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भारतीय अर्थव्यवस्था

फार्मास्युटिकल उद्योग को सुदृढ़ बनाना

  • 23 Jul 2022
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

फार्मास्युटिकल उद्योग योजना का सुदृढ़ीकरण, सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री।

मेन्स के लिये:

भारतीय दवा उद्योग, स्वास्थ्य, सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप।

चर्चा में क्यों?

रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) की रणनीतिक भूमिका को ध्यान में रखते हुए 'फार्मास्युटिकल उद्योग को सुदृढ़ बनाने' (SPI) के लिये योजनाएँ शुरू की हैं।

प्रमुख बिंदु

  • परिचय:
    • यह योजना फार्मास्युटिकल क्षेत्र में MSME इकाइयों के प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिये क्रेडिट लिंक्ड पूंजी और ब्याज़ सब्सिडी के साथ-साथ फार्मा क्लस्टर्स में रिसर्च सेंटर, टेस्टिंग लैब और ETP (इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) सहित सामान्य सुविधाओं के लिये 20 करोड़ रुपए तक की सहायता प्रदान करती है। .
    • MSME इकाई के पास पूंजीगत सब्सिडी या इंटरेस्ट छूट में से किसी एक को चुनने का विकल्प होगा।
      • SIDBI (लघु उद्योग विकास बैंक ऑफ इंडिया) इस योजना को लागू करने के लिये परियोजना प्रबंधन सलाहकार है।
  • घटक:
    • फार्मास्युटिकल प्रौद्योगिकी उन्नयन सहायता योजना (PTUAS):
      • यह फार्मास्युटिकल क्षेत्र में MSME को उनकी तकनीक को उन्नत करने के लिये सिद्ध ट्रैक रिकॉर्ड के साथ सुविधा प्रदान करेगा।
      • इसमें तीन वर्ष की न्यूनतम अवधि के साथ अधिकतम 10 करोड़ रुपए तक के ऋण पर 10% की पूंजीगत सब्सिडी या शेष राशि को कम करने पर 5% तक ब्याज़ में छूट (SC/ST के स्वामित्व वाली इकाइयों के मामले में 6%) का प्रावधान है।
    • सामान्य सुविधाओं हेतु फार्मास्युटिकल उद्योग को सहायता (APICF):
      • यह निरंतर विकास के लिये मौजूदा फार्मास्युटिकल क्लस्टर्स की क्षमता को मज़बूत करेगा।
      • यह स्वीकृत परियोजना लागत का 70% या 20 करोड़ रुपए, (जो भी कम हो) तक की सहायता प्रदान करता है।
        • हिमालय और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के मामले में सहायता अनुदान 20 करोड़ रुपए प्रति क्लस्टर या परियोजना लागत का 90% (जो भी कम हो) होगा।
    • फार्मास्युटिकल एंड मेडिकल डिवाइसेस प्रमोशन एंड डेवलपमेंट स्कीम (PMPDS):
      • इसमें भारतीय फार्मा और चिकित्सा उपकरण उद्योग के लिये महत्त्व के विषयों पर अध्ययन रिपोर्ट तैयार करना शामिल होगा।
      • इस योजना का उद्देश्य फार्मा और चिकित्सा उपकरण क्षेत्रों का डेटाबेस बनाना है।
  • उद्देश्य:
    • गुणवत्ता और मूल्य दोनों में और अधिक प्रतिस्पर्द्धी बनाते हुए दवा उद्योग में भारत की क्षमताओं को बढ़ाना तथा भारतीय फार्मा एमएसएमई को प्रोत्साहन देकर वैश्विक आपूर्ति शृंखला का हिस्सा बनाना है।

महत्त्व:

  • यह मौजूदा बुनियादी सुविधाओं को मज़बूत करेगा और भारत को फार्मा क्षेत्र में वैश्विक नेता बनाएगा।
  • इससे न केवल गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि क्लस्टर्स का सतत् विकास भी सुनिश्चित होगा।
  • यह योजना देश भर में फार्मा उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए फार्मा समूहों और एमएसएमई को उनकी उत्पादकता, गुणवत्ता एवं स्थिरता में सुधार के लिये आवश्यक समर्थन प्रदान करेगी।
  • यह योजना निवेश बढ़ाएगी, अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करेगी तथा उद्योग को भविष्य के उत्पादों और विचारों को विकसित करने में सक्षम बनाएगी।

फार्मा सेक्टर से संबंधित योजनाएँ:

  • बल्क ड्रग पार्क योजना को बढ़ावा देना:
    • सरकार का लक्ष्य देश में थोक दवाओं और उनके निर्माण लागत के लिये अन्य देशों पर निर्भरता को कम करने हेतु राज्यों के साथ साझेदारी में भारत में 3 मेगा बल्क ड्रग पार्क विकसित करना है।
    • यह योजना दवाओं की निरंतर आपूर्ति के साथ-साथ नागरिकों को सस्ती स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में भी मदद करेगी।
  • उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहनयोजना:
    • पीएलआई योजना का उद्देश्य देश में क्रिटिकल की-स्टार्टिंग मैटेरियल्स (KSMs)/ड्रग इंटरमीडिएट और सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री (APIs) के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है।

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न:

प्रश्न. भारत सरकार दवा के पारंपरिक ज्ञान को दवा कंपनियों द्वारा पेटेंट कराने से कैसे बचा रही है? (250 शब्द) [2015]

 स्रोत : पी.आई.बी.

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