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रेयर अर्थ धातु और चीन का एकाधिकार

  • 15 Jun 2021
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये:

क्वाड, रेयर अर्थ तत्त्व

मेन्स के लिये:

रेयर अर्थ तत्त्वों का महत्त्व और चीन की उसके एकाधिकार संबंधी चुनौतियाँ

चर्चा में क्यों?

विनिर्माण के भविष्य की कुंजी रेयर अर्थ धातुओं पर चीन का प्रभुत्व पश्चिम के लिये एक प्रमुख चिंता का विषय है।

Rare-Earth-Metals

प्रमुख बिंदु:

चीन का एकाधिकार:

  • चीन ने समय के साथ रेयर अर्थ धातुओं पर वैश्विक प्रभुत्व हासिल कर लिया है, यहाँ तक ​​कि एक बिंदु पर इसने दुनिया की 90% रेयर अर्थ धातुओं का उत्पादन किया है।
  • वर्तमान में हालाँकि यह 60% तक कम हो गया है और शेष अन्य देशों द्वारा उत्पादित किया जाता है, जिसमें क्वाड (ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका) शामिल हैं।
  • वर्ष 2010 के बाद जब चीन ने जापान, अमेरिका और यूरोप को रेयर अर्थ्स शिपमेंट पर रोक लगा दी, तो एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में छोटी इकाइयों के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया एवं अमेरिका में उत्पादन इकाइयाँ शुरू की गई हैं।
  • फिर भी संसाधित रेयर अर्थ धातुओं का प्रमुख हिस्सा चीन के पास है।

चीन पर भारी निर्भरता (भारत और विश्व):

  • भारत में रेयर अर्थ तत्त्वों का दुनिया का पाँचवाँ सबसे बड़ा भंडार है, जो ऑस्ट्रेलिया से लगभग दोगुना है, लेकिन यह चीन से अपनी अधिकांश रेयर अर्थ धातुओं की ज़रूरतों को तैयार रूप में आयात करता है।
  • वर्ष 2019 में अमेरिका ने अपने रेयर अर्थ खनिजों का 80% चीन से आयात किया, जबकि यूरोपीय संघ को इसकी आपूर्ति का 98% चीन से मिलता है।
  • भारत के लिये अवसर: भारत की रेयर अर्थ क्षमता को अधिकतम करने के लिये तीन संभावित दृष्टिकोण हैं।
  • रेयर अर्थ के लिये नया विभाग (DRE):
    • भारत को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत रेयर अर्थ (DRE) के लिये नया विभाग बनाना चाहिये जो अपस्ट्रीम क्षेत्र में सुविधाएँ स्थापित करने हेतु कंपनियों को व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण की पेशकश करके सामरिक महत्त्व के रेयर अर्थ तत्त्वों (REEs) तक पहुँच सुरक्षित कर सके।
    • यह भारतीय रेयर अर्थऑक्साइड (REOs) को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्द्धी बना सकता है।
  • डाउनस्ट्रीम प्रक्रियाएँ और अनुप्रयोग:
    • वैकल्पिक रूप से यह डाउनस्ट्रीम प्रक्रियाओं और अनुप्रयोगों पर ध्यान केंद्रित कर सकता है, जैसे कि रेयर अर्थ चुंबक और बैटरी का निर्माण।
    • इसके लिये बंदरगाह के बुनियादी ढाँचे और व्यापार करने में आसानी जैसे उपायों पर ध्यान देने की आवश्यकता होगी ताकि भारतीय निर्माताओं को सूचीबद्ध उत्पादकों से सस्ते में REOs आयात करने की अनुमति मिल सके।
  • अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय:
    • अंत में यह क्वाड जैसे समूहों के साथ सीधे साझेदारी करने के लिये अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय कर सकता है, यह वैश्विक आपूर्ति संकट के खिलाफ एक बफर के रूप में रणनीतिक रिज़र्व का निर्माण कर सकता है।
      • मौजूदा नीति में समायोजन के साथ भारत दुनिया के लिये एक दुर्लभ मिट्टी आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर सकता है और इन संसाधनों का उपयोग 21वीं सदी की ज़रूरतों हेतु तैयार एक उच्च अंत विनिर्माण अर्थव्यवस्था को शक्ति प्रदान करने के लिये कर सकता है।

रेयर अर्थ तत्त्व (REE)

  • यह 17 दुर्लभ धातु तत्त्वों का समूह है। इसमें आवर्त सारणी में मौजूद 15 लैंथेनाइड और इसके अलावा स्कैंडियम तथा अट्रियम शामिल हैं, जो लैंथेनाइड्स के समान ही भौतिक एवं रासायनिक गुण प्रदर्शित करते हैं।
  • 17 दुर्लभ तत्त्वों में सीरियम (Ce), डिसप्रोसियम (Dy), अर्बियम (Er), युरोपियम (Eu), गैडोलीनियम (Gd), होल्मियम (Ho), लैंथेनम (La), ल्यूटेशियम (Lu), नियोडिमियम (Nd), प्रेजोडायमियम (Pr), प्रोमीथियम (Pm), समेरियम (Sm), स्कैंडियम (Sc), टर्बियम (Tb), थ्यूलियम (Tm), इटरबियम (Yb) और अट्रियम (Y) शामिल हैं।
  • इन खनिजों में अद्वितीय चुंबकीय, ल्यूमिनिसेंट और विद्युत रासायनिक गुण मौजूद रहते हैं और इस प्रकार ये तत्त्व उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर और नेटवर्क, संचार, स्वास्थ्य देखभाल, राष्ट्रीय रक्षा आदि सहित विभिन्न क्षेत्रों में काफी महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं।
  • यहाँ तक ​​​​कि भविष्य की प्रौद्योगिकियों के लिये भी ये तत्त्व काफी महत्त्वपूर्ण हैं (उदाहरण के लिये उच्च तापमान सुपरकंडक्टिविटी, पोस्ट-हाइड्रोकार्बन अर्थव्यवस्था के लिये हाइड्रोजन का सुरक्षित भंडारण एवं परिवहन, पर्यावरण ग्लोबल वार्मिंग और ऊर्जा दक्षता आदि)।
  • इन्हें ‘दुर्लभ’ तत्त्व कहा जाता है, क्योंकि पूर्व में इन्हें तकनीकी रूप से इनके ऑक्साइड स्वरूप से निकालना काफी मुश्किल था। 
  • ये कई खनिजों में मौजूद होते हैं, लेकिन प्रायः कम सांद्रता में किफायती तरीके से परिष्कृत किये जाते हैं।

Rare-Earth

रेयर अर्थ तत्त्वों पर भारत की मौजूद नीति

  • वर्तमान में भारत में दुर्लभ तत्त्वों का अन्वेषण ‘भारतीय खान ब्यूरो’ और ‘परमाणु ऊर्जा विभाग’ द्वारा किया जा रहा है।
  • पूर्व में इन तत्त्वों के खनन और प्रसंस्करण संबंधी कार्य कुछ छोटी निजी कंपनियों द्वारा किया जाता था, लेकिन वर्तमान में यह कार्य परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत आईआरईएल (इंडिया) लिमिटेड (पूर्व में इंडियन रेयर अर्थ लिमिटेड) द्वारा किया जा रहा है।
  • भारत ने आईआरईएल (IREL) जैसे सरकारी निगमों को प्राथमिक खनिज जैसे- दुर्लभ तत्त्वों और कई तटीय राज्यों में पाए जाने वाले मोनाजाइट समुद्र तट रेत आदि पर एकाधिकार प्रदान किया है।
  • IREL रेयर अर्थ ऑक्साइड (अल्प लागत वाली ‘अपस्ट्रीम’ प्रक्रिया) का उत्पादन करता है और इन्हें विदेशी फर्मों को बेचता है, जो धातुओं को निकालती हैं और अंतिम उत्पादों (उच्च लागत वाली ‘डाउनस्ट्रीम प्रक्रिया) का निर्माण करती हैं।
  • IREL का फोकस मोनाजाइट से निकाले गए थोरियम को परमाणु ऊर्जा विभाग को उपलब्ध कराना है।

स्रोत: द हिंदू

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