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भारतीय अर्थव्यवस्था

PM किसान सम्मान सम्मेलन

  • 19 Oct 2022
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये:

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) मोड

मेन्स के लिये:

PM किसान की विशेषताएँ

चर्चा में क्यों?

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में PM किसान सम्मान सम्मेलन 2022 का उद्घाटन किया।

PM किसान सम्मान सम्मेलन

  • प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-किसान/PM-KISAN) फंड की 12वीं किस्त जारी की। योजना के तहत 8.5 करोड़ से अधिक पात्र किसानों को 16,000 करोड़ रुपए हस्तांतरित किये गए।
  • प्रधानमंत्री ने रसायन और उर्वरक मंत्रालय के तहत 600 'प्रधान मंत्री किसान समृद्धि केंद्रों' (PMKSK) का भी उद्घाटन किया। इस योजना के तहत देश में 3 लाख से अधिक खुदरा उर्वरक दुकानों को चरणबद्ध तरीके से PMKSK में परिवर्तित किया जाएगा।
  • ये केंद्र कई किसान ज़रूरतों को पूरा करेंगे जैसे कृषि-आगतें (उर्वरक, बीज, उपकरण) प्रदान करना; मृदा, बीज, उर्वरक के लिये परीक्षण सुविधाएँ, किसानों के बीच जागरूकता पैदा करना, विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान करना और ब्लॉक/ज़िला स्तर के आउटलेट पर खुदरा विक्रेताओं की नियमित क्षमता निर्माण सुनिश्चित करना।
  • प्रधानमंत्री ने 'प्रधानमंत्री भारतीय जन उर्वरक परियोजना' एक राष्ट्र, एक उर्वरक भी लॉन्च किया।
  • इस योजना के तहत 'भारत यूरिया बैग' लॉन्च किये गए हैं। ये कंपनियों को एकल ब्राॅण्ड नाम "भारत" के तहत उर्वरकों के विपणन में मदद करेंगे।
  • प्रधानमंत्री द्वारा उर्वरक पर एक ई-पत्रिका 'इंडियन एज़' का भी शुभारंभ किया गया। यह घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय उर्वरक परिदृश्यों के बारे में जानकारी प्रदान करेगा, जिसमें हालिया विकास, मूल्य रुझान विश्लेषण, उपलब्धता और खपत, किसानों की सफलता की कहानियाँ आदि शामिल हैं।

PM किसान:

  • परिचय:
    • भूमि धारक किसानों की वित्तीय ज़रूरतों को पूरा करने के लिये 1 नवंबर, 2018 को पीएम-किसान शुरू किया गया था।
  • वित्तीय लाभ:
    • प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) मोड के माध्यम से देश भर के किसान परिवारों के बैंक खातों में हर चार महीने में तीन समान किस्तों में 6000 रुपए प्रतिवर्ष का वित्तीय लाभ हस्तांतरित किया जाता है।
  • योजना का दायरा:
    • यह योजना शुरू में उन छोटे एवं सीमांत किसानों (SMFs) के लिये थी, जिनके पास 2 हेक्टेयर तक की भूमि थी, लेकिन बाद में इस योजना का दायरा सभी भूमिधारक किसानों को कवर हेतु बढ़ा दिया गया।
  • वित्तपोषण और कार्यान्वयन:
    • यह भारत सरकार से 100% वित्त पोषण के साथ केंद्रीय क्षेत्रक योजना है।
    • इसे कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है।
  • उद्देश्य:
    • इसका उद्देश्य प्रत्येक फसल चक्र के अंत में प्रत्याशित कृषि आय के अनुरूप उचित फसल स्वास्थ्य और पैदावार सुनिश्चित करने के लिये विभिन्न आदानों की खरीद संबंधी छोटे एवं सीमांत किसानों की वित्तीय ज़रूरतों को पूरा करना है।
    • इस तरह के खर्चों को पूरा करने के लिये उन्हें साहूकारों के चंगुल से बचाना तथा खेती की गतिविधियों में उनकी निरंतरता सुनिश्चित करना।
  • PM-KISAN मोबाइल एप: इसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र द्वारा विकसित और डिज़ाइन किया गया है।
  • बहिष्करण मापदंड: उच्च आर्थिक स्थिति के लाभार्थियों की निम्नलिखित श्रेणियाँ योजना के तहत लाभ के लिये पात्र नहीं होंगी।
  1. सभी संस्थागत भूमि धारक।
  2. वे किसान परिवार जो निम्नलिखित में से किसी एक या अधिक श्रेणियों से संबंधित हैं:
  • पूर्व और वर्तमान में संवैधानिक पदों के धारक
  • पूर्व और वर्तमान मंत्री / राज्य मंत्री और लोकसभा / राज्य सभा / राज्य विधान सभाओं / राज्य विधान परिषदों के पूर्व / वर्तमान सदस्य, नगर निगमों के पूर्व और वर्तमान महापौर, ज़िला पंचायतों के पूर्व और वर्तमान अध्यक्ष।
  • केंद्र/राज्य सरकार के मंत्रालयों/कार्यालयों/विभागों और इसकी क्षेत्रीय इकाइयों के सभी सेवारत या सेवानिवृत्त अधिकारी और कर्मचारी, साथ ही केंद्रीय या राज्य सार्वजनिक उपक्रम और सरकार के तहत जुड़े कार्यालयों/स्वायत्त संस्थानों के साथ-साथ स्थानीय निकायों के नियमित कर्मचारी (मल्टी-टास्किंग स्टाफ/वर्ग IV/ग्रुप डी कर्मचारी को छोड़कर) ।
  • उपरोक्त श्रेणी के सभी सेवानिवृत्त पेंशनभोगी जिनकी मासिक पेंशन 10,000/- रुपए या अधिक है (मल्टी-टास्किंग स्टाफ/वर्ग IV/ग्रुप डी कर्मचारियों को छोड़कर)।
  • विगत मूल्यांकन वर्ष में आयकर का भुगतान करने वाले सभी व्यक्ति।
  • ऐसे पेशेवर जो निकायों के साथ पंजीकृत हैं और सक्रिय रूप से अपने व्यवसायों का अभ्यास कर रहे हैं, जैसे कि डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, चार्टर्ड एकाउंटेंट और आर्किटेक्ट।

स्रोत: पी.आई.बी.

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