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प्रीलिम्स फैक्ट्स : 14 दिसंबर, 2017

  • 14 Dec 2017
  • 9 min read

विक्रेताओं और ठेकेदारों के लिये ऑनलाइन बिल ट्रेकिंग प्रणाली

बिलों की पड़ताल और निपटान में पारदर्शिता बढ़ाने के एक अहम् कदम के रूप में हाल ही में भारतीय रेल विभाग द्वारा अपने विक्रेताओं और ठेकेदारों के बिलों की ट्रैकिंग के लिये एक प्रणाली शुरू की है। रेलवे का यह कदम न केवल पारदर्शिता बढ़ाने और प्रणाली को कारगर बनाने में उपयोगी सिद्ध होगा, बल्कि यह सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के संबंध में भी बेहद अहम् होगा।

प्रमुख विशेषताएँ

  • इसके तहत सर्वप्रथम विक्रेताओं/ठेकेदारों को एक ऑनलाइन सूचना प्रौद्योगिकी प्लेटफार्म पर पंजीकरण कराना होगा। 
  • इसे रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (Centre for Railway Information Systems) नई दिल्ली द्वारा विकसित किया गया है।
  • इस प्रणाली का नाम ‘भारतीय रेल ई-खरीद प्रणाली’ (Indian Railways E-Procurement System - IREPS) है। 
  • इसके तहत पंजीकरण कराने के बाद विक्रेताओं और एजेंसियों को अपने बिल की स्थिति, इत्यादि की जानकारी प्राप्त करने में सुविधा होगी। 
  • इस प्लेटफार्म के ज़रिये वे न केवल अपने बिलों के बारे में, रकम और पूरा ब्यौरा प्राप्त कर सकेंगे। बल्कि, विक्रेता जमा किये गए बिलों के पुराने विवरणों के विषय में भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 
  • इस पर बिल के संबंध में हर तरह की खामियों की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अंतर्गत उल्लेखित सभी बिलों को प्राप्ति के 30 दिन के अंदर निपटाने की भी व्यवस्था की गई है।
  • विक्रेताओं की सुविधा के लिये एक सहायता-सुविधा को भी इससे संबद्ध किया गया है। 

वाइट बीयर प्रॉब्लम
(white bear problem)

मनोविज्ञान में वाइट बीयर प्रॉब्लम को विडंबना प्रक्रिया सिद्धांत (ironic process theory) के रूप में भी जाना जाता है। यह उस घटना को संदर्भित करता है जिसमें एक व्यक्ति द्वारा कुछ विचारों को दबाने की प्रक्रिया उन विचारों के वास्तविक रूप में पुनः प्रकट होने का कारण बन सकती है।

  • इसका अर्थ यह है कि किसी विचार को दबाना उससे छुटकारा पाने का कोई सचेत प्रयास साबित नहीं हो सकता है। 
  • इस सिद्धांत को इस प्रकार का नाम देना वाकई एक चुनौतीपूर्ण कार्य रहा, हालाँकि  इसके नामकरण के संबंध में सफेद ध्रुवीय भालू के बारे में विचार नहीं किया गया। 
  • वाइट बीयर की समस्या के संबंध में सर्वप्रथम एक अमेरिकी सामाजिक मनोवैज्ञानिक डैनियल वेग्नर द्वारा वर्ष 1987 में अध्ययन किया गया। 

नौसेना पनडुब्‍बी आई.एन.एस. कलवरी

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा नौसेना की पनडुब्‍बी आई.एन.एस. कलवरी को राष्‍ट्र को समर्पित किया गया। आई.एन.एस. कलवरी एक डीज़ल - इलेक्ट्रिक युद्धक पनडुब्‍बी है, जिसे भारतीय नौसेना के लिये मझगाँव डॉक शिपबिल्‍डर्स लिमिटेड द्वारा बनाया गया है। 

  • इसका नाम हिंद महासागर में पाई जाने वाली टाइगर शार्क के नाम पर रखा गया है, जो एक बेहद आक्रामक समुद्री जीव होती है।
  • यह उन 6 पनडुब्बियों में से पहली पनडुब्‍बी है, जिसे भारतीय नौसेना में शामिल किया गया है। 
  • यह ‘मेक इन इंडिया’ पहल की कामयाबी को दर्शाती है। इस परियोजना को फ्राँस के सहयोग से चलाया जा रहा है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • कलवरी एक ऐसी शक्तिशाली पनडुब्बी है जो समुद्री युद्ध के पूरे स्पेक्ट्रम में आक्रामक अभियान चला सकती है। यह अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का प्रतीक है। 
  • इसकी कुल लंबाई 67.5 मीटर है और ऊँचाई लगभग 12.3 मीटर है। 
  • इसे विशेष रूप से न्यूनतम पानी के नीचे प्रतिरोध का निर्माण करने के लिये डिज़ाइन किया गया है। इसकी 360 बैटरी सेल्स (प्रत्येक का वज़न 750 किलोग्राम है) अत्यंत शांत स्थायी चुंबकीय प्रणोदन मोटर (Permanently Magnetised Propulsion Motor) वाली है।
  • इस पनडुब्बी की समुद्र के अंदर युद्ध क्षमता में उन्नत हथियारों के एक क्लस्टर और एस.ओ.बी.टी.आई.सी.एस. (Submarine Tactical Integrated Combat System - SUBTICS) में संलग्नित एकीकृत सेंसर शामिल हैं। 
  • इसकी सोनार प्रणाली लोफार (Low Frequency Analysis and Ranging - LOFAR) प्रणाली युक्त  है जो लंबे समय तक न केवल युद्ध का सामना करने में सक्षम बल्कि युद्ध में शामिल हथियारों को वर्गीकृत भी कर सकती है। 
  • अपनी इसी वर्गीकरण करने की क्षमता के कारण यह एस.एम. 39 एक्सोसट (SM 39 EXOCET) मिसाइल (फ्रेंच में फ्लाइंग फिश) या भारी वज़न वाली वायर गाइडेड सतह और अंडरवाटर टारगेट टॉरपीडो (Surface and Underwater Target -SUT torpedoes) का उपयोग करके दुश्मन को घेरने में सक्षम है। 
  • आत्म-रक्षा के संदर्भ में यह मोबाइल सी303/एस एंटी - टॉरपीडो डेकोस (C303/S anti-torpedo decoys) से युक्त है।
  • इसके अतिरिक्त यह पनडुब्बी एक उच्च उन्नत लड़ाकू प्रबंधन प्रणाली (Highly advanced Combat Management System) और एक परिष्कृत एकीकृत प्लेटफॉर्म प्रबंधन प्रणाली (sophisticated Integrated Platform Management System) का भी दावा प्रस्तुत करती है।

विश्व पर्यटन संगठन
(World Tourism Organization)

विश्व पर्यटन संगठन (World Tourism Organization - UNWTO) संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी है जो ज़िम्मेदार, टिकाऊ और सार्वभौमिक रूप से सुलभ पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये उत्तरदायी  है।

सदस्य

  • यू.एन.डब्लू.टी.ओ. के सदस्य देशों में निजी क्षेत्र, शैक्षिक संस्थानों, पर्यटन संगठनों और स्थानीय पर्यटन प्राधिकरणों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों में 158 देश, 6 एसोसिएट सदस्य और 500 से अधिक संबद्ध सदस्य शामिल हैं।

प्रमुख बिंदु

  • पर्यटन के क्षेत्र में प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संगठन के रूप में यू.एन.डब्लू.टी.ओ. न केवल आर्थिक विकास, समसामयिक विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के चालक के रूप में पर्यटन को बढ़ावा देता है, बल्कि साथ ही दुनिया भर में ज्ञान और पर्यटन नीतियों को आगे बढ़ाने हेतु इस क्षेत्र को नेतृत्व और समर्थन भी प्रदान करता है।
  • यू.एन.डब्लू.टी.ओ. पर्यटन की वैश्विक आचार संहिता (Global Code of Ethics for Tourism) के कार्यान्वयन को प्रोत्साहित करता है।
  • इससे पर्यटन के सामाजिक-आर्थिक योगदान को अधिकतम किया जा सकता है, ताकि इसके संभावित नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सके।
  • इसके अतिरिक्त यह गरीबी को कम करने के लिये तैयार किये गए सतत् विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals - SDGs) को प्राप्त करने में एक साधन के रूप में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये प्रतिबद्ध है। 
  • वस्तुतः इसका उद्देश्य दुनिया भर में सतत् विकास को बढ़ावा देना है।
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