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शासन व्यवस्था

आंध्रप्रदेश में शिक्षा के माध्यम के रूप में अंग्रेज़ी

  • 04 Sep 2020
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये

शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम

मेन्स के लिये 

शिक्षा के माध्यम के रूप में अंग्रेज़ी और स्थानीय भाषा का महत्त्व

चर्चा में क्यों?

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को खारिज करने से इनकार कर दिया, जिसमें उच्च न्यायालय ने वाई.एस. जगनमोहन रेड्डी सरकार के कक्षा 1 से 6 तक के सरकारी स्कूल के छात्रों के लिये अंग्रेज़ी को शिक्षा का माध्यम बनाने के निर्णय पर रोक लगा दी गई थी।

प्रमुख बिंदु

  • जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्त्व में तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने उल्लेख किया कि शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम की धारा 29(2) (F) के अनुसार, शिक्षा का माध्यम, जहाँ तक संभव हो, बच्चे की मातृभाषा में होना चाहिये।
  • हालाँकि सर्वोच्च न्यायालय, आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय के निर्णय पर अंतरिम रोक लगाने की याचिका पर पुनः अगले माह 25 सितंबर को सुनवाई करेगा।

पृष्ठभूमि

  • सर्वप्रथम बीते वर्ष नवंबर माह में मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने शैक्षणिक वर्ष 2020-21 से अनिवार्य रूप से राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में अंग्रेज़ी माध्यम शुरू करने का प्रस्ताव रखा था।
  • जिसके बाद इस आदेश में कुछ संशोधन किया गया, जिसके मुताबिक पहले चरण में केवल कक्षा 1 से 6 को अंग्रेज़ी माध्यम में पढाए जाने की बात की गई। 
  • 23 जनवरी, 2020 को भविष्य के छात्रों के लिये इस कदम को क्रांतिकारी बताते हुए इस संबंध में एक विधेयक पारित कर दिया गया।
  • इसके पश्चात् सरकार के इस विधेयक को चुनौती देते हुए आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई और इस मामले की सुनवाई के पश्चात् 15 अप्रैल, 2020 को, मुख्य न्यायाधीश जे.के. माहेश्वरी के नेतृत्त्व में आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने सरकारी आदेशों को रद्द कर दिया।
    • आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर करते हुए तर्क दिया गया था कि कई अध्ययन दर्शाते हैं कि प्राथमिक स्तर पर बच्चे तभी अधिक सीख पाते हैं जब उन्हें उनकी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान की जाए।

आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय का मत 

  • आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय ने स्वीकार किया कि स्कूली शिक्षा में शिक्षा का माध्यम चुनने का विकल्प एक मौलिक अधिकार है। खंडपीठ ने माना कि नागरिक को शिक्षित करने के लिये शिक्षा के माध्यम का चयन भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। 
  • उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने कहा कि आंध्रप्रदेश सरकार का निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(G) का भी उल्लंघन करता है, चूँकि यह भाषाई अल्पसंख्यक संस्थानों के ‘किसी भी पेशे को स्वतंत्रतापूर्वक अपनाने के अधिकार' का उल्लंघन करता है।
    • सर्वोच्च न्यायलय ने टीएमए पाई फाउंडेशन बनाम कर्नाटक राज्य वाद में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(G) के तहत शैक्षणिक संस्थान चलाने को एक पेशे के रूप में स्वीकार किया था।
  • आंध्रप्रदेश शिक्षा अधिनियम, 1982 की धारा 7 के तहत भी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान करने और कला-कौशल आदि के महत्त्व के बारे में बात की गई है। 
  • इसके अलावा आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि प्राथमिक स्तर पर स्कूलों में शिक्षा के माध्यम को बदलने की शक्ति केवल राज्य सरकार के पास नहीं है।
    • बल्कि आंध्रप्रदेश शिक्षा अधिनियम, 1982 की धारा 7(3) और 7(4) के मुताबिक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) वह शैक्षणिक प्राधिकरण होगा, जो निर्धारित प्राधिकारी के साथ परामर्श करने के पश्चात् राज्य के विद्यालयों में बच्चों के सतत् व्यापक मूल्यांकन के साथ-साथ उसके पाठ्यक्रम, रूपरेखा और मूल्यांकन तंत्र का निर्धारण करेगा। 

अंग्रेज़ी भाषा के पक्ष में तर्क

  • कई लोग मानते हैं कि अंग्रेज़ी भाषा बोलने और समझने की क्षमता एक व्यक्ति ऐसी कई नौकरियों के लिये योग्य बना देती है, जो अभी तक स्थानीय भाषी लोगों के लिये उपलब्ध नहीं हैं।
  • प्रायः अंग्रेज़ी के ज्ञान की कमी के कारण सरकारी स्कूल के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में अंग्रेज़ी माध्यम के निजी स्कूल के छात्रों की तुलना में कमतर आंका जाता है।
  • अधिकांश तकनीक और विज्ञान से संबंधित पुस्तकें अंग्रेज़ी भाषा में ही उपलब्ध हैं, साथ ही उच्च शिक्षा के अधिकांश विषय भी अंग्रेज़ी भाषा में ही पढाए जाते हैं। ऐसे में हिंदी अथवा किसी अन्य स्थानीय भाषा के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
  • वैश्विक भाषा होने के कारण अंग्रेज़ी छात्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्द्धा करने में सक्षम बनाती है।

स्थानीय भाषा के पक्ष में तर्क

  • प्रायः मातृभाषा अथवा स्थानीय भाषा का उपयोग छात्रों के लिये सीखने की प्रक्रिया को अधिक परिचित, समझने योग्य तथा स्वीकार्य बना देता है। इससे छात्र सीखने की प्रकिया से अधिक जुड़ाव महसूस करते हैं और उनके आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
  • मातृभाषा का उपयोग करके छात्र स्वयं को बेहतर ढंग से अभिव्यक्त कर सकते हैं और अपनी मातृभाषा में अपने अनुभवों, अपनी पहचान और अपनी संस्कृति को अन्य लोगों के साथ साझा कर सकते हैं।
  • अंग्रेज़ी भाषा का उपयोग प्रायः उच्च वर्ग और निम्न वर्ग के बीच एक अंतर पैदा कर देता है, कई बार यह भी देखने को मिलता है कि भाषाई विकलांगता (Linguistic Disability) के कारण वास्तविक प्रतिभा और योग्यता दबकर रह जाती है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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