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सामाजिक न्याय

पुणे में अस्थायी राशन कार्ड की व्यवस्था

  • 20 Apr 2020
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये

अस्थायी राशन कार्ड, COVID-19

मेन्स के लिये

महामारी और आपदा का गरीब वर्ग पर प्रभाव

चर्चा में क्यों?

पुणे ज़िला परिषद (Pune Zilla Parishad) ने ज़िले में 80,000 से अधिक गैर-दस्तावेज़ी (Undocumented) लोगों को अस्थायी ‘राशन कार्ड’ प्रदान करने का निर्णय लिया है, ताकि वे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System-PDS) के तहत खाद्यान्न प्राप्त कर सकें। 

प्रमुख बिंदु

  • पुणे ज़िला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के अनुसार, क्षेत्र विशिष्ट में 80000 से अधिक लोग ऐसे हैं जो आवश्यक दस्तावेज़ प्रस्तुत करने में सक्षम नहीं हैं, इसके अलावा कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनका पास किसी अन्य राज्य का ‘राशन कार्ड’ है। 
  • ज़िला परिषद ने ऐसे लोगों के लिये इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के साथ खाता खोलने हेतु आधार-आधारित प्रमाणीकरण (Aadhaar-Based Authentication) का उपयोग करने की योजना बनाई है।
  • पुणे ज़िला परिषद के अनुसार, लाभार्थियों की पहचान करने का कार्य प्रत्येक गाँव के पुलिस पाटिल (Police Patil) को दिया गया है, जो कि गाँव में आने वाले बाहरी लोगों का रिकॉर्ड रखता है।
  • पुणे ज़िला परिषद की इस योजना के केवल यह सत्यापित किया जाएगा कि लाभार्थी इस योजना का पात्र है अथवा नहीं, यदि वह पात्र होता है तभी उसे अस्थायी राशन कार्ड प्रदान किया जाएगा।
  • लोगों को एक स्थान पर एकत्रित होने से रोकने के लिये ज़िला परिषद राशन की होम डिलीवरी करने की भी योजना बना रही है। अनुमान के अनुसार, इस योजना के तहत लगभग 120 टन अनाज वितरित किया जाएगा।
  • पुणे ज़िला परिषद की यह योजना शरद भोजन योजना (Sharad Bhojan Yojana) के दायरे और पहुँच को बढ़ाएगी, जिसके तहत पुणे ज़िले में लोगों को रियायती दरों पर पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जाता है।

लाभ 

  • उल्लेखनीय है कि महामारी के कारण लागू किये गए लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को सरकारी लाभ पहुँचाने में मदद करने के लिये यह अपनी तरह का पहला नवाचार है।
  • यह योजना ग्राम पंचायत स्तर पर अनाज की होम डिलीवरी को भी सक्षम करेगी और इस योजना से आदिम जनजातियों और ट्रांसजेंडर समुदाय से संबंधित व्यक्तियों को भी लाभ मिल सकेगा, जो प्रायः इस प्रकार के लाभों के दायरे से बाहर रह जाते हैं।
  • कई राज्यों के लिये लॉकडाउन में फँसे प्रवासियों को PDS अनाज समेत अन्य लाभ प्रदान करना बड़ी चुनौती बन गया है, मुख्य तौर पर उन लोगों के संबंध में जो आवश्यक दस्तावेज़ प्रदान करने में असमर्थ हैं। 
  • ध्यातव्य है कि नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन और अभिजीत बनर्जी सहित भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने सुझाव दिया था कि PDS के माध्यम से राशन की सुविधा आम लोगों तक पहुँचाने के लिये सरकार को ‘अस्थायी राशन कार्ड‘ की व्यवस्था करनी चाहिये जिससे लोगों को इस मुश्किल दौर में राहत प्रदान की जा सके। 

लॉकडाउन और खाद्य संकट

  • कोरोनावायरस से संबंधित चिंताएँ देश में प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं, नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, देश में कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 17000 के पार पहुँच गई है और इस वायरस के कारण कुल 559 लोगों की मृत्यु हो गई है।
  • कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिये केंद्र सरकार ने देशव्यापी लॉकडाउन के दूसरे चरण की घोषणा की है, जिसके कारण देश भर में लगभग सभी प्रकार की गतिविधियाँ पूरी तरह से रुक गई हैं, जिसके कारण दैनिक मज़दूर और देश के गरीब वर्ग के लिये अपनी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करना भी चुनौती बन गया है।
  • भारतीय समाज का एक बड़ा वर्ग कोरोनावायरस और इसके कारण लागू किये गए लॉकडाउन से काफी अधिक प्रभावित हुआ है और उसे एक जून के भोजन के लिये भी संघर्ष करना पड़ रहा है।
  • इस संबंध में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इस वर्ग के अधिकांश लोगों के पास सरकार द्वारा किये गए उपायों का लाभ प्राप्त करने हेतु आवश्यक दस्तावेज़ भी नहीं, जिसके कारण वे लाभ प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं।

आगे की राह

  • मौजूदा समय एक गंभीर संकट का समय है और ऐसे समय में आवश्यक है कि एक साथ मिलकर इस महामारी से लड़ने का प्रयास किया जाए और इस संबंध में देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे नवाचारों को सराहा जाए।
  • पुणे ज़िला परिषद द्वारा लागू की गई योजना सराहनीय है, उचित होगा यदि परिषद द्वारा किये जा रहे प्रयासों का यथासंभव अध्ययन किया जाए और इसे आवश्यक परिवर्तन के साथ देशव्यापी स्तर पर लागू करने की व्यवस्था की जाए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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