हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स
ध्यान दें:

डेली अपडेट्स

शासन व्यवस्था

सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है पीएम-केयर्स फंड

  • 02 Jun 2020
  • 7 min read

प्रीलिम्स के लिये

पीएम-केयर्स फंड, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष, RTI अधिनियम के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण

मेन्स के लिये

पीएम-केयर्स फंड से संबंधित बिंदु और इससे संबंधित चुनौतियाँ

चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री कार्यालय (Prime Minister's Office-PMO) ने पीएम-केयर्स फंड (PM-CARES Fund) के संबंध में RTI अधिनियम के तहत दायर आवेदन में मांगी गई सूचना को देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत पीएम-केयर्स फंड एक 'सार्वजनिक प्राधिकरण' (Public Authority) नहीं है।

प्रमुख बिंदु

  • हाल ही में केंद्र सरकार ने COVID-19 महामारी द्वारा उत्पन्न किसी भी प्रकार की आपातकालीन या संकटपूर्ण स्थिति से निपटने हेतु ‘आपात स्थितियों में प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और राहत कोष (Prime Minister’s Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations Fund)’ अर्थात् ‘पीएम-केयर्स फंड’ (PM-CARES Fund) की स्थापना की थी। 
  • इस फंड की घोषणा के बाद याचिकाकर्त्ता ने अपने RTI आवेदन में ‘पीएम-केयर्स फंड’ की ट्रस्ट डीड और इसके निर्माण तथा संचालन से संबंधित सभी सरकारी आदेशों, अधिसूचनाओं और परिपत्रों की प्रतियाँ मांगी थीं।
    • ट्रस्ट डीड (Trust Deed) के तहत ट्रस्ट का व्यवस्थापक ट्रस्ट की संपत्ति को ट्रस्ट के संरक्षकों अर्थात ट्रस्टियों (Trustees) को हस्तांतरित करता है और ट्रस्टियों को ट्रस्ट डीड में निर्दिष्ट नियमों और शर्तों के अनुसार कार्य कार्य करना अनिवार्य बनाता है।
    • ट्रस्ट डीड में मुख्यतः निम्नलिखित तथ्य शामिल होते हैं- (1) ट्रस्ट के गठन का उद्देश्य (2) फंड कहाँ से लिया जा सकता है और कहाँ से नहीं (3) ट्रस्टी की शक्तियाँ।
  • इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा दिये गए जवाब के अनुसार, ‘RTI अधिनियम, 2005 की धारा 2(h) के दायरे में ‘पीएम-केयर्स फंड’ एक ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ नहीं है। हालाँकि इस फंड से जुड़ी प्रासंगिक जानकारियाँ संबंधित वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती हैं।
  • उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी कई अवसरों पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने ‘पीएम-केयर्स फंड’ के संबंध में आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया था।

RTI अधिनियम, 2005 की धारा 2(h)

  • ज्ञातव्य है कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 2(h) के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण से तात्पर्य ऐसी संस्थाओं से है:
    • जो संविधान या इसके अधीन बनाई गए किसी अन्य विधान द्वारा निर्मित हो;
    • राज्य विधानमंडल द्वारा या इसके अधीन बनाई गई किसी अन्य विधि द्वारा निर्मित हो;
    • केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी किसी अधिसूचना या आदेश द्वारा निर्मित हो;
    • पूर्णत: या अल्पत: सरकारी सहायता प्राप्त हो।

RTI आवेदक का पक्ष

  • आवेदक के अनुसार, यदि देश में पहले से ही प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (Prime Minister’s National Relief Fund) है तो फिर एक अन्य फंड का गठन क्यों किया गया।
  • आवेदक के मुताबिक इस फंड में ऐसे विभिन्न तथ्य हैं जो इसे एक ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ बनाते हैं, उदाहरण के लिये पीएम-केयर्स फंड एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट (Public Charitable Trust) है और प्रधानमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष हैं। 
    • साथ ही रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री इसमें पदेन ट्रस्टीयों के रूप में शामिल हैं, जो कि स्पष्ट तौर पर इसके सार्वजनिक प्राधिकरण होने का संकेत देता है।
  • इस प्रकार ट्रस्ट की संरचना यह दर्शाने के लिये पर्याप्त है कि सरकार का ट्रस्ट पर अत्यधिक नियंत्रण है, जिससे यह एक सार्वजनिक प्राधिकरण बन जाता है।
  • विदित हो कि इस फंड के संबंध में जारी आवश्यक दिशा-निर्देशों में भी यह काफी अस्पष्ट है कि पीएम-केयर्स फंड सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत आता है अथवा नहीं?

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष

(Prime Minister’s National Relief Fund)

  • पाकिस्तान से विस्थापित लोगों की मदद करने के लिये जनवरी, 1948 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की अपील पर जनता के अंशदान से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष की स्थापना की गई थी।
  • प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष की धनराशि का इस्तेमाल अब प्रमुखतया बाढ़, चक्रवात और भूकंप आदि जैसी प्राकृतिक आपदाओं में मारे गए लोगों के परिजनों तथा बड़ी दुर्घटनाओं एवं दंगों के पीड़ितों को तत्काल राहत पहुँचाने के लिये किया जाता है।
  • प्रधान मंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में किये गये अंशदान को आयकर अधिनियम, 1961 (Income Tax Act, 1961) के तहत कर योग्य आय से पूरी तरह छूट हेतु अधिसूचित किया जाता है। 

स्रोत: द हिंदू

एसएमएस अलर्ट
Share Page