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सुरक्षा

सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची

  • 03 Jun 2021
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये

रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया, 2020; डिफेंस इंडिया स्टार्टअप चैलेंज, आयुध निर्माणी बोर्डों का निगमीकरण, रक्षा औद्योगिक गलियारा, नकारात्मक आयात सूची

मेन्स के लिये

भारतीय रक्षा क्षेत्र: चुनौती और संभावनाएँ, रक्षा क्षेत्र संबंधी FDI नीति

चर्चा में क्यों?

हाल ही में रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) ने 108  वस्तुओं की दूसरी ‘नकारात्मक आयात सूची’ (Negative Import List) जारी की, जिसका नाम परिवर्तित कर अब ‘सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची‘ (Positive Indigenisation List) कर दिया गया है।

प्रमुख बिंदु

दूसरी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची के विषय में:

  • खरीद: सभी 108 वस्तुओं की खरीद अब रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (Defence Acquisition Procedure- DAP), 2020 में दिये गए प्रावधानों के अनुसार स्वदेशी स्रोतों से की जाएगी।
  • समय-सीमा: इसे दिसंबर 2021 से दिसंबर 2025 तक प्रभावी रूप से लागू करने की योजना है।
  • शामिल वस्तुएँ:
    • इस सूची में सेंसर, सिम्युलेटर, हथियार और गोला-बारूद जैसे- हेलीकॉप्टर, नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) सिस्टम, टैंक इंजन, मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (MRSAM) आदि को शामिल किया गया है।
  • संभावित लाभ:
    • यह आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) प्राप्त करने और रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के दोहरे उद्देश्यों को पूरा करने के लिये सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी के साथ स्वदेशीकरण को बढ़ावा देगी।
    • इसमें गोला-बारूद के आयात प्रतिस्थापन पर विशेष ध्यान दिया गया है।
    • यह सूची न केवल स्थानीय रक्षा उद्योग की क्षमता को महत्त्व देती है, बल्कि प्रौद्योगिकी और विनिर्माण क्षमताओं में नए निवेश को आकर्षित करके घरेलू अनुसंधान तथा विकास को भी गति प्रदान करेगी।
    • यह सूची 'स्टार्ट-अप' के लिये एक उत्कृष्ट अवसर भी प्रदान करती है, क्योंकि इस पहल से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को अत्यधिक बढ़ावा मिलेगा।

रक्षा उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये अन्य पहलें:

  • घरेलू क्षेत्र के लिये बढ़ा हुआ पूंजी अधिग्रहण बजट: रक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2021-22 के पूंजी अधिग्रहण बजट के अंतर्गत अपने आधुनिकीकरण कोष के लगभग 64% (70,221 करोड़ रुपए) घरेलू क्षेत्र से खरीदने का निर्णय लिया है।
    • वित्त वर्ष 2020-21 के लिये घरेलू विक्रेताओं हेतु पूंजी बजट आवंटन 58% (52,000 करोड़ रुपया) किया गया था।
  • रक्षा औद्योगिक गलियारा: भारत ने "मेक इन इंडिया" कार्यक्रम को बढ़ावा देने के बदले में निवेश को आकर्षित करने और साथ ही रोज़गार सृजन को प्रोत्साहित करने के लिये दो रक्षा औद्योगिक गलियारों (एक तमिलनाडु में और दूसरा उत्तर प्रदेश में) का उद्घाटन किया है।
    • केंद्र सरकार ने स्वचालित मार्ग के अंतर्गत रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा 49% से बढ़ाकर 74% और सरकारी मार्ग से 74% से अधिक कर दी है।
  • आयुध निर्माणी बोर्डों का निगमीकरण: यह बेहतर प्रबंधन के लिये घोषित किया गया था, ताकि इन्हें शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध किया जा सके और लोग इनके शेयर खरीद सकें।
  • डिफेंस इंडिया स्टार्टअप चैलेंज: इसका उद्देश्य राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में प्रोटोटाइप बनाने और/या उत्पादों/समाधानों का व्यवसायीकरण करने के लिये स्टार्ट-अप/एमएसएमई/इनोवेटर्स का समर्थन करना है।
    • इसे रक्षा मंत्रालय ने अटल इनोवेशन मिशन (Atal Innovation Mission) के साथ साझेदारी में लॉन्च किया है।
  • सृजन पोर्टल: यह वन स्टॉप शॉप ऑनलाइन पोर्टल है जो विक्रेताओं को स्वदेशी वस्तुओं तक पहुँच प्रदान करता है।

रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया, 2020

  • यह उन हथियारों या प्लेटफार्मों की सूची की अधिसूचना को सक्षम बनाता है जिन्हें आयात के लिये प्रतिबंधित किया जाएगा।
  • यह रक्षा निर्माण और विनिर्माण कीमतों के स्वदेशीकरण (Indigenization of the Manufacturing Price) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर केंद्रित है।
  • यह कई नए विचारों को भी प्रस्तुत करती है जैसे कि प्लेटफॉर्मों और प्रणालियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को शामिल करने की आवश्यकता, रक्षा उपकरणों में स्वदेशी सॉफ्टवेयर का उपयोग तथा स्टार्ट-अप एवं एमएसएमई द्वारा रक्षा अधिग्रहण की एक नई श्रेणी के रूप में 'नवाचार'।
  • इसमें निम्नलिखित खरीद श्रेणियाँ शामिल हैं: स्वदेशी रूप से विकसित और निर्मित खरीदें, विदेशी द्वारा भारत में विकसित और निर्मित खरीदें।
    • इसने सभी श्रेणियों में स्वदेशी सामग्री (Indigenous Content- IC) की आवश्यकता को 40% से बढ़ाकर 50% कर दिया गया है, जिसे सामग्री के आधार पर 50% से 60% भी किया जा सकेगा।
    • केवल भारतीय कंपनियों से खरीद के माध्यम से विदेशी विक्रेताओं के पास 30% स्वदेशी सामग्री हो सकती है।

IC-Requirement

आगे की राह

  • रक्षा मंत्रालय, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation- DRDO) तथा सेवा मुख्यालय यह सुनिश्चित करने के लिये सभी आवश्यक कदम उठाएंगे कि सूची में उल्लेखित समय-सीमा का पालन हो।
    • इससे सरकार के 'मेक इन इंडिया' विज़न में भारतीय रक्षा निर्माताओं को विश्व स्तरीय बुनियादी ढाँचा तैयार करने, भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और निकट भविष्य में रक्षा निर्यात की क्षमता विकसित करने से मदद मिलेगी।
  • रक्षा मंत्रालय द्वारा 'रक्षा उत्पादन और निर्यात संवर्द्धन नीति (Defence Production and Export Promotion Policy- DPEPP), 2020' का अंतिम संस्करण भी जारी किये जाने की उम्मीद है।
    • डीपीईपीपी को आत्मनिर्भर बनने और निर्यात के लिये देश की रक्षा उत्पादन क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित करने हेतु एक अतिव्यापी मार्गदर्शक दस्तावेज़ के रूप में परिकल्पित किया गया है।

स्रोत: द हिंदू

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