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शासन व्यवस्था

समान भाषा उप-शीर्षक (SLS)

  • 24 Sep 2019
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 15 अगस्त, 2019 से देश के सभी 800 भारतीय टीवी चैनलों के लिये भाषा आधारित उप-शीर्षक/समान भाषा उप-शीर्षक (Same Language Subtitling-SLS) तैयार करने की अनिवार्यता लागू कर दी है।

प्रमुख बिंदु

  • भारत ने SLS की प्रेरणा अमेरिका से ली है ताकि मूक-बधिर लोगों तक मीडिया की आसान पहुँच हो तथा रीडिंग लिटरेसी में सुधार हो।
  • यूनाइटेड किंगडम में भारतीय अनुभवों से प्रेरित होकर बच्चों के प्रोग्रामिंग में Turn on the Subtitle के रूप में कैंपेन भी चल रहा है।
  • दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (Right of Person with Disability Act), 2016 के आधार पर SLS की नीति को लागू किया गया है, जिसमें सभी TV चैनलों पर कैप्शनिंग (Captioning) की बात की गई है।
  • वर्ष 2025 के अंत तक 50% टीवी चैनलों को Same Language Subtitling (SLS) से युक्त करने का लक्ष्य रखा गया है तथा प्रतिवर्ष 10% की वृद्धि करते हुए इस लक्ष्य को प्राप्त करना निश्चित किया गया है।
  • मूक-बधिर लोगों के लिये टीवी पर कैप्शनिंग (उप-शीर्षक लिखा होना) का विचार नया नहीं है। इस क्रम में अमेरिका की पहल का अनुसरण कई देशों ने किया है। फिर भी भारत द्वारा कैप्शनिंग को अनिवार्य करना दो कारणों से महत्त्वपूर्ण है:
    • दक्षिणी देशों में कैप्शनिंग को लागू करने वाला भारत पहला प्रमुख देश है। उल्लेखनीय है कि भारत के अलावा ऐसा करने वाला एक अन्य दक्षिणी देश ब्राज़ील है।
    • भारत ऐसा पहला देश है जिसने साक्षरता के लिये कैप्शनिंग या समान भाषा उप-शीर्षक (SLS) को बड़े पैमाने पर महत्त्व दिया है।

उद्देश्य

  • सतत् विकास लक्ष्य संख्या-4 के प्रति भारत ने प्रतिबद्धता व्यक्त की है; जिसमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात कही गई है। चूँकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एक अच्छी रीडिंग स्किल पर निर्भर होती है, अतः इसे SLS के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है।

लाभ: वैज्ञानिक साक्ष्य के अनुसार, SLS लागू करने से भारत को निम्नलिखित लाभ होने की संभावना है-

  • SLS के लागू होने से लगभग एक बिलियन दर्शक और 500 मिलियन कमज़ोर पाठक दैनिक व स्वचालित रूप से पढ़ने का अभ्यास कर सकेंगे।
  • इससे देश के 65 मिलियन मूक-बधिर लोगों तक मीडिया की पहुँच सुनिश्चित हो सकेगी।
  • भारतीय भाषाओं का विकास होगा।

आगे की राह

  • यद्यपि सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने SLS को अनिवार्यता प्रदान करने की एक निर्णायक भूमिका अदा की है परंतु आवश्यकता है कि इसे सभी चैनलों व राज्यों में समान स्तर से क्रियान्वित किया जाना चाहिये।
  • इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा भी सभी डिजिटल ओवर द टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म पर भी SLS की नीति को लागू किया जाना चाहिये।
  • मनोरंजन उद्योग को सभी भारतीय भाषाओं में ऑडियो-विज़ुअल सामग्री के लिये SLS को लागू करके अपनी भूमिका निभानी चाहिये।

निष्कर्ष:

शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट (Annual Status of Education Report-ASER) के अनुसार, भारतीय ग्रामीण क्षेत्र के पाँचवीं कक्षा के स्कूली छात्र वर्ग-2 की किताबों को पढ़ने में असमर्थ हैं। FICCI-EY Media and Entertainment Report-2019 के मुताबिक, भारत में 24% लोग फिल्म देखते हैं तथा 53% लोग सामान्य मनोरंजन के साधनों का उपयोग करते हैं। स्पष्टत: कहा जा सकता है कि SLS के माध्यम से देश की बड़ी आबादी की रीडिंग स्किल को बढ़ाया जा सकता है।

स्रोत: द हिंदू

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