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वर्चुअल करेंसी पर प्रतिबंध समाप्त

  • 05 Mar 2020
  • 9 min read

प्रीलिम्स के लिये

वर्चुअल करेंसी, न्यायालय का निर्देश

मेन्स के लिये:

वर्चुअल करेंसी से संबंधित मुद्दे

चर्चा में क्यों?

सर्वोच्च न्यायालय ने भारत में वर्चुअल करेंसी (Virtual Currencies-VC) के व्यापार पर लगे प्रतिबंध को समाप्त कर दिया है, जिसे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा अप्रैल 2018 में एक आदेश के माध्यम से अधिरोपित किया गया था।

प्रमुख बिंदु

  • न्यायालय ने अपने आदेश में वर्चुअल करेंसी (VC) पर लगे प्रतिबंध को असंगत बताते हुए कहा कि RBI ने स्वयं वर्चुअल करेंसी (VC) के व्यापार के किसी भी प्रतिकूल प्रभाव या नुकसान को स्पष्ट नहीं किया है।
  • ध्यातव्य है कि अप्रैल 2018 में भारतीय रिज़र्व बैंक ने एक परिपत्र जारी किया था, जिसके माध्यम से सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर वर्चुअल करेंसी (जिसमें क्रिप्टोकरेंसी भी शामिल है) से संबंधित व्यापार सुविधाएँ प्रदान करने पर रोक लगा दी गई थीं।
  • RBI ने अपने आदेश के माध्यम से भारत में सभी वर्चुअल करेंसी के व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके पश्चात् इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) ने RBI के इस आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष याचिका दायर की थी।

क्या था RBI का आदेश?

  • RBI ने 2018 के अपने आदेश में कहा था कि रिज़र्व बैंक द्वारा विनियमित सभी इकाइयाँ वर्चुअल करेंसी में लेन-देन नहीं करेंगी तथा किसी व्यक्ति या इकाई को वर्चुअल करेंसी में लेन-देन के लिये भी सुविधा प्रदान नहीं करेंगी।
  • RBI ने आदेश में कहा था कि वर्चुअल करेंसी के व्यापार में शामिल सभी विनियमित संस्थाओं को परिपत्र की तारीख से तीन महीने के भीतर सभी कार्य समाप्त करने होंगे।

निर्णय के निहितार्थ

  • वर्चुअल करेंसी से संबंधित विशेषज्ञों ने सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय का स्वागत किया है। हालाँकि यह विषय अभी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है, क्योंकि अभी विधायी कार्यवाही शेष है।
  • विदित हो कि सरकार ने बीते वर्ष क्रिप्टोकरेंसी प्रतिबंध एवं आधिकारिक डिजिटल मुद्रा नियमन विधेयक, 2019 का मसौदा तैयार किया था। यह विधेयक क्रिप्टोकरेंसी के व्यापार को पूर्णतः प्रतिबंधित करता है।
  • जब तक क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंध करने वाले मसौदे को इसके मौजूदा स्वरूप से नहीं बदला जाएगा तब तक देश में क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से व्यापार को शुरू नहीं किया जा सकेगा।

वर्चुअल करेंसी का अर्थ

  • साधारण शब्दों में कहें तो वर्चुअल करेंसी एक प्रकार की डिजिटल मुद्रा होती है। ध्यातव्य है कि वर्चुअल करेंसी एक वैध मुद्रा नहीं होती है, जिसका अर्थ है कि यह देश के केंद्रीय बैंक (भारत की स्थिति में भारतीय रिज़र्व बैंक) द्वारा समर्थित नहीं होती है।
  • क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) वर्चुअल करेंसी का एक रूप है जो क्रिप्टोग्राफी द्वारा संरक्षित है। क्रिप्टोग्राफी मूल रूप से एक ग्रीक शब्द है, जो 'गुप्त' और 'लिखावट' का मिला-जुला अर्थ रूप है। यह एक प्रकार का कूट-लेखन (Encode) है, जिसमें भेजे गए संदेश या जानकारी को सांकेतिक शब्दों में बदल दिया जाता है। इसे भेजने वाला या पाने वाला ही पढ़ सकता या खोल सकता है।
    • क्रिप्टोग्राफी का संबंध डेटा की सुरक्षा और उससे संबंधित विषयों, विशेषकर एनक्रिप्शन से होता है।
  • बिटकॉइन और एथेरम जैसी डिजिटल करेंसी ब्लॉकचेन तकनीक पर निर्भर करती हैं।

ब्लॉकचेन तकनीक

  • जिस प्रकार हज़ारों-लाखों कंप्यूटरों को आपस में जोड़कर इंटरनेट का आविष्कार हुआ, ठीक उसी प्रकार डेटा ब्लॉकों (आँकड़ों) की लंबी श्रृंखला को जोड़कर उसे ब्लॉकचेन नाम दिया गया है।
  • ब्लॉकचेन तकनीक में तीन अलग-अलग तकनीकों का समायोजन है, जिसमें इंटरनेट, पर्सनल 'की' (निजी कुंजी) की क्रिप्टोग्राफी अर्थात् जानकारी को गुप्त रखना और प्रोटोकॉल पर नियंत्रण रखना शामिल है।
  • ब्लॉकचेन एक ऐसी तकनीक है जिससे बिटकॉइन तथा अन्य क्रिप्टो-करेंसियों का संचालन होता है। यदि सरल शब्दों में कहा जाए तो यह एक डिजिटल ‘सार्वजनिक बही-खाता’ (Public Ledger) है, जिसमें प्रत्येक लेन-देन का रिकॉर्ड दर्ज़ होता है।
  • ब्लॉकचेन में एक बार किसी भी लेन-देन के दर्ज होने पर इसे न तो वहाँ से हटाया जा सकता है और न ही इसमें संशोधन किया जा सकता है।
  • ब्लॉकचेन के कारण लेन-देन के लिये एक विश्वसनीय तीसरी पार्टी जैसे-बैंक की आवश्यकता नहीं पड़ती।
  • नेटवर्क से जुड़े उपकरणों (मुख्यतः कंप्यूटर की श्रृंखलाओं, जिन्हें नोड्स कहा जाता है) द्वारा सत्यापित होने के बाद इसके अंतर्गत किया गया प्रत्येक लेन-देन का विवरण बही-खाते में रिकॉर्ड होता है।

क्रिप्टोकरेंसी के लाभ

  • क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिये लेन-देन के दौरान छद्म नाम (Pseudonym) एवं पहचान बताई जाती है। ऐसे में अपनी निजता को लेकर अत्यधिक संवेदनशील व्यक्तियों को यह माध्यम सर्वाधिक उपयुक्त जान पड़ता है।
  • क्रिप्टोकरेंसी में लेन-देन संबंधी लागत अत्यंत ही कम होती है। घरेलू हो या अंतर्राष्ट्रीय किसी भी लेन-देन की लागत एक समान ही होती है।
  • क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिये होने वाले लेन-देन में ‘थर्ड-पार्टी सर्टिफिकेशन’ (Third Party Certification) की आवश्यकता नहीं होती। अतः धन एवं समय दोनों की बचत होती है।

क्रिप्टोकरेंसी के नुकसान

  • क्रिप्टोकरेंसी की संपूर्ण व्यवस्था ऑनलाइन होने के कारण इसकी सुरक्षा कमज़ोर हो जाती है और इसके हैक होने का खतरा बना रहता है।
  • क्रिप्टोकरेंसी की सबसे बड़ी समस्या है इसका ऑनलाइन होना और यही कारण है कि क्रिप्टोकरेंसी को एक असुरक्षित मुद्रा माना जा रहा है।
  • गौरतलब है कि प्रत्येक बिटकॉइन लेन-देन के लिये लगभग 237 किलोवाट बिजली की खपत होती है और इससे प्रतिघंटा लगभग 92 किलो कार्बन उत्सर्जन होता है।

निष्कर्ष

मुद्रा के आविष्कार से पूर्व वस्तु विनिमय प्रणाली के ज़रिये वस्तुओं का लेन-देन किया जाता था किंतु जैसे-जैसे तकनीक उन्नत होती गई व्यापार के तरीकों में भी बदलाव आता गया। वर्चुअल करेंसी का लगातार बढ़ रहा प्रचलन 21वीं सदी के सबसे महत्त्वपूर्ण बदलावों में से एक है। न्यायालय के हालिया निर्देश से भारत ने भी इस ओर एक कदम बढ़ा दिया है। हालाँकि डिजिटल मुद्रा को लेकर अभी भी कई चिंताएँ मौजूद हैं, जिनका समाधान जल्द-से-जल्द किया जाया जाना आवश्यक है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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