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जीव विज्ञान और पर्यावरण

पटाखों पर प्रतिबंध के खिलाफ याचिका खारिज

  • 24 Jul 2021
  • 4 min read

प्रिलिम्स के लिये

राष्ट्रीय हरित अधिकरण, वायु गुणवत्ता सूचकांक, जीवन का अधिकार, अनुच्छेद 25, अनुच्छेद 21, धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार

मेन्स के लिये 

जीवन के अधिकार और धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार के बीच संबंध 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal- NGT) के आदेश को चुनौती देने वाली अपीलों को खारिज़ कर दिया है, जिसके अंतर्गत NCR और भारत के अन्य शहरों में कोविड-19 महामारी के दौरान सभी पटाखों की बिक्री एवं उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था।

प्रमुख बिंदु 

पृष्ठभूमि

  • सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2017 में दायर एक याचिका के आधार पर दिवाली, क्रिसमस आदि उत्सवों के दौरान हानिकारक पटाखों के उपयोग और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था।
    • न्यायालय ने कहा था कि विभिन्न कारकों, विशेषकर पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण ने दिल्ली को गैस चैंबर बना दिया है।
    • याचिककर्त्ताओं ने अपने जीवन के अधिकार (Right to Life) की सुरक्षा के लिये गुहार लगाई थी।
  • न्यायालय ने इस तर्क को खारिज़ कर दिया कि दिवाली जैसे धार्मिक त्योहारों के दौरान पटाखे फोड़ना मौलिक अधिकार तथा आवश्यक प्रथा है।
    • न्यायालय ने माना कि धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25) जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) के अधीन है।
    • यदि कोई विशेष धार्मिक प्रथा लोगों के स्वास्थ्य और जीवन के लिये खतरा है तो ऐसी प्रथा अनुच्छेद 25 के अंतर्गत सुरक्षा की हकदार नहीं है।

NGT के आदेश:

  •  दिसंबर 2020 के NGT के आदेशानुसार क्रिसमस और नए वर्ष पर केवल हरित पटाखे (जो कम प्रदूषणकारी कच्चे माल का उपयोग करते हैं) की अनुमति उन क्षेत्रों में होगी जहाँ परिवेशी वायु गुणवत्ता का स्तर मध्यम या उससे नीचे की श्रेणियों में होगा। 
    • हालाँकि कोविड -19 महामारी के कारण NGT ने पुनः  पटाखों की बिक्री एवं उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है।
  • पटाखा कंपनियों ने तर्क दिया कि यह प्रतिबंध उनकी आजीविका के मार्ग में एक बाधक था।
  • इसके प्रत्युत्तर में ट्रिब्यूनल ने तर्क दिया था कि अनुच्छेद 19 (1) (g) के अनुसार ‘राइट टू बिज़नेस’ आत्यंतिक नहीं है तथा वायु गुणवत्ता एवं ध्वनि प्रदूषण स्तर के मानदंडों का उल्लंघन करने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है।

पटाखों के हानिकारक प्रभाव: 

  • पटाखों में कैडमियम, लेड, क्रोमियम, एल्युमिनियम, मैग्नीशियम, नाइट्रेट्स, कार्बन मोनोऑक्साइड, कॉपर, पोटैशियम, सोडियम, जिंक ऑक्साइड, मैंगनीज़ डाइऑक्साइड आदि भारी धातुएँ और ज़हरीले रसायन होते हैं।
  • ये रसायन हृदय रोग, श्वसन या तंत्रिका तंत्र विकार के रूप में लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं।
  • इसके अलावा ध्वनि प्रदूषण बेचैनी, अस्थायी या स्थायी श्रवण हानि, उच्च रक्तचाप, नींद में खलल और बच्चों में भी खराब संज्ञानात्मक विकास का कारण बनता है।

स्रोत: द हिंदू

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