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वर्ष 2024 में OTT का दृश्य

  • 09 Jan 2024
  • 11 min read

प्रिलिम्स के लिये:

वर्ष 2024 में OTT का दृश्य/आउटलुक, ओवर-द-टॉप (OTT) मार्केट, सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम 2021

मेन्स के लिये:

वर्ष 2024 में OTT का आउटलुक।

स्रोत: द हिंदू 

चर्चा में क्यों?

भारत में OTT मार्केट वर्तमान में मूल्य-संवेदनशील बाज़ार में विकास और लाभप्रदता के मध्य दुविधा से जूझ रहा है। वर्ष 2023 में, भारत में ओवर-द-टॉप (OTT) मार्केट ने महत्त्वपूर्ण व्यवधानों और चुनौतियों का अनुभव किया, जिससे इसके विकास में असंतुलन हुआ है।

ओवर-द-टॉप क्या है?

  • परिचय:
    • OTT का मतलब “ओवर-द-टॉप (Over-The-Top)” है, यह शब्द पारंपरिक प्रसारण, केबल या सैटेलाइट टी.वी. प्लेटफार्मों को दरकिनार करते हुए दर्शकों को सीधे इंटरनेट पर सामग्री वितरण का वर्णन करने के लिये उपयोग किया जाता है।
    • OTT बाज़ार उस उद्योग को संदर्भित करता है जो इंटरनेट के माध्यम से उपयोगकर्त्ताओं को स्ट्रीमिंग मीडिया सेवाएँ, फिल्में, टी.वी. शो, संगीत और अन्य सामग्री प्रदान करता है।
    • उदाहरण: नेटफ्लिक्स (Netflix), डिज़्नी प्लस (Disney+), हुलु (Hulu), अमेज़ॅन प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video), पीकॉक (Peacock), क्यूरियोसिटी-स्ट्रीम (CuriosityStream), प्लूटो टी.वी. (Pluto TV) और अन्य।
  • OTT के लाभ:
    • फ्लेक्सीबिलिटी और सुविधा:
      • उपयोगकर्त्ता विशिष्ट सुविधा प्राप्त करते हुए, कभी भी, कहीं भी, कई उपकरणों पर सामग्री को एक्सेस कर सकते हैं।
      • विविध सामग्री: 
      • OTT प्लेटफॉर्म विभिन्न पसंद और रुचियों को पूरा करने वाली फिल्मों, टी.वी. शो, वृत्तचित्र तथा मूल प्रस्तुतियों सहित सामग्री की एक विस्तृत शृंखला पेश करते हैं।
    • वैयक्तिकरण:
      • ये प्लेटफॉर्म देखने की आदतों, उपयोगकर्त्ता अनुभव और सामग्री खोज को बढ़ाने के आधार पर सामग्री की अनुशंसा करने के लिये एल्गोरिदम का उपयोग करते हैं।
    • लागत प्रभावशीलता:
      • पारंपरिक केबल अथवा सैटेलाइट टी.वी. सब्सक्रिप्शन की तुलना में OTT सेवाएँ अमूमन अधिक किफायती मूल्य निर्धारण विकल्प प्रदान करती हैं, जिसमें विज्ञापन विकल्प अथवा सब्सक्रिप्शन प्राप्त करने के साथ मुफ्त कॉन्टेंट/सामग्री की सुविधा प्रदान की जाती है।
    • वैश्विक पहुँच:
      • OTT प्लेटफॉर्म भौगोलिक बाधाओं का समाधान कर विश्व भर में उपयोगकर्त्ताओं को उनके मन चाहे स्थान पर सामग्री पहुँचाने में सहायता प्रदान करता है।
  • OTT की सीमाएँ:
    • इंटरनेट पर निर्भरता:
      • OTT में निर्बाध स्ट्रीमिंग के लिये हाई-स्पीड इंटरनेट महत्त्वपूर्ण है। खराब कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में सामग्री तक पहुँच में बाधा का सामना करना पद सकता है।
    • सामग्री की विविधता:
      • विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर सामग्री संबंधी विशेषाधिकारों के परिणामस्वरूप दर्शकों की संख्या प्रभावित होती है जिससे विशेष शो अथवा फिल्मों तक पहुँचने के लिये उपयोगकर्त्ताओं को एकाधिक सब्सक्रिप्शन की आवश्यकता हो सकती है।
    • डेटा संबंधी चिंताएँ:
      • OTT प्लेटफॉर्म सामग्री को उपयोगकर्त्ता के उपयुक्त बनाने के लिये उनका डेटा एकत्र करते हैं जिनका उपयोग अनुचित तरीके से किया जा सकता है अथवा उपयोगकर्त्ता सहमति के बिना तीसरे पक्ष के साथ डेटा साझा किया जा सकता है जिससे गोपनीयता संबंधी चिंताएँ बढ़ जाती हैं।
    • सामग्री की गुणवत्ता तथा उपलब्धता:
      • हालाँकि सामग्री की उपलब्धता अत्यधिक है किंतु सामग्री की गुणवत्ता भिन्न हो सकती है। इसके अतिरिक्त सामग्री की व्यापक उपलब्धता उपयोगकर्त्ताओं के लिये गुणवत्तापूर्ण सामग्री की खोज को अत्यधिक कठिन बना सकती है।

वर्ष 2023 में OTT की स्थिति तथा वर्ष 2024 हेतु इसका परिदृश्य क्या है?

  • वर्ष 2023 में OTT परिदृश्य में निशुल्क प्रीमियम सामग्री की प्रस्तुति करने वाले प्लेटफॉर्म अन्य की तुलना में अत्यधिक प्रभावित हुए तथा निशुल्क प्रस्तुति करने के परिणामस्वरूप अंततः उन्हें सब्सक्रिप्शन से प्राप्त आय में घाटे का सामना करना पड़ा।
  • सामग्री संबंधी मुद्रीकरण की चुनौतियाँ बनी रहीं तथा उच्च सामग्री लागत के कारण कोई भी लाभ-अलाभ (break-even) की स्थिति में नहीं था।
  • फ्रीमियम मॉडल की प्रस्तुति हुई जिससे पासवर्ड साझा करने तथा विज्ञापनों को एकीकृत करने पर अंकुश लगा। विनियामक चिंताएँ बनी रहीं किंतु सेंसरशिप को समर्थन नहीं दिया गया जिससे चयनात्मक डेटा साझाकरण को बढ़ावा मिला।
  • वर्ष 2024 के परिदृश्य में प्रयोगात्मक सामग्री में गिरावट के साथ लागत-प्रभावशील सामग्री रणनीतियों की अपेक्षा है। Zee/Sony जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म के बीच विलय तथा RIL/Disney जैसे संभावित सहयोग बाज़ार की गतिशीलता को पुनर्गठित कर सकते हैं, जिससे सौदेबाज़ी की शक्ति एवं सामग्री लागत प्रभावित हो सकती है।
  • मूल्य-निर्धारण रणनीतियाँ विज्ञापनों को साझा करने और एम्बेड करने पर संभावित तीव्र सीमाओं को विकसित करना जारी रखेंगी।
  • धार्मिक या अल्पसंख्यक भावनाओं के प्रति संवेदनशीलता पर बल देते हुए नियामक अनुपालन सख्त हो सकता है। दर्शकों के रुझान में पारदर्शिता बढ़ने से विज्ञापनदाताओं और रचनाकारों को मदद मिलेगी।

ओटीटी प्लेटफॉर्मों को विनियमित करने वाले कानून क्या हैं?

  • ओटीटी प्लेटफॉर्मों को विनियमित करने के लिये, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय  (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) ने वर्ष 2022 में सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021 जारी किया।
  • ओटीटी प्लेटफार्मों के लिये दिशानिर्देश एक सॉफ्ट-टच स्व-नियामक वास्तुकला स्थापित करते हैं, जिसमें आचार संहिता और तीन स्तरीय शिकायत निवारण प्रक्रिया शामिल है।
    • प्रत्येक प्रकाशक को 15 दिनों में शिकायतें प्राप्त करने और उनका निवारण करने के लिये भारत में स्थित एक शिकायत अधिकारी नियुक्त करना चाहिये।
    • इसके अलावा, प्रत्येक प्रकाशक को एक स्व-नियामक समूह में शामिल होना होगा। ऐसे संगठन को सूचना और प्रसारण मंत्रालय के साथ पंजीकृत होना होगा तथा 15 दिनों के अंदर प्रकाशन द्वारा हल नहीं किये गए मुद्दों का समाधान करना होगा।
    • सूचना प्रसारण मंत्रालय और मंत्रालय द्वारा गठित अंतर-विभागीय समिति तृतीय-स्तरीय निरीक्षण तंत्र का गठन करती है।
  • वे केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की भागीदारी के बिना सामग्री के स्व-वर्गीकरण की सुविधा प्रदान करते हैं।

ओटीटी के बेहतर नियमन के लिये क्या किया जा सकता है?

  • स्व-विनियमन ढाँचा:
    • पारंपरिक मीडिया के समान पारदर्शी सामग्री दिशानिर्देश और रेटिंग सिस्टम स्थापित करने के लिये ओटीटी प्लेटफॉर्मों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।
    • उद्योग-आधारित स्व-नियमन रचनात्मकता को प्रभावित किये बिना चिंताओं को दूर कर सकता है।
  • सहयोगात्मक निरीक्षण निकाय:
    • उद्योग विशेषज्ञों, हितधारकों और सरकारी प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए स्वतंत्र निकाय बनाना अनिवार्य है। ये निकाय सामग्री की निगरानी कर सकते हैं, शिकायतों की समीक्षा कर सकते हैं तथा उद्योग मानक निर्धारित कर सकते हैं।
  • स्पष्ट सामग्री वर्गीकरण और रेटिंग:
    • उपयोगकर्त्ताओं को आयु-उपयुक्तता और सामग्री विषयों के आधार पर सूचित देखने के विकल्प चुनने में मदद करने के लिये मानकीकृत सामग्री वर्गीकरण प्रणालियों को लागू करने की आवश्यकता है।
  • डेटा शेयरिंग में पारदर्शिता:
    • OTT प्लेटफार्मों को दर्शकों के रुझान को चुनिंदा रूप से निरीक्षण निकायों के साथ साझा करने, सामग्री मूल्यांकन में सहायता करने और दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिये प्रोत्साहित कीजिये।
  • नियमित ऑडिट और अनुपालन जाँच:
    • यह सुनिश्चित करने के लिये समय-समय पर ऑडिट करने की आवश्यकता है कि प्लेटफॉर्म स्थापित दिशा-निर्देशों का पालन करें, जवाबदेही और ज़िम्मेदार सामग्री क्यूरेशन को बढ़ावा दें।

निष्कर्ष

  • OTT ने लचीलापन, विकल्प और सुविधा प्रदान करके लोगों के मनोरंजन के तरीके को बदल दिया है।
  • तकनीकी प्रगति, बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताओं और मीडिया तथा मनोरंजन के गतिशील परिदृश्य के कारण बाज़ार का विकास जारी है।
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