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भारतीय विरासत और संस्कृति

श्री महाकाल लोक गलियारा

  • 12 Oct 2022
  • 12 min read

प्रिलिम्स के लिये:

श्री महाकाल लोक गलियारा, उज्जैन का महाकाल मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, मंदिर वास्तुकला।

मेन्स के लिये:

भारत की मंदिर वास्तुकला, श्री महाकाल लोक गलियारा और इसका महत्त्व।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में प्रधानमंत्री ने मध्य प्रदेश के उज्जैन में 'श्री महाकाल लोक' गलियारा/कॉरिडोर के पहले चरण का उद्घाटन किया।

  • वाराणसी में विश्वनाथ मंदिर और उत्तराखंड में केदारनाथ मंदिर के बाद महाकाल मंदिर का विकास इस कड़ी में तीसरा 'ज्योतिर्लिंग' स्थल है।
  • 800 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला महाकाल कॉरिडोर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से चार गुना बड़ा है।

श्री महाकाल लोक कॉरिडोर/गलियारा

  • परिचय:
    • महाकाल महाराज मंदिर परिसर विस्तार योजना उज्जैन ज़िले में महाकालेश्वर मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र के विस्तार, सौंदर्यीकरण एवं भीड़भाड़ को कम करने की एक योजना है।
    • योजना के तहत लगभग 2.82 हेक्टेयर के महाकालेश्वर मंदिर परिसर को बढ़ाकर 47 हेक्टेयर किया जा रहा है, जिसे उज्जैन ज़िला प्रशासन द्वारा दो चरणों में विकसित किया जाएगा।
      • इसमें 17 हेक्टेयर की रुद्रसागर झील शामिल होगी।
    • इस परियोजना से शहर में वार्षिक रूप से ग्राहकों की संख्या मौजूदा 1.50 करोड़ से बढ़कर लगभग तीन करोड़ होने की उम्मीद है।
  • पहला चरण:
    • विस्तार योजना के पहले चरण के पहलुओं में से एक आगंतुक प्लाज़ा है जिसमें दो प्रवेश द्वार या द्वार हैं अर्थात् नंदी द्वार और पिनाकी द्वार।
      • आगंतुक प्लाज़ा में एक बार में 20,000 तीर्थयात्री ठहर सकते हैं।
    • शहर में आगंतुकों के प्रवेश और मंदिर तक उनकी आवाजाही को ध्यान में रखते हुए भीड़भाड़ को कम करने के लिये एक संचलन योजना भी विकसित की गई है।
    • एक 900 मीटर पैदल यात्री गलियारे का निर्माण किया गया है, जो प्लाज़ा को महाकाल मंदिर से जोड़ता है, जिसमें शिव विवाह, त्रिपुरासुर वध, शिव पुराण और शिव तांडव स्वरूप जैसे भगवान शिव से संबंधित कहानियों को दर्शाते 108 भित्ति चित्र एवं 93 मूर्तियाँ हैं।
      • इस पैदल यात्री गलियारे के साथ 128 सुविधा केंद्र, भोजनालय और शॉपिंग जॉइंट, फूलवाला, हस्तशिल्प स्टोर आदि भी हैं।
  • दूसरा चरण:
    • इसमें मंदिर के पूर्वी और उत्तरी मोर्चों का विस्तार शामिल है।
      • इसमें उज्जैन शहर के विभिन्न क्षेत्रों का विकास भी शामिल है, जैसे महाराजवाड़ा, महल गेट, हरि फाटक ब्रिज, रामघाट अग्रभाग और बेगम बाग रोड।
        • महाराजवाड़ा में भवनों का पुनर्विकास कर महाकाल मंदिर परिसर से जोड़ा जाएगा, जबकि एक विरासत धर्मशाला और कुंभ संग्रहालय बनाया जाएगा।
    • दूसरे चरण को सिटी इनवेस्टमेंट्स टू इनोवेट, इंटीग्रेट एंड सस्टेन (CITIIS) प्रोग्राम के तहत एजेंस फ्रैन्काइज़ डी डेवलपमेंट (AFD) से फंडिंग के साथ विकसित किया जा रहा है।

श्री महाकाल लोक कॉरिडोर का महत्त्व:

  • अपार सांस्कृतिक मान्यताएँ: माना जाता है कि मंदिर महाकालेश्वर द्वारा शासित है, जिसका अर्थ है 'समय के भगवान' यानी भगवान शिव। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, मंदिर का निर्माण भगवान ब्रह्मा द्वारा किया गया था और वर्तमान में यह पवित्र क्षिप्रा नदी के किनारे स्थित है।
  • दक्षिण की ओर मुख वाला ज्योतिर्लिंग: उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग शिव के सबसे पवित्र निवास माने जाने वाले 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मंदिर भारत में 18 महा शक्तिपीठों में से एक के रूप में प्रतिष्ठित है।
    • यह दक्षिण की ओर मुख वाला एकमात्र ज्योतिर्लिंग है, जबकि अन्य सभी का मुख पूर्व की ओर है। ऐसा इसलिये है क्योंकि मृत्यु की दिशा दक्षिण मानी जाती है।
      • दरअसल, अकाल मृत्यु से बचने के लिये लोग महाकालेश्वर की पूजा करते हैं।
    • पुराणों के अनुसार, भगवान शिव ने प्रकाश के एक अंतहीन स्तंभ के रूप में विश्व को वेधित किया, जिसे ज्योतिर्लिंग कहा जाता है।
      • महाकाल के अलावा इनमें गुजरात में सोमनाथ और नागेश्वर, आंध्र प्रदेश में मल्लिकार्जुन, मध्य प्रदेश में ओंकारेश्वर, उत्तराखंड में केदारनाथ, महाराष्ट्र में भीमाशंकर, त्र्यंबकेश्वर और घृष्णेश्वर मंदिर, वाराणसी में विश्वनाथ, झारखंड में बैद्यनाथ और तमिलनाडु में रामेश्वरम शामिल हैं।
  • प्राचीन ग्रंथों में उल्लेख: महाकाल मंदिर का उल्लेख कई प्राचीन भारतीय काव्य ग्रंथों में मिलता है। चौथी शताब्दी में रचित मेघदूतम (पूर्व मेघ) के प्रारंभिक भाग में कालिदास महाकाल मंदिर का विवरण देते हैं।
    • इसका वर्णन पत्थर की नींव के साथ लकड़ी के खंभों पर बने छत के ऊपर शिखर वाले मंदिर के रूप में मिलता है। गुप्त काल से पूर्व मंदिरों पर कोई शिखर या शीर्ष नहीं होता था।
  • मंदिर का विनाश और पुनर्निर्माण: मध्यकाल में इस्लामी शासक यहाँ पूजा करने वाले पुजारियों को दान देते थे।
    • 13वीं शताब्दी में उज्जैन पर अपने आक्रमण के दौरान तुर्क शासक शम्स-उद-दीन इल्तुतमिश द्वारा मंदिर परिसर को नष्ट कर दिया गया था।
    • वर्तमान पाँच मंज़िला संरचना का निर्माण 1734 में मराठा सेनापति रानोजी शिंदे द्वारा मंदिर वास्तुकला की भूमिजा, चालुक्य और मराठा शैलियों में किया गया था।

उज्जैन शहर का ऐतिहासिक महत्त्व:

  • उज्जैन शहर हिंदू धर्मग्रंथों की शिक्षा के प्राथमिक केंद्रों में से एक था, जिसे छठी और सातवीं शताब्दी ईसा पूर्व में अवंतिका कहा जाता था।
  • बाद में ब्रह्मगुप्त और भास्कराचार्य जैसे खगोलविद एवं गणितज्ञ उज्जैन में बस गए।
    • 18वीं शताब्दी में महाराजा जय सिंह द्वितीय द्वारा यहाँ एक वेधशाला का निर्माण किया गया था, जिसे वेद शाला या जंतर मंतर के रूप में जाना जाता है, जिसमें खगोलीय घटनाओं को मापने के लिये 13 वास्तुशिल्प उपकरण शामिल हैं।
  • इसके अलावा चौथी शताब्दी में प्रतिपादित सूर्य सिद्धांत, जो भारतीय खगोल विज्ञान पर उपलब्ध ग्रंथों में से एक है, के अनुसार उज्जैन भौगोलिक रूप से एक ऐसे स्थान पर स्थित है, जहाँ  देशांतर रेखा को शून्य मध्याह्न और कर्क रेखा काटती हैं।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्षों के प्रश्न  

प्रश्न. मुरैना के पास स्थित चौसठ योगिनी मंदिर के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2021)

  1. यह कच्छपघात राजवंश के शासनकाल के दौरान बनाया गया एक गोलाकार मंदिर है।
  2. यह भारत में निर्मित एकमात्र गोलाकार मंदिर है।
  3. यह क्षेत्र में वैष्णव पंथ को बढ़ावा देने के लिये था।
  4. इसके डिज़ाइन ने एक लोकप्रिय धारणा को जन्म दिया है कि भारतीय संसद भवन के पीछे इसकी प्रेरणा थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 4
(d) केवल 2, 3 और 4

उत्तर: C

व्याख्या:

  • चौसठ योगिनी मंदिर ग्वालियर से 40 किलोमीटर दूर मुरैना ज़िले में पढौली के पास मितोली गाँव में स्थित है। भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण ने मंदिर को प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक घोषित किया है।।
  • 1323 ईस्वी के एक शिलालेख के अनुसार, मंदिर का निर्माण कच्छपघात राजा देवपाल (शासनकाल वर्ष 1055-1075) द्वारा किया गया था। ऐसा कहा जाता है कि यह मंदिर सूर्य के गोचर के आधार पर ज्योतिष एवं गणित की शिक्षा प्रदान करने का स्थान था। अत: कथन 1 सही है।
  • चौसठ योगिनी मंदिर को इकत्तरसो महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। लगभग सौ फीट ऊँची एक अलग पहाड़ी पर स्थित इस गोलाकार मंदिर से नीचे खेतों का शानदार दृश्य देखा जा सकता है और यह भारत के बहुत कम ऐसे मंदिरों में से एक है। इस मंदिर का नाम इसकी कोशिकाओं के अंदर शिव लिंगों के कारण रखा गया है। यह चौंसठ योगिनियों को समर्पित एक योगिनी मंदिर है। अतः कथन 2 और 3 सही नहीं हैं।
  • यह बाहरी रूप से गोलाकार है, इसकी त्रिज्या 170 फीट की है और इसके आंतरिक भाग के भीतर 64 छोटे-छोटे कक्ष हैं। मुख्य केंद्रीय मंदिर के भीतर स्लैब कवरिंग है जिनमें वर्षा जल को बड़े भूमिगत भंडारण में ले जाने के लिये छिद्र हैं। बारिश के पानी को स्टोरेज तक ले जाने वाली पाइप लाइनें भी देखी जा सकती हैं।
  • कई जिज्ञासु पर्यटकों ने इस मंदिर की तुलना भारतीय संसद भवन से की है क्योंकि शैली में दोनों ही गोलाकार हैं। कई लोगों का यह भी मानना है कि यह मंदिर संसद भवन की प्रेरणा था। अतः कथन 4 सही है।

अतः विकल्प C सही उत्तर है।


प्रश्न. शैलकृत स्थापत्य प्रारंभिक भारतीय कला एवं इतिहास के ज्ञान के अति महत्त्वपूर्ण स्रोतों में से एक का प्रतिनिधित्व करता है। विवेचना कीजिये। (मेन्स-2020)

मंदिर वास्तुकला: नागर शैली

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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