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सामाजिक न्याय

द इंडिया सोशल डेवलपमेंट रिपोर्ट- 2018

  • 25 Jun 2019
  • 4 min read

संदर्भ

आर्थिक समृद्धि और सामाजिक विकास के मध्य बढ़ते अंतराल और असमानता के सामाजिक प्रभावों पर हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की गई है जिसमे एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (Acute Encephalitis Syndrome - AES) जैसी आपदाओं के लिये राज्य की नीतियों (State policies) को ज़िम्मेदार ठहराया गया है।

  • ‘द इंडिया सोशल डेवलपमेंट रिपोर्ट-2018’ नाम से यह अध्ययन ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा सामाजिक विकास परिषद (Council for Social Development - CSD) की ओर से प्रकाशित की गई है।
  • यह रिपोर्ट कुल 7 खंडों में विभाजित है जिसमें कुल 22 शोध-पत्र शामिल हैं। रिपोर्ट का संपादन कृषि लागत और मूल्य आयोग(Commission for Agricultural Costs and Prices) के पूर्व अध्यक्ष टी हक (T Haque) और स्कूल ऑफ सोशल साइंसेस के पूर्व डीन नरसिंह रेड्डी (Narasimha Reddy) द्वारा किया गया है।

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु :

  • ‘बहुआयामी असमानता’ पर केंद्रित इस रिपोर्ट में 6 आयामों और 28 सूचकों के आधार एक सामाजिक विकास सूचकांक (Social Development Index - SDI) तैयार किया गया है।
  • प्रस्तुत सूचकांक का निष्कर्ष यह है कि जो राज्य आर्थिक रूप से प्रगतिशील हैं उनके लिये यह आवश्यक नहीं है कि सामाजिक विकास में भी शीर्ष पर हों।
  • रिपोर्ट के अनुसार “केरल, मिज़ोरम, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और मेघालय जैसे राज्य उन राज्यों में आते हैं जहाँ सामाजिक विकास तो बहुत अधिक है, परंतु प्रति व्यक्ति आय की कमी है।”
  • इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश और हरियाणा उन राज्यों में शामिल हैं जहाँ प्रति व्यक्ति आय तो अधिक है लेकिन सामाजिक विकास की कमी है।
  • रिपोर्ट में स्वास्थ और शिक्षा के क्षेत्रों में हुई महत्त्वपूर्ण सफलताओं की भी चर्चा की गई है।
  • रिपोर्ट के एक शोध-पत्र में ग़रीबों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के लिये बनाई गई केंद्र और राज्यों की भिन्न-भिन्न नीतियों को पूर्णतः असफल बताया गया है।
  • यह रिपोर्ट भी ऐसे समय में आई है जब इंसेफलाइटिस के मरीज़ो पर कराया गया बिहार सरकार का ही एक सर्वे यह दिखता है कि इस बीमारी से प्रभावित होने वाले दो-तिहाई मरीज़ गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं।
  • रिपोर्ट के एक अन्य शोध-पत्र में भारतीय शिक्षा प्रणाली पर गहरे प्रश्न चिन्ह लगाए गए हैं। शोधकर्ता ने यह तर्क दिया है कि वर्ष 2011 की सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना के अनुसार भारत के 36 प्रतिशत ग्रामीण लोग अशिक्षित हैं, 14 प्रतिशत लोगों के पास प्राथमिक शिक्षा से भी कम ज्ञान है और 18 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिन्होंने प्राथमिक कक्षाएँ पास की हैं। ये आँकड़े दर्शाते हैं कि 21वीं सदी में भी हमारी शिक्षा नीति में कई कमी हैं।

स्रोत- द हिंदू (बिज़नेस लाइन)

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