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राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान

  • 19 Feb 2022
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

केंद्र प्रायोजित योजना, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान।

मेन्स के लिये:

शिक्षा एवं संबंधित योजनाएँ।

चर्चा में क्यों?

सरकार ने ‘राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान’ (RUSA) की योजना को 31 मार्च, 2026 तक या अगली समीक्षा तक (जो भी पहले हो) जारी रखने की मंज़ूरी दे दी है।

  • इस प्रस्ताव में लगभग 12929.16 करोड़ रुपए का परिव्यय शामिल है, जिसमें से केंद्र का हिस्सा 8120.97 करोड़ रुपए और राज्य का हिस्सा 4808.19 करोड़ रुपए होगा। योजना के नए चरण के तहत लगभग 1600 परियोजनाओं को समर्थन देने की परिकल्पना की गई है।

राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान:

  • यह अक्तूबर 2013 में शुरू की गई केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य पूरे भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों को रणनीतिक वित्तपोषण प्रदान करना है।
  • केंद्रीय वित्तपोषण (सामान्य श्रेणी के राज्यों के लिये 60:40 के अनुपात में, विशेष श्रेणी के राज्यों के लिये 90:10 के अनुपात में और केंद्रशासित प्रदेशों के लिये 100%) मानदंड और परिणाम आधारित है।
  • इस कार्यक्रम के तहत वित्तपोषण की राशि विशिष्ट संस्थानों तक पहुँचने से पूर्व राज्य सरकारों/केंद्रशासित प्रदेशों के माध्यम से ‘राज्य उच्च शिक्षा परिषदों’ को प्रदान की जाती है।
    • विभिन्न राज्यों को वित्तपोषण ‘राज्य उच्च शिक्षा योजनाओं’ के मूल्यांकन के आधार पर किया जाएगा, जो उच्च शिक्षा में समानता, पहुँच एवं उत्कृष्टता के मुद्दों को संबोधित करने हेतु प्रत्येक राज्य की रणनीति का वर्णन करेगा।

नए चरण में परिकल्पना:

  • रूसा के नए चरण का लक्ष्य सुविधा से वंचित क्षेत्रों, अपेक्षाकृत कम सुविधा वाले क्षेत्रों, दूरदराज़/ग्रामीण क्षेत्रों, कठिन भौगोलिक स्थिति वाले क्षेत्रों, वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित क्षेत्रों, उत्तर पूर्वी क्षेत्रों (एनईआर), आकांक्षी ज़िलों, द्वितीय श्रेणी (टियर-2) के शहरों, कम जीईआर वाले क्षेत्रों आदि तक पहुँच स्थापित करना और सतत् विकास लक्ष्यों का लाभ प्रदान करना है।
  • इस योजना के नए चरण को नई शिक्षा नीति की उन सिफारिशों और उद्देश्यों को लागू करने के लिये डिज़ाइन किया गया है, जो वर्तमान उच्च शिक्षा प्रणाली में कुछ महत्त्वपूर्ण बदलावों का सुझाव देते हैं ताकि प्रणाली में सुधार लाकर इसे फिर से सक्रिय किया जा सके और समानता एवं समावेशन के साथ गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की सुविधा प्रदान की जा सके।
  • इस योजना के नए चरण के तहत लैंगिक समावेशन, समानता संबंधी पहल, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी), व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल उन्नयन के माध्यम से रोज़गार बढ़ाने के लिये राज्य सरकारों को सहायता प्रदान की जाएगी।
  • राज्य सरकारों को नए मॉडल डिग्री कॉलेज बनाने के लिये भी सहयोग दिया जाएगा।  
  • बहु-विषयक शिक्षा और अनुसंधान के लिये राज्य के विश्वविद्यालयों को सहायता दी जाएगी।  
  • भारतीय भाषाओं में सिखाने-सीखने सहित विभिन्न गतिविधियों के लिये मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों को मज़बूती प्रदान करने के उद्देश्य से अनुदान प्रदान किया जाएगा।

उद्देश्य:

  • राज्य संस्थानों की समग्र गुणवत्ता में निर्धारित मानदंडों और मानकों के अनुरूप सुधार करना।
  • एक अनिवार्य गुणवत्ता आश्वासन ढाँचे (योग्यता का प्रमाणन) को अपनाना।
  • राज्य विश्वविद्यालयों में स्वायत्तता को बढ़ावा देना और संस्थानों के शासन में सुधार करना।
  • संबद्धता, शैक्षणिक और परीक्षा प्रणाली में सुधार सुनिश्चित करना।
  • सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता युक्त संकायों की उपलब्धता और रोज़गार के सभी स्तरों पर क्षमता निर्माण सुनिश्चित करना।
  • उच्च शिक्षा प्रणाली में अनुसंधान के लिये एक सक्षम वातावरण बनाना।
  • उच्च शिक्षा की पहुँच से अछूते क्षेत्रों में संस्थानों की स्थापना कर क्षेत्रीय असंतुलन को समाप्त करना।
  • उच्च शिक्षा के क्षेत्र में वंचितों को पर्याप्त अवसर प्रदान कर इस क्षेत्र में पक्षपात को समाप्त करना।

स्रोत: पी.आई.बी.

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