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डेली अपडेट्स

अंतर्राष्ट्रीय संबंध

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक से संबंधित विभिन्न पक्ष एवं उनके समाधान

  • 03 Jan 2018
  • 9 min read

चर्चा में क्यों?
लोकसभा द्वारा राष्ट्रीय मेडिकल आयोग विधेयक National Medical Commission Bill को पुनर्विचार के लिये स्थायी समिति के पास भेजा गया है। हालाँकि, यदि इस विधेयक के संदर्भ में गंभीरता से विचार किया जाए तो यह फैसला सही प्रतीत होता है। वर्ष 2016 में प्रस्तावित इस विधेयक का उद्देश्य चिकित्सकीय शिक्षा और अभ्यास को नियंत्रित करने वाली मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया  (Medical Council of India) में आवश्यक सुधार लाना है। 

विधेयक में वर्णित महत्त्वपूर्ण बिंदु
इस विधेयक के अंतर्गत भारतीय मेडिकल काउंसिल एक्ट, 1956 को निरस्त करने तथा ई.एस.आई. चिकित्सकीय शिक्षा प्रणाली को विकसित करने का प्रयास किया गया है जिसके अंतर्गत 

  • पर्याप्त एवं उच्च योग्यता वाले मेडिकल प्रोफेशनलों की उपलब्धता, 
  • मेडिकल प्रोफेशनलों द्वारा नवीनतम मेडिकल अनुसंधानों का उपयोग, 
  • संस्थानों का नियत समय पर आकलन, 
  • एक प्रभावी शिकायत प्रणाली की स्थापना की बात कही गई है।

राष्ट्रीय मेडिकल कमीशन(National Medical Commission )

  • विधेयक के अंतर्गत एक राष्ट्रीय मेडिकल कमीशन के गठन की बात कही गई है। विधेयक के पास होने के 3 वर्षों के अंदर राज्य सरकारों द्वारा इस कमीशन का गठन किया जाएगा।
  • इस कमीशन के तहत 25 सदस्य शामिल होंगे जिनकी नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी।
  • इनका कार्यकाल अधिकतम 4 वर्षों का होगा।

कार्य

  • मेडिकल संस्थानों एवं प्रोफेशनलों को विनियमित करने हेतु नीतियाँ बनना।
  • स्वास्थ्य सेवा से संबंधित मानव संसाधनों एवं बुनियादी आवश्यकताओं पर ध्यान देना।
  • विधेयक के अंतर्गत विनियमित प्राइवेट मेडिकल संस्थानों और मानद विश्वविद्यालयों की अधिकतम सीटों की फीस तय करने हेतु दिशा-निर्देश जारी करना।

मेडिकल एड्वाइज़री काउन्सिल (Medical Advisory Council)

  • इसके अतिरिक्त उक्त विधेयक के अंतर्गत एक मेडिकल एड्वाइज़री काउन्सिल के गठन की भी बात की गई है. उह इस विधेयक का एक बहुत अहम् हिस्सा है। 
  • इसके माध्यम से राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा एन.एम.सी. से संबंधित अपने विचार एवं चिंताओं को साझा किया जाएगा। 
  • इसके साथ-साथ यह सभी के लिये समान चिकित्सकीय सुविधा सुनिश्चित करने हेतु एक सलाहकारी भूमिका का निर्वाह करेगा।

स्वायत्त बोर्ड (Autonomous boards)

  • एन.एम.सी. की निगरानी हेतु तीन स्वायत्त बोर्डों का गठन किया जाएगा।
    ⇒ यू.जी.एम.ई.बी. (the Under-Graduate Medical Education Board – UGMEB) और पी.जी,.एम.ई.बी. (Post-Graduate Medical Education Board - PGMEB)
    ⇒ एम.ए.आर.बी. ( the Medical Assessment and Rating Board – MARB)
    ⇒ एथिक्स और मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड (the Ethics and Medical Registration Board)
  • प्रत्येक बोर्ड में केद्र सरकार द्वारा नियुक्त एक अध्यक्ष एवं दो सदस्य होंगे।

प्रवेश की प्रक्रिया क्या होगी?

  • इस विधेयक के तहत विनियमित सभी संस्थानों में यू.जी. मेडिकल शिक्षा में प्रवेश करने के लिये नीट (National Eligibility-cum-Entrance Test)  की व्यवस्था की गई है। 
  • इन सभी मेडिकल संस्थानों में प्रवेश हेतु कॉमन काउंसलिंग का तरिका एन.एम.सी. द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाएगा
  • मेडिकल संस्थानों से यू.जी. करने वाले विद्यार्थियों को प्रेक्टिस के लिये आवश्यक लाइसेंस प्राप्त करने के लिये एन.एल.ई. (National Licentiate Examination – NLE) का हिस्सा बनना होगा।

राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य नीति, 2017 

  • राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य नीति, 2017 के अंतर्गत विविध हितधारकों के साथ विस्‍तृत विचार-विमर्श, क्षेत्रीय परामर्श, स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण को केंद्रीय परिषद और मंत्रियों के समूह के अनुमोदन की आवश्‍यकता पर बल दिया गया है। 
  • इस नीति में वर्ष 2025 तक जन स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यय को उत्‍तरोत्‍तर जीडीपी के 2.5% तक बढ़ाने की परिकल्‍पना की गई है। राज्य सरकारों से स्‍वास्‍थ्‍य के लिये उनके बजट परिव्‍यय को बढ़ाने का भी अनुरोध किया गया है। 
  • राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य नीति, 2017 को लागू करने के लिये एक प्रारूप क्रियान्‍वयन ढाँचा भी तैयार किया गया है। 

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • देश के नागरिकों विशेषकर गरीबों कों वहनीय स्‍वास्‍थ्‍य परिचर्या सेवाएँ प्रदान करने के लिये सरकार द्वारा अनेक कदम उठाए गए हैं जिनमें अन्‍य बातों के साथ-साथ निम्‍नलिखित पक्षों को भी शामिल किया गया हैं -
    ⇒ सरकारी स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों में अनिवार्य औषधियाँ और निदान नि:शुल्‍क प्रदान करने के लिये राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन नि:शुल्‍क औषध एवं नि:शुल्‍क नैदानिक पहल का कार्यान्‍वयन करना।
    ⇒ जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम, राष्‍ट्रीय बाल स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम, राष्‍ट्रीय किशोर स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम का कार्यान्‍वयन तथा संशोधित राष्‍ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम, राष्‍ट्रीय वेक्‍टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम, राष्‍ट्रीय कुष्‍ठ रोग उन्‍मूलन कार्यक्रम, राष्‍ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम जैसे कार्यक्रमों का कार्यान्‍वयन करना, जहाँ क्षय रोगियों, एचआईवी, वेक्‍टर जनित रोगों के रोगियों को नि:शुल्‍क उपचार प्रदान किया जाए।
    ⇒ व्यापक प्राथमिक परिचर्या प्रदानगी तथा प्रचारात्मक व स्वास्थ्य संवर्धन कार्यकलाप करने के लिये उप-स्वास्थ्य केन्द्र/पीएचसी को स्वास्थ्य एवं आरोग्य केन्द्रों में बदलने का निर्णय करना।
    ⇒ उच्च रक्त चाप, मधुमेह तथा मुख, गर्भाशय व स्तन कैंसर के 5 सामान्‍य गैर-संचारी रोगों की जाँच व प्रबंधन करना।
    ⇒ ज़िला अस्‍पतालों में गरीबों के लिये नि:शुल्‍क डायलिसिस सेवाओं हेतु प्रधानमंत्री राष्‍ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम।
    ⇒ अस्‍पतालों के सुदृढ़ीकरण, राज्‍यों में एम्‍स संस्‍थाओं की स्‍थापना और पूरे देश में मौजूदा सरकारी चिकित्‍सा कॉलेजों के उन्‍नयन के ज़रिये सरकारी क्षेत्र में तृतीयक स्‍वास्‍थ्‍य परिचर्या सेवाएँ उपलब्‍ध करवाना।
    ⇒ राज्‍य सरकारों के सहयोग से “जन औषधि स्‍कीम” के अंतर्गत सभी के लिये वहनीय मूल्‍यों पर गुणवत्‍ता युक्‍त जेनेरिक दवाइयाँ उपलब्ध करवाना।
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