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Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 20 जुलाई, 2020

  • 20 Jul 2020
  • 8 min read

प्लाज़्मा दान अभियान

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने दिल्ली स्थित एम्स (AIIMS) अस्पताल में ‘प्लाज़्मा दान अभियान’ की शुरुआत की है। इस अभियान की सह-आयोजक दिल्ली पुलिस है और इस दौरान दिल्ली पुलिस के COVID-19 से स्वस्थ हुए 26 पुलिसकर्मियों ने अपनी स्वेच्छा से प्लाज़्मा दान भी किया। गौरतलब है कि इस दौरान दिल्ली पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि देश भर में COVID-19 महामारी के प्रसार रोकने को रोकने में सभी पुलिसकर्मियों ने महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की है। ध्यातव्य है कि दिल्ली में इस महामारी से लड़ते हुए 12 से अधिक पुलिसकर्मियों की मृत्यु हो गई है। गौरतलब है कि COVID-19 से ठीक हुए रोगियों से प्राप्त प्लाज़्मा कोरोना वायरस (COVID-19) के लिये सुरक्षात्मक एंटीबॉडी होती है। जब इसे संक्रमित व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कराया जाता है तब यह COVID-19 के रोगियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न कर सकता है। इसके संभावित लाभ को ध्यान में रखते हुए, प्लाज़्मा थैरेपी उन रोगियों को प्रदान की जाती है जो पारंपरिक उपचार से ठीक नहीं हो पा रहे हैं। कोई भी व्यक्ति जो COVID-19 से ठीक हो चुका है, और उपचार या होम आइसोलेशन के बाद 28 दिन पूरा कर चुका है, वह अपने रक्त प्लाज़्मा को दान कर सकता है। ध्यातव्य है कि प्लाज़्मा दान की प्रक्रिया 1-3 घंटे में पूरी हो जाती है और उसी दिन प्लाज़्मा को एकत्रित किया जा सकता है।

सी. एस. शेषाद्रि

हाल ही में प्रख्यात गणितज्ञ सी. एस. शेषाद्रि (C.S. Seshadri) का 88 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। इस अवसर पर शोक व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा कि ‘‘प्रोफेसर सी. एस. शेषाद्रि के निधन से हमने एक महान बुद्धिजीवी को खो दिया है, जिन्होंने गणित में शानदार कार्य किये।’ सी. एस. शेषाद्रि का जन्म 29 फरवरी, 1932 को तमिलनाडु के कांचीपुरम में हुआ था। वर्ष 1953 में गणित में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात् उन्होंने वर्ष 1958 में पीएचडी (PhD) की डिग्री हासिल की, जिसके बाद उन्होंने एक शिक्षक के तौर पर टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) से अपने कैरियर की शुरुआत की। वर्ष 1984 में वे चेन्नई में इंस्टीट्यूट ऑफ मैथमेटिकल साइंसेज़ (Institute of Mathematical Sciences) में शामिल हो गए, जिसके बाद वर्ष 1989 में उन्हें SPIC साइंस फाउंडेशन के तहत ‘स्कूल ऑफ मैथमेटिक्स’ शुरू करने का अवसर मिला, जो कि आगे चलकर चेन्नई गणित संस्थान (CMI) के रूप में विकसित हुआ है। CMI एक ऐसे अनूठे संस्थान के रूप में उभरा जो स्नातक स्तर की शिक्षा को अनुसंधान के साथ एकीकृत करने का प्रयास रहा है। प्रो. शेषाद्रि को बीजीय ज्यामिति (Algebraic Geometry) में उनके कार्य के लिये काफी सराहना मिली और उन्हें विभिन्न सम्मानों से सम्मानित किया गया।  उन्हें वर्ष 1988 में रॉयल सोसाइटी का फेलो चुना गया और वर्ष 2009 में पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था।

‘मेडिकैब’ (MediCAB)

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-मद्रास (IIT-M) द्वारा समर्थित एक स्टार्ट-अप ने ‘मेडिकैब’ (MediCAB) नाम से एक पोर्टेबल अस्पताल इकाई विकसित की है जिसे चार लोगों द्वारा मात्र दो घंटे के भीतर कहीं भी स्थापित किया जा सकता है। ‘मेडिकैब’ (MediCAB) को हाल ही में केरल के वायनाड ज़िले में लॉन्च किया गया है, जहाँ इसका प्रयोग COVID-19 से संक्रमित रोगियों के इलाज हेतु किया जाएगा। ‘मेडिकैब’ (MediCAB) में कुल चार प्रकार के ज़ोन बने हुए हैं, इसमें एक डॉक्टर का कमरा, एक आइसोलेशन रूम, एक मेडिकल रूम और एक दो-बेड वाला ICU शामिल हैं। यह पोर्टेबल अस्पताल इकाई परिवहन की दृष्टि से भी काफी किफायती है और इसे आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है। यह पोर्टेबल अस्पताल इकाई मौजूदा समय में महामारी से लड़ने में काफी मददगार साबित हो सकती है, साथ ही यह आने वाले समय में भारत की चिकित्सा अवसंरचना को मज़बूत करने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। गौरतलब है कि मौजूदा COVID-19 महामारी ने भारत समेत विश्व के विभिन्न देशों में आवश्यक चिकित्सा अवसंरचना की कमी को उजागर किया है और देश में आम लोगों को बुनियादी चिकित्सीय सुविधाएँ भी नहीं मिल पा रही है, ऐसे में आवश्यक है कि इस चुनौती से निपटने के लिये नवीनतम तकनीक पर ज़ोर दिया जाए।

तापमान में कमी के साथ COVID-19 के मामलों में भी वृद्धि 

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान- भुवनेश्वर (IIT-Bhubaneswar) और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान-भुवनेश्वर (AIIMS-Bhubaneswar) द्वारा किये गए संयुक्त शोध के अनुसार, सर्दियों के दौरान तापमान में गिरावट कोरोना वायरस (COVID-19) के प्रसार में लाभदायक साबित हो सकती है। दोनों संस्थानों द्वारा किये गए शोध के अनुसार, सतह पर हवा का तापमान COVID-19 महामारी और इसके प्रसार से काफी निकटता से संबंधित है। शोध में सामने आया है कि कम तापमान और उच्च आर्द्रता वायरस के प्रसार में लाभदायक हैं, जबकि तापमान में वृद्धि से COVID-19 के मामलों में कमी देखने को मिलती है। गौरतलब है कि इस शोध के दौरान मुख्य तौर पर शोधकर्त्ताओं ने राष्ट्रीय स्तर पर COVID-19 और तापमान, सापेक्षिक आर्द्रता तथा सौर विकिरण जैसे पर्यावरणीय कारकों के बीच संबंधों का निरीक्षण करने का प्रयास किया था। इस शोध से स्पष्ट है कि मानसून के बाद सर्दियों में तापमान में कमी आने के साथ ही स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं और नीति निर्माताओं के लिये नियंत्रण उपायों को लागू करना काफी चुनौतीपूर्ण होगा।

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