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EPF के ब्याज पर कर अधिरोपण

  • 06 Feb 2021
  • 7 min read

चर्चा में क्यों?

केंद्रीय बजट 2021-22 में कर्मचारियों द्वारा भविष्य निधि (Provident Fund- PF) में किये जाने वाले निवेश पर कर अधिरोपित करने का प्रस्ताव दिया गया है। यह कर अधिरोपण निवेश की राशि 2.5 लाख रुपए से अधिक होने की स्थिति में किया जाएगा।

  • वित्त मंत्रालय द्वारा प्रत्येक माह भविष्य निधि में 1 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश पर चिंता व्यक्त करते हुए कर्मचारियों को कर रियायत के साथ सुनिश्चित प्रतिफल की प्राप्ति को अनुचित बताया गया है।
  • कर्मचारी भविष्य निधि (Employees’ Provident Fund- EPF) को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees’ Provident Fund Organisation- EPFO)  के तहत व्यवस्थित किया जाता है।
    • EPFO एक सरकारी संगठन है जो भारत में संगठित क्षेत्र में संलग्न कर्मचारियों हेतु भविष्य निधि (Provident Fund) और पेंशन खातों (Pension Accounts) का प्रबंधन करता है।

प्रमुख बिंदु:

कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना के बारे में:

  • कर्मचारी भविष्य निधि योजना सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के कर्मचारियों के लिये उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त कोई भी संगठन जिसमें कम-से-कम 20 व्यक्तियों को नियुक्ति हो, अपने कर्मचारियों को EPF का लाभ प्रदान करने हेतु अनिवार्य रूप से उत्तरदायी है।
  • कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना में नियोक्ता (Employer) और कर्मचारी (Employee) दोनों कर्मचारी के मासिक वेतन (मूल वेतन और महँगाई भत्ता) से 12% का योगदान करते हैं।
    • नियोक्ता की 12% की हिस्सेदारी में से 8.33% कर्मचारी पेंशन योजना (Employees Pension Scheme- EPS) में जमा किया जाता है।
  • ईपीएफ योजना उन कर्मचारियों के लिये अनिवार्य है जिनका मूल वेतन प्रतिमाह15,000 रुपए तक है।
  • EPFO द्वारा हर वर्ष EPF ब्याज दर घोषित की जाती है।
    • EPFO कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 (Miscellaneous Provisions Act, 1952) को लागू करता है।
    • ईपीएफ अधिनियम, 1952 कारखानों और अन्य प्रतिष्ठानों में कार्य करने वाले कर्मचारियों को संस्थागत भविष्य निधि प्रदान करता है।
  • यह बचत योजना आयकर अधिनियम की धारा 80(c) के तहत कर छूट प्रदान करती है।

आय पर प्रस्तावित कर:

  • EPF और ग्रेच्युटी में वार्षिक योगदान तथा EPF में स्वैच्छिक योगदान को जोड़ा जाएगा। यदि इन सभी का कुल योगदान 2.5 लाख रुपए से अधिक है, तो उस पर मिलने वाली ब्याज आय पर सीमांत कर की दर से कर लगाया जाएगा जिससे व्यक्ति की आय में कमी आती है।
  • महत्त्व पूर्ण रूप से केवल कर्मचारियों से प्राप्त होने वाली राशि/योगदान को कराधान प्रयोजनों की गणना में प्रयोग किया जाएगा। EPF की गणना प्रति नियोक्ता योगदान के आधार पर नही की जाएगी ।
  • एक वर्ष के अतिरिक्त योगदान पर ब्याज आय पर हर वर्ष कर लगेगा।
    • इसका अर्थ है कि यदि वित्त वर्ष 2022 में पीएफ में किसी व्यक्ति का वार्षिक योगदान 10 लाख रुपए है तो 7.5 लाख रुपए की ब्याज आय पर न केवल वित्त वर्ष 2022 में बल्कि बाद के सभी वर्षों में कर लगेगा।
  • EPF योगदानकर्त्ताओं का औसत सामान्य इस नए प्रस्ताव से प्रभावित नहीं होगा।

 PF अंशदान से प्राप्त होने वाली आय पर कर लगाने का कारण:

  • योजना के दुरुपयोग को रोकना: 
    • सरकार के समक्ष ऐसे कई मामले आए हैं जहांँ कर्मचारियों द्वारा PF निधि में बड़ी मात्रा में योगदान दिया गया है और उन्हें सभी चरणों (योगदान, ब्याज संचय और निकासी) में कर छूट का लाभ मिल रहा है। 
    • चूंँकि करदाताओं को कई प्रकार की कर छूट प्रदान की जाती है। अत: हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (High Networth Individuals- HNI) को एक सुनिश्चित ब्याज (EPFO के तहत) और एक साथ कर-मुक्त आय अर्जित करने के लिये EPF में बड़ी रकम जमा करने की अनुमति देना अनुचित है।
      • हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स: इसमें उन लोगों को शामिल किया जाता है जिनके पास एक निश्चित आंँकड़े से ऊपर की निवेश योग्य संपत्ति होती है।
    • इससे पहले सरकार ने कर्मचारी कल्याण योजनाओं जैसे कि EPF या नेशनल पेंशन स्कीम आदि में नियोक्ताओं के योगदान की सीमा को 7.5 लाख रुपए प्रतिवर्ष तक सीमित कर दिया था।
      • हालाँकि सरकार के साथ-साथ निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को भी सामान्य भविष्य निधि (सरकारी कर्मचारियों के लिये उपलब्ध) या EPF (सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिये उपलब्ध) में वैधानिक कटौती के ऊपर स्वैच्छिक योगदान करने की अनुमति है।
  • PF योगदानकर्त्ताओं के मध्य इक्विटी को बढ़ावा देना:
    • एक अनुमान के अनुसार, 4.5 करोड़ ईपीएफ खातों में से लगभग 0.27% सदस्यों के पास औसत 5.92 करोड़ रुपए का कोष था। प्रतिवर्ष ‘कर मुक्त सुनिश्चित ब्याज’ (Tax-free Assured Interest) पर 50 लाख रुपए से अधिक की राशि प्राप्त की जाती थी।
      • यह कल्याणकारी योजना का दुरुपयोग है, जिसका उद्देश्य बचत को बढ़ावा देना और निम्न एवं मध्यम आय वर्ग के  कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है।

स्रोत: द हिंदू

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