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भारतीय अर्थव्यवस्था

भारत के हरित हाइड्रोजन पहल के नुकसान

  • 28 Oct 2023
  • 10 min read

प्रिलिम्स के लिये:

क्‍लाइमेट रिस्‍क होरिज़ोंस (CRH), ग्रीन हाइड्रोजन, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, नवीकरणीय ऊर्जा, भारत का राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (INDC), नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन।

मेन्स के लिये:

ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में मुद्दे जो जीवाश्म ईंधन उत्सर्जन और पर्यावरणीय गिरावट को रोकने में विफल रहते हैं।

स्रोत: द हिंदू

चर्चा में क्यों?

एनवायरमेंटल एंड एनर्जी थिंक-टैंक, क्लाइमेट रिस्क होरिज़ोंस (Climate Risk Horizons- CRH) के एक हालिया अध्ययन के अनुसार, यदि हरित हाइड्रोजन उत्पादन में जीवाश्म ईंधन उत्सर्जन पर अंकुश लगाने के लिये आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो भारत के हरित हाइड्रोजन पहल से प्रदूषण बढ़ सकता है।

  • नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New and Renewable Energy- MNRE) द्वारा संचालित भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को वर्ष 2030 तक पाँच मिलियन टन का उत्पादन करने की अपेक्षा है।

हरित हाइड्रोजन उत्पादन में वर्तमान मुद्दे:

  • हरित हाइड्रोजन की परिभाषा::
    • MNRE ने हरित हाइड्रोजन को हाइड्रोजन उत्पादन के रूप में परिभाषित किया है जो प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन के साथ 2 किलोग्राम से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित नहीं करता है।
      • हालाँकि इस परिभाषा की व्याख्या अभी नहीं हो पाई है जिससे इसके व्यावहारिक कार्यान्वयन को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं।
  • इलेक्ट्रोलाइज़र का निरंतर संचालन:
    • यदि इलेक्ट्रोलाइज़र (हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिये आवश्यक) का उपयोग 24 घंटे किया जाता है तो उन्हें रात में बिना किसी सौर ऊर्जा संचालित करने की आवश्यकता होगी। इसके लिये संभवतः पारंपरिक कोयला आधारित ग्रिड से बिजली बनाने की आवश्यकता होगी, जिसके उपयोग से कार्बन उत्सर्जन बढ़ सकता है।
  • परियोजना विद्युत स्रोतों में पारदर्शिता का अभाव:
    • इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकांश परियोजनाओं ने अपने बिजली स्रोतों का खुलासा नहीं किया है तथा यह स्पष्ट नहीं है कि जिन कुछ परियोजनाओं ने प्रतिबद्धता जताई है, वे नवीकरणीय स्रोतों से अपनी 100% बिजली आवश्यकताओं को पूरा कर रही हैं या नहीं।

हरित हाइड्रोजन उत्पादन के निहितार्थ: 

  • बायोमास का उपयोग और हरित हाइड्रोजन उत्पादन:
    • भारत में हरित हाइड्रोजन के उत्पादन के लिये बायोमास के उपयोग की अनुमति है- जो जलने पर कार्बन उत्सर्जन उत्पन्न करता है। इससे पूर्णतः स्वच्छ हरित हाइड्रोजन के उत्पादन में समस्या उत्पन्न होती है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का विचलन:
    • हरित हाइड्रोजन के उत्पादन के लिये बड़ी मात्रा में नवीकरणीय ऊर्जा (RE) क्षमता की आवश्यकता होती है। हालाँकि इस क्षमता के एक बड़े हिस्से को हरित हाइड्रोजन उत्पादन में नियोजित करने से उपभोक्ताओं के लिये अपर्याप्त बिजली जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है
      • इसके लिये 125 गीगावॉट की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के नियोजन की आवश्यकता होगी, जो भारत की वर्तमान बिजली उत्पादन के लगभग 13% के बराबर है।
      • उन परियोजनाओं से वित्त को हटाने का जोखिम, जो बिजली ग्रिड को हरित हाइड्रोजन उत्पादन में डीकार्बोनाइज़ करने में मदद करेगा, चिंता का विषय है।
  • उद्योग विस्तार और निवेश:
    • भारत में कई प्रमुख बिजली उपयोगिताओं, जैसे कि रिलायंस इंडस्ट्रीज़, अदानी समूह और नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन ने अपने हरित हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ाने के लिये महत्त्वाकांक्षी योजनाओं की घोषणा की है, जिसमें ऐसी चिंताएँ आगे के निवेश में बाधा बन सकती हैं।

हरित हाइड्रोजन का महत्त्व:

  • उत्सर्जन लक्ष्य प्राप्त करना:
  • ऊर्जा भंडारण और गतिशीलता:
    • हरित हाइड्रोजन एक ऊर्जा भंडारण विकल्प के रूप में कार्य कर सकता है, जो भविष्य में (नवीकरणीय ऊर्जा की) बाधाओं को समाप्त करने के लिये आवश्यक होगा।
      • गतिशीलता के संदर्भ में, शहरों और राज्यों के भीतर शहरी माल ढुलाई हेतु या यात्रियों के लंबी दूरी की गतिशीलता के लिये, ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग रेलवे, बड़े जहाज़ों, बसों या ट्रकों आदि में किया जा सकता है।
  • आयात निर्भरता कम करना: 
    • इससे जीवाश्म ईंधन पर भारत की आयात निर्भरता कम हो जाएगी। इलेक्ट्रोलाइज़र उत्पादन का स्थानीयकरण और हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं का विकास भारत में 18-20 बिलियन अमेरिकी डॉलर का एक नया हरित प्रौद्योगिकी बाज़ार के साथ हजारों रोज़गार का सृजन कर सकता है।

आगे की राह 

  • ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रोलाइज़र क्षमता के लिये एक राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित करना: भारत में ग्रीन स्टील (वाणिज्यिक हाइड्रोजन स्टील प्लांट) जैसे जीवंत हाइड्रोजन उत्पाद निर्यात उद्योग के निर्माण के लिये एक चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम का उपयोग किया जाना आवश्यक है।
  • पूरक समाधान लागू करना जो सकारात्मक चक्र का निर्माण करे: उदाहरण के लिये हवाई अड्डों पर ईंधन भरने, हीटिंग करने और विद्युत उत्पन्न करने के लिये हाइड्रोजन बुनियादी ढाँचे की स्थापना की जा सकती है।
  • विकेंद्रीकृत उत्पादन: इलेक्ट्रोलाइज़र (जो विद्युत का उपयोग करके जल को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विघटित करता है) तक नवीकरणीय ऊर्जा की खुली पहुँच के माध्यम से विकेंद्रीकृत हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा दिया जाना चाहिये।
  • वित्त प्रदान करना: नीति निर्माताओं को भारत में उपयोग के लिये प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाने हेतु  प्रारंभिक चरण के संचालन और आवश्यक अनुसंधान एवं विकास में निवेश की सुविधा प्रदान करनी चाहिये।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न   

प्रिलिम्स: 

प्रश्न. निम्नलिखित भारी उद्योगों पर विचार कीजिये: (2023)

  1. उर्वरक संयंत्र 
  2. तेलशोधक कारखाने 
  3. इस्पात संयंत्र

उपर्युक्त में से कितने उद्योगों के विकार्बनन में हरित हाइड्रोजन की महत्त्वपूर्ण भूमिका होने की अपेक्षा है?

(A) केवल एक
(B) केवल दो
(C) सभी तीन
(D) कोई भी नहीं

उत्तर: (C)


प्रश्न. हरित हाइड्रोजन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2023)

  1. इसे आंतरिक दहन के लिये ईंधन के रूप में सीधे इस्तेमाल किया जा सकता है। 
  2. इसे प्राकृतिक गैस के साथ मिलाकर ताप या शक्ति जनन के लिये ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। 
  3. इसे वाहन चालन के लिये हाइड्रोजन ईंधन प्रकोष्ठ में इस्तेमाल किया जा सकता है।

उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

(a) केवल एक
(b) केवल दो
(c) सभी तीन
(d) कोई भी नहीं

उत्तर: (c)


प्रश्न. हाइड्रोजन ईंधन सेल वाहन "निकास" के रूप में निम्नलिखित में से एक का उत्पादन करते हैं: (2010)

(a) NH3
(b) CH4
(c) H2O
(d) H2O2

उत्तर: (c)

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