाइटेड किंगडम) में नवंबर, 2020 में किया जाना था लेकिन COVID-19 महामारी के कारण इसे रद्द कर किया गया तथा अब इसका आयोजन वर्ष 2021में किया जाएगा। 

स्रोत: पीआईबी

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