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स्क्रब टाइफस : पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस का प्रमुख कारण

  • 08 Aug 2018
  • 4 min read

संदर्भ

गोरखपुर के बाबा राघव दास (BRD) मेडिकल कॉलेज के तीन साल के आँकड़ों से पुष्टि हुई  है कि प्रत्येक वर्ष अगस्त और अक्तूबर के बीच अस्पताल में भर्ती होने वाले तीव्र इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (Acute Encephalitis Syndrome -AES) वाले बहुत से रोगियों में स्क्रब टाइफस होता है।

खोज का महत्त्व

  • यह खोज इसलिये महत्त्वपूर्ण है क्योंकि शुरुआती दौर में इसकी पहचान हो जाने पर स्क्रब टाइफस का इलाज आसानी से किया जा सकता है।

स्क्रब टाइफस
Scrub Typhus

पिस्सुओं के काटने से होने वाली इस बीमारी में भी डेंगू की तरह प्लेटलेट्स की संख्या घटने लगती है। यह बीमारी स्वयं संक्रामक नहीं है लेकिन इसमें शरीर के कई अंगों में संक्रमण फैलने लगता है। यह बीमारी ओरिएंटा सुसुगामुशी नामक जीवाणु के कारण होती है।

पृष्ठभूमि

  • स्क्रब टाइफस की भूमिका का पहला संकेत कर्नाटक के मणिपाल सेंटर फॉर वायरल रिसर्च (Manipal Centre for Viral Research) के शोधकर्त्ताओं द्वारा BRD में 2014 के दौरान किये गए एक अध्ययन के दौरान मिला था। लेकिन तब इस परिकल्पना के बारे में बहुत संदेह था।
  • हालाँकि इसके बाद  अन्य शोधकर्त्ताओं ने इसी तरह के कुछ और निष्कर्षों की सूचना दी। 2015 में चेन्नई के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी (Chennai’s National Institute of Epidemiology) की एक टीम ने पाया कि सितंबर-अक्तूबर माह के दौरान परीक्षण किये गए 370 AES रोगियों में से  63% रोगियों में स्क्रब टाइफस के लिये एंटीबॉडी मौजूद थी। ये निष्कर्ष ‘जर्नल ऑफ इंफेक्शन’ में प्रकाशित किये गए।

आँकड़े

  • वर्ष 2016 में इसी अवधि के दौरान 407 AES रोगियों में से 65% को यह बीमारी थी।
  • इसके अलावा, जब सभी AES रोगियों को स्क्रब टाइफस के उपचार के लिये एज़ीथ्रोमाइसिन (azithromycin) दिया गया तब 35%  गैर-स्क्रब-टाइफस रोगियों की मृत्यु हो गई, जबकि स्क्रब रोगियों में से केवल 15% की मृत्यु हुई, जो यह दर्शाता है कि एज़ीथ्रोमाइसिन प्रभावी था। ये निष्कर्ष इस साल मई में बाल चिकित्सा संक्रामक रोग जर्नल (Pediatric Infectious Disease Journal)  में प्रकाशित हुए थे।
  • अंत में, 2017 में, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च द्वारा साझा किये गए आँकड़ों के मुताबिक, अगस्त-सितंबर के दौरान BRD में भर्ती रोगियों में से 50% से अधिक में स्क्रब टाइफस सकारात्मक पाया गया।

पिस्सुओं (Mites) का अध्ययन

  • स्क्रब टाइफस की भूमिका के संदर्भ में और अधिक साक्ष्य चेन्नई के वेक्टर कंट्रोल रिसर्च सेंटर (Vector Control Research Centre -VCRC) द्वारा पूर्वी उत्तर प्रदेश में ट्रॉम्बिकुलिड (trombiculid) के अध्ययन से प्राप्त हुए हैं।
  • शोधकर्त्ताओं के अनुसार, ये पिस्सु ओरिएंटा सुसुगामुशी (Orientia tsutsugumashi) बैक्टीरिया (जो स्क्रब टाइफस का कारण बनता है) को स्थानांतरित करते हैं।
  • यह अध्ययन जुलाई 2018 में वेक्टर बोर्न और ज़ूनोटिक डिज़ीज़े में प्रकाशित हुआ था।
  • यह अध्ययन बताता है कि क्यों मॉनसून के दौरान टाइफस की घटनाओं में तेज़ी से वृद्धि होती है।
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